
यह कविता एक गहरे प्रेम का चित्रण करती है, जिसमें प्रियतम का साया रात की खामोशी में भी दिखाई देता है। अतीत की यादें और ख्वाबों में बसी हुई उनकी झलक, प्रेमी के दिल में एक अटूट प्रेम और दूरी के बावजूद उनकी निकटता का अहसास कराती है।
यह कविता उस मीठे दर्द और यादों की सजीवता का प्रतीक है, जो प्रिय की अनुपस्थिति में भी उनकी मौजूदगी को महसूस कराती है।
प्रेम की इबारत
रात की चुप्पियों में हमने उनका साया देखा,
दिल जिस पे आया मैंने उसका अक्स देखा।
अंधेरी रात में समंदर के किनारे खोए थे हम,
रेत पर लिखी प्यार की इबारत को मैंने देखा।
दूर होते हुए भी, वे मुझे करीब से लगे,
हर कदम पे मैंने प्यार का नशा देखा।
आसमान की ऊँचाइयों में टंगे थे कुछ ख्वाब,
उन ख्वाबों पर लिखा मैंने तुम्हारा नाम देखा।
दिल की गहराइयों में बसी थीं तेरी बातें,
ढूँढने में तुझे, लंबी हो गई मेरी रातें।
मैं चल रहा हूँ अनजान रास्तों पर मगर
तुम्हें याद तो होगा हमारी पुरानी मुलाकातें।
(विजय वर्मा)

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Categories: kavita
very nice.
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Thank you.
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Your drawing is beautiful.
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Thank you so much.
Your words mean a lot for me.
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