# गुस्सा करने से पहले#  

किसी ने क्या खूब कहा है … जब आपको गुस्सा आये तो गुस्से में बोलने से पहले सौ तक गिन लेना और जब आपको बहुत ज्यादा गुस्सा आये तो गुस्से में कुछ बोलने से पहले हज़ार तक गिन लेना | इसी गुस्से के सन्दर्भ में एक कहानी प्रस्तुत है |

एक व्यापारी की कहानी है,  जो अपने देश में रह कर व्यापार कर रहा था | उसका नाम सेठ धनी राम था | वह दिखने में बिलकुल जवान और मेहनती  था | उसका व्यापार ठीक ठाक ही चल रहा था, फिर भी उसकी इच्छा थी, खूब पैसे कमाना और एक बड़ा व्यापारी बनना |

इसके लिए वो विदेश जाना चाहता था | माँ – बाप का एकलौता संतान था इसलिए घरवाले उसे विदेश नहीं भेजना चाहते थे | उन्होंने उसकी शादी कर दी ताकि वो कहीं दूसरी जगह नहीं जा पाए | उसकी पत्नी बहुत अच्छी थी और उसे बहुत प्यार करती थी |

शादी के कुछ दिनों के बाद उसने  विदेश जाने की इच्छा अपनी पत्नी को बताया | पत्नी ने कहा – आपकी ख़ुशी में ही मेरी ख़ुशी है | आप ज़रूर विदेश जाएँ, मैं आपकी अनुपस्थिति में माँ – बाप की देख भाल करुँगी |

उसकी पत्नी ने पिता से भी उसे विदेश जाने की अनुमति दिला दी | धनि राम ख़ुशी – ख़ुशी विदेश चला गया | उसकी पत्नी भी इधर माँ बनने वाली थी , लेकिन यह बात वो अपने पति से छुपा ली थी  ताकि उसके पति को विदेश जाने में उसकी ममता बाधा न बन जाए |

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अंततः वह विदेश में रह कर अपना बिज़नस शुरू करता है और देखते ही देखते उसका व्यापार खूब अच्छा चलने लगता है | वो समय समय पर पैसे भेजता और चिट्ठी के द्वारा हाल चाल लेता रहता | इसी तरह करीब 16 साल बीत गए और तभी उसके पिता की मृत्यु हो गयी | उसे बहुत दुःख हुआ क्योंकि वह ऐसे समय पर अपने पिता जी के साथ नहीं था |

उसे अब अपने देश और अपने घर की याद सताने लगी | वह विदेश का सारा बिज़नस समेटा और सारे कमाए पैसे लेकर वह पानी वाले  जहाज़ में बैठ अपने देश को रवाना हो गया | सफ़र लम्बा था, इसलिए यात्री सब आपस में घुल मिल गए थे |

यात्रा के दुसरे दिन जहाज़ में उपलब्ध कैंटीन में धनी राम चाय पी रहा था | तभी सामने बैठे व्यक्ति से परिचय हुआ | वह व्यक्ति बहुत ज्ञानी था | लेकिन वह दुखी उदास सा बैठा हुआ था |  तो धनि राम ने उससे पूछा – आप तो बहुत ज्ञानी दीखते है, फिर यह उदासी क्यों ?

उसने जबाब दिया – मैं भी तुम्हारी तरह इस देश में ज्ञान बेच कर धन कमाने आया था | लेकिन मेरे ज्ञान को कोई खरीदने को ही तैयार नहीं है | इसलिए अब वापस जा रहा हूँ |

सेठ  ने सोचा कि हमने बहुत सारे धन इस देश से कमाया है तो क्यों ना इस बाबा का मन रखने के किये मैं इनसे दो चार ज्ञान खरीद  लूँ |

सेठ ने ज्ञानी से कहा – मैं खरीदना चाहता हूँ आप का ज्ञान | आप जो कीमत चाहेंगे मैं  दूंगा |

वो उदास ज्ञानी उसकी बात सुन कर खुश हो गया और कहा – ठीक है, मैं प्रत्येक ज्ञान के ५०० सोने के  सिक्के लूँगा |

धनि राम ने सोचा कि यह कीमत तो कुछ ज्यादा ही मांग रहा है | फिर भी वह एक सफल व्यापारी था, वह समझ गया कि इस ज्ञानी में कुछ तो बात होगा |

इसलिए उसका मान  रखने के लिए एक ज्ञान लेने का फैसला किया |

उसने ज्ञानी को ५०० सोने के सिक्के दिए तो उसके बदले में ज्ञानी ने एक ज्ञान की बात बताई – “किसी भी काम करने से पहले जीवन में दो मिनट रुक कर सोच लेना” |

व्यापारी के पास और सोने के सिक्के नहीं थे इसलिए एक ही ज्ञान को खरीद पाया |

तीसरे दिन यात्रा समाप्त हो गयी  और सेठ धनी राम अपने देश पहुँचा |

रात काफी हो चुकी थी | वह अपने आलीशान घर में पहुँचा | बाहर संतरी खड़े थे | उसने संतरी को चुप रहने को कहा, क्योंकि वह अपने बीबी को सरप्राइज देना चाहता था | उसने दबे पांव धीरे से कमरे का दरवाज़ा खोला, तो देख कर वह हैरान रह गया | उसका मन  अपनी बीबी के प्रति नफरत और घृणा से वह भर गया | बीबी पलंग पर आराम से किसी अजनबी के साथ कमरे में सो रही थी |

गुस्से में वह बाहर आया और दीवार पर टंगे अपने तलवार को उतारा  और दोनों का गला काटने का फैसला कर लिया / वह तलवार लेकर फिर दबे पांव अन्दर कमरे में दाखिल हुआ और  जैसे ही तलवार से वार करना चाहा उसी समय उस ज्ञानी से ली हुई ज्ञान की वह बात याद आ गयी |– कोई भी काम करने से पहले दो मिनट खड़े होकर सोच लेना चाहिए |

वह इन्ही ख्यालों में खोया वह अपने कदम पीछे किया | तभी उसकी तलवार एक पानी से भरे घड़े से टकरा गयी और घड़ा  ज़मीन पर गिर पड़ा |  उस आवाज़ से उसकी पत्नी की नींद खुल गयी | आँख खुलते ही उसने सामने अपने पति को देखा | वह जल्दी से पलंग से उतरी और अपने पति को पैर छूते हुए बोली  – आपको देखने के लिए मेरी आँखे तरस गयी थी स्वामी |

फिर पीछे मुड कर जल्दी से पलग पर सो रहे युवक को झकझोरते कर उठाते हुए बोली – अरे बेटा उठो, देख तेरे पिता जी आये है |

और अपने पति की ओर देख कर बोली – यह आपकी बेटी है, लेकिन आप के मान में कमी न आ जाए इसलिए इसे बेटा बना कर पाला है | मैं आप को सरप्राइज देना चाहती थी इसलिए सोलह साल से यह बात आपसे छुपा कर रखी थी |

तभी बेटी के  सिर पर बंधी पगड़ी खुल गयी | और घने बालों वाले एक खुबसूरत लड़की जो उसकी बेटी थी वह उठ कर उसके पैर छू कर प्रणाम किया | तब धनि राम का गुस्सा अचानक शांत हो गया | उसके आँखों से झर झर आँसू गिरने लगे |

पत्नी आश्चर्य से पूछी – क्या मुझसे कोई भूल हुई है स्वामी ?

नहीं प्रिये , मुझसे एक बड़ी भूल होने जा रहा था | अब मुझे समझ में आ रहा है कि ज्ञानी ने उस ज्ञान की कीमत ५०० सोने के सिक्के क्यों रखे थे ?

ज्ञानी का बात सचमुच कीमती है — कुछ भी करने से पहले दो मिनट खड़े होकर सोच लेना चाहिए

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8 replies

  1. very informative story💯💯👌👌🙏🙏🙏

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  2. SO true!
    “All things will be clear and distinct to the man who does not hurry; haste is blind and improvident.” -Roman Author

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  3. अच्छी शिक्षाप्रद कहानी।

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  4. कहानी रोचक, शिक्षाप्रद और ज्ञानवर्धक है।

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