“ज़िन्दगी की चाय”

मेरी यह कविता जीवन की उलझनों और सवालों के बीच एक सुकून भरे पल की यात्रा पर ले जाती है। चाय की प्याली के हर घूँट में जीवन के विभिन्न रंगों और अनुभवों को समेटते हुए, हमें जीवन के सच्चे अर्थ समझने का संदेश देती है। मुझे आशा है यह कविता आपको पसंद आएगी |

“ज़िन्दगी की चाय”

सवालों में उलझी हुई है ज़िन्दगी,
जैसे कोई गुम है तन्हा राहों में,
अनजान सफर, आओ बैठें साथ,
चाय की प्याली हो अपने हाथ,
चलो, सुलझाएं इन उलझनों को,
घूँट दर घूँट।
भाप उठती प्याली से,
सुगंध घुलती फिजा में,
जैसे कोई कहानी सुना रही हो,
धीमी आवाज़ में।

पहला घूँट, कड़वाहट भरा,
जीवन की सच्चाई,
दूसरा घूँट, थोड़ी मिठास,
उम्मीद की किरण।
तीसरा घूँट, तीखापन,
चुनौतियों का सामना,
चौथा घूँट, सुकून,
जीत का आनंद।


हाँ, हर घूँट में एक कहानी,
हर कहानी में एक सबक,
यही है ज़िन्दगी की चाय,
जो सिखाती है जीने का सबब |
(विजय वर्मा )

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2 replies

  1. very nice

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