#मंज़िल की ओर#

इस कविता में जीवन की यात्रा के संघर्षों और अकेलेपन की भावना को गहराई से व्यक्त किया गया है। यह कविता हमें सिखाती है कि चाहे कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं, हमें हिम्मत और उम्मीद के साथ अपने सफर को जारी रखना चाहिए।

इन्हीं भावनाओं और सच्चाइयों को सजीव करता मेरी यह कविता , आइये इसका आनंद लें |

मंज़िल की ओर

ज़रूरी है दोस्त, चलना तो पड़ेगा
सफ़र कठिन, पर यही तो ज़िंदगी है
ख्वाबों की चादर, उम्मीदों का संग
मुश्किलें होंगी, पर राहें भी रंग-बिरंगी हैं |

आसमान में तारे भी, चमकते हैं कभी
जैसे खुशियों की बारिश, बरसेगी अभी
अपने हों या ना हों, मंज़िल तो पास है
हौसलों की उड़ान, यही तो विश्वास है |

राहों में मोड़ आएंगे, कदम ठिठकेंगे
पर हिम्मत का दामन, कभी न छोड़ेंगे
सुनसान राहें भी, एक दिन चमकेंगी
ज़िंदगी की ये राहें, हमें ले जाएंगी |

आँसुओं की धार, बन जाएगी मुस्कान
हर एक चोट, देगी एक नया एहसास
चलते रहेंगे, अब ये सफर नहीं थमेगा
ज़िंदगी की राहों पर, हर दिन नया होगा |

इस सफर में, खुद को खो न देना है
सपनों का कारवां, सजाए रखना है
क्योंकि चलते-चलते, कहीं ना कहीं
हमारी मंज़िल, मिल ही जाएगी |
(विजय वर्मा )

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6 replies

  1. 💚💖💓 NICE

    Blessed and Happy afternoon 🌞

    Greetings 🇪🇸

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  2. very nice.

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  3. Inspiring Poem.Nice one.

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