#लेखन की चोरी# 

मेरे प्यारे दोस्तों,

आज हिंदी दिवस है और इस मौके पर आप सभी को हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

1949 में आज ही के दिन संविधान सभा द्वारा यह निर्णय लिया गया था कि हिंदी केंद्र सरकार की आधिकारिक भाषा होगी। हिंदी के महत्व पर जोर देने और इसे हर क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए, 1953 से हर साल भारतीय 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाते हैं।

हम इस बात से तो भली-भांति परिचित हैं कि भारत में अलग-अलग धर्मों के लोग रहते हैं और यहां अलग-अलग भाषाएं बोली जाती हैं |

भारत की सबसे खूबसूरत बात यह है कि आज भी हम एक परिवार की तरह मिलजुलकर रहते हैं। आज देशभर में मनाए जा रहे हिंदी दिवस का उद्देश्य इस भाषा को गैर-हिंदी भाषी राज्यों पर थोपना नहीं है, बल्कि यह प्रचारित करना है कि हिंदी का ज्ञान होना हमारे लिए कितना जरूरी है |

क्योंकि कुल जनसंख्या में भारत की आधी से अधिक जनसंख्या यह भाषा बोलती है|

हिंदी भाषा की बात करें तो इंडो-आर्यन भाषा अंग्रेजी और मंदारिन चीनी के बाद विश्व स्तर पर सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनिया भर में 600 मिलियन लोग एक दूसरे से संचार करने के लिए हिंदी भाषा का प्रयोग करते हैं।

दोस्तों,

आज इस विषय पर जब मैं ब्लॉग लिख रहा था  तो मुझे एक वाक्या अभी अभी याद आ गया , जिसे महसूस कर आज फिर मेरे चेहरे पर मुस्कराहट बिखर गयी | वो घटना कुछ इस तरह थी…..

हिंदी ऑफिसर बना दिया गया

बात उन दिनों की जब मैं  स्टेट बैंक ऑफ़ बीकानेर एंड जयपुर की क्षेत्रीय कार्यालय, पटना में पदस्थापित था | यह बात सन २००४  की है उन दिनों बैंक से सम्बंधित सभी  कार्य मैन्युअल हुआ करता था , क्योंकि तब computerization  नहीं हो पाया था |

 मुझे जबरदस्ती हिंदी ऑफिसर बना दिया गया था | मुझे अपनी सीट के कार्य के आलावा हिंदी विभाग भी संभालना था |

दरअसल किसी काम को मैं मना  नहीं करता था और क्षेत्रीय प्रबंधक महोदय मुझे बहुत मानते थे | इस लिए उनके निर्देश का पालन करते हुए मैं हिंदी ऑफिसर का पद संभाल  लिया और धीरे – धीरे हिंदी भी सिखने लगा | हिंदी अधिकारी होने के कारण  सभी पत्रों के ज़बाब हिंदी में लिखने पड़ते थे |

इस सिलसिले में कुछ साहित्यिक लेखन की नक़ल भी करने लगा ताकि हिंदी कार्य को ठीक से कर सकूँ.|. उन्ही दिनों  हमारे प्रधान कार्यालय में लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसके प्रभारी श्री  रमा कान्त शर्मा जी थे | और “हिंदी दिवस” के अवसर पर  उन्होंने मुझे निर्देश दिया कि अपने क्षेत्र की शाखाओ से प्रतियोगी की भागीदारी सुनिश्चित  की जाये |

मुझे सभी participants से निबंध एकत्र कर उन्हें भेजना था | ताकि उतीर्ण प्रतिभागी को उचित पुरस्कार  दी जा सके | शीर्षक था “वायु प्रदुषण और उसके दुष्परिणाम” | मेरे प्रयास से बहुत से प्रतियोगी ने अपनी लेख मेरे पास जमा किये जिसे प्रधान कार्यालय भेजने थे |

“हिंदी दिवस” के अवसर पर निबंध

इस बीच शर्मा जी का फ़ोन आया कि मुझे भी इस प्रतियोगिता में भाग लेना है क्योंकि हम हिंदी विभाग के मुखिया है | मुझे तो अपने  डेस्क के काम से ही फुर्सत मिलती नहीं थी और हिंदी में मैं ज्यादा सहज भी नहीं था | मैं बहुत परेशान था कि कैसे मैं एक लिख पाउँगा | तभी मेरे एक दोस्त ने बहुत अच्छा उपाय बताया |

उसके सुझाये उपाय के तहत प्रतिभागी द्वारा जमा कराये गए तीन  लेख जो मुझे अच्छे लग रहे थे,  उसे सेलेक्ट कर लिया और तीनो को मिलाकर  एक  नया  लेख तैयार कर लिया | और लेखक में अपना नाम डाल  दिया | मैं तो बस शर्मा जी के निर्देश का पालन करने हेतु बेमन से दूसरों की लेख की चोरी कर एक नयी लेख तैयार कर लिया था |

मुझे उस दिन बहुत आश्चर्य हुआ जब उतीर्ण प्रतिभागी में मेरा भी नाम था | मुझे द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था और जिनकी नक़ल की थी वे लोग पहला और तीसरा स्थान पर थे  और एक तो चौथे स्थान पर खिसक गए थे  | मुझे पुरस्कार मिलने की एक तरफ तो ख़ुशी महसूस हो रही थी लेकिन दूसरी तरफ लेखन  की नक़ल करने पर  आत्मग्लानी भी….😂😂

हम सभी संकल्प लेते है कि …

हिंदी ही हम हैं, हिंदी से ही हम हैं ! इस हिंदी दिवस पर हम सभी को हिंदी को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देने और इसके महत्व को समझने का संकल्प लेना चाहिए।

हमें हिंदी की गरिमा और महत्व को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करना चाहिए ताकि हमें हमेशा हमारी भाषा पर अभिमान रहे और हम इससे जुड़े रहें। आप सभी का धन्यवाद।

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मन की  कलम से

दर्द की स्याही बिखरता रहा 

दिल बेचैन था

रात  भर मैं लिखता रहा ..

छू रहे थे लोग

बुलंदिया आसमान की 

मैं पानी की बूंद

बादलों में छिपता रहा…

 BE HAPPY… BE ACTIVE … BE FOCUSED ….. BE ALIVE,,

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Categories: मेरे संस्मरण

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6 replies

  1. बहुत ख़ूब 👌👌👌💯

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