# तुम बिन अधूरा #

यह कविता एक गहरे प्रेम और लगाव की भावनाओं को व्यक्त करती है, जहां प्रेमी की उपस्थिति जीवन के हर पहलू को अर्थपूर्ण और सुंदर बना देती है।

दिल की धड़कनों से लेकर सांसों तक, हर छोटी चीज़ में प्रेमी की मौजूदगी महसूस की जाती है, और उसकी अनुपस्थिति जीवन को खाली और सूनापन का एहसास कराती है ।

तुम बिन अधूरा

तुम हो तो मेरी हर धड़कन गीत गाती है,
एक सुर में, सिर्फ तुम्हारा नाम गुनगुनाती है।
तुम्हारी मुस्कान से जग जगमगा उठता है,
हर पल तुम्हारे प्यार में ही डूबा रहता है।

तुम्हारी आवाज़ में जैसे  बाँसुरी बजती है,
मेरी हर नस में तुम्हारी ही यादें घुलती हैं।
बिन तुम्हारे मेरा ये दिल सूना सा लगता है,
जैसे कोई तार टूटकर अधूरा रह गया है।

तुम नहीं तो घर भी अब घर नहीं लगता,
घर का हर कोना तुम्हारी यादों से सजता है।
खाली कमरे में तुम्हारी ही आवाज़ गूँजती है,
जैसे कोई पुराना खत पढ़ा जा रहा हो।

तुम हो तो डर की कोई बात नहीं है ,
तुम्हारे साथ हर राह आसान लगती है।
तुम्हारी आँखों में जो प्यार समाया है,
उसी में मेरी सारी दुनिया दिखती है।

तुम हो तो सब कुछ है, दिल ऐसा कहता है ,
तुम बिन ये जीवन अधूरा सा लगता है।
तुम साथ हो तो हर लम्हा खूबसूरत है,
तुझे देख मेरा दिल हमेशा मुस्कुराता है।
(विजय वर्मा)

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Categories: kavita

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8 replies

  1. 👌 बहुत सुंदर! उम्दा रचना।👌🙏

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    • बहुत बहुत धन्यवाद | आपकी सराहना मेरे लिए बेहद मूल्यवान है। 😊🙏
      आपकी प्रेरणा से और बेहतर रचनाएं करने का हौसला मिलता है। आपका समर्थन इसी तरह बना रहे! ✨❤️

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  2. सुन्दर कविता।

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