
अजनबी शहर के अजनबी रास्ते, …मेरी तन्हाई पर मुस्कुराते रहे,
मैं बहुत देर तक यूं ही चलता रहा, तुम बहुत देर तक याद आते रहे |
ज़हर मिलता रहा ..ज़हर पीते रहे, ..रोज़ मरते रहे …रोज़ जीते रहे,
ज़िदगी भी हमें आज़माती रही, …और हम भी उसे आज़माते रहे |
- कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितने खुबसूरत है | क्योकि लंगूर और गोरिल्ला भी अपनी ओर लोगो का ध्यान आकर्षित कर लेते है..
- कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका शरीर कितना विशाल और मज़बूत है क्योकि शमशान घाट तक आप अपने को नहीं ले सकते |
- आप कितने लम्बे क्यों न हो जाएँ मगर आने वाले कल को आप नहीं देख सकते |
- कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपकी त्वचा कितनी गोरी और चमकदार है क्योंकि अँधेरे में रौशनी की ज़रुरत पड़ती ही है |
- कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप नहीं हँसेंगे तो सभ्य कहलायेंगे क्योंकि आप पर हंसने के लिए दुनिया खड़ी है |
- कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितने अमीर है और दर्जनों गाड़ियाँ आप के पास है, क्योंकि घर के बाथरूम तक आप को चल के ही जाना पड़ता है |
- हमें अक्सर ऐसा महसूस होता है कि दूसरों का जीवन हम से अच्छा है, लेकिन हम यह भूल जाते है कि हम भी उनके लिए दुसरे ही है |
- जीवन में श्वास और विश्वास की एक सामान ज़रुरत होती है .. श्वास ख़तम तो ज़िन्दगी का अंत और विश्वास ख़तम तो सम्बन्ध का अंत |
- जो शख्स आपसे दूसरों की कमियां बयाँ करता है वो निश्चित आपकी बुराई भी दूसरों से करता होगा ..
- यह सत्य है कि व्यक्ति जीवन भर कुछ न कुछ सीखता रहता है। फिर भी संपूर्ण ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो पाता, |
सीखने के लिए हमारी उम्र भी छोटी पड़ जाती है। आस-पास का वातावरण और महापुरुषों का सानिध्य हमारी प्रेरणा के स्रोत हैं।

- सत्य सदैव इस बात का समर्थन करता है कि आप अपनी इच्छानुसार कुछ भी कर सकते हैं। धैर्य व संयम के सहारे विपरीत परिस्थिति में भी सफलता का वरण संभव है ।
- यह सत्य है कि हमारे पास जो कुछ है वह ईश्वर का दिया है। जिसे ईश्वर ने हमें सत्कर्म करते हुए साधन के रूप में दिया है।
जब तक हम ईश्वर के प्रति समर्पित होकर विकृतियों को अपने अंदर से निकाल नहीं देंगे तब तक भटकते रहेंगे, क्योंकि विकृतियां ही दुखों का कारण हैं।
इन्हें छोड़ देने से ही हमें ईश्वर की कृपा प्राप्त होगी। हमें अपने अंदर यह भाव जगाना होगा कि मेरा कुछ नहीं है, जो कुछ है वह ईश्वर का है और यही जीवन की सच्चाई है।
तुलसीदास ने कहा है….,
नाथ सकल संपदा तुम्हारी।
मैं सेवक समेत सुत नारी।’
जब यह भाव जाग्रत हो जाएगा तभी अच्छे गुण व्यक्ति में स्वत: ही आ जाएंगे।
त्याग भावना से हम परमात्मा की ओर चल सकते हैं। दूसरों के दुख में दुखी होना और दूसरों के सुख से सुखी होना सच्ची मानवता है।
- यह भी सच्चाई है कि जीवन को बनाना या बिगाड़ना हमारे हाथ में है। जैसे हमारे विचार होंगे वैसा ही हमारा व्यवहार होगा।

सदैव निराशा और आलस्य से भरे रहने वाले आदमी का जीवन कभी सुखमय नहीं हो सकता । विचार ही हमारी गाड़ी का इंजन हैं। स्वयं हम दीप्तिमान हों और दूसरों को भी प्रकाशित करें।
- सात्विक विचार उत्कृष्ट चरित्र की आधारशिला हैं। जो हमें सन्मार्ग पर चलने को बाध्य करते हैं। हमारे विचार विवेक की पूंजी हैं, और विवेक से अज्ञान का नाश होता है।
जो दूसरों के सुख से सुखी रहता है उसे सुख की कमी रहती ही नहीं ।
- जिस प्रकार जल की बुँदे सागर से मिलकर एक हो जाता है उसी प्रकार जीवन भी ज्ञान प्राप्त कर लेने पर ब्रह्म के साथ एक हो जाता है।
- जीवन की सच्चाई यही है कि अपने श्वासों की अनमोल पूंजी प्रभु के ध्यान में लुटाएं और उस परमपिता के प्रेम में डूबने का प्रयत्न करें….
इसलिए दोस्तों, प्रभु में आस्था रखिये … संभल कर चलिए … ज़िन्दगी का सफ़र छोटा है…. हँसते हँसते काटिए ….आनंद आएगा |
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Categories: आज मैंने पढ़ा
अति सुन्दर❣️
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बहुत बहुत धन्यवाद सर जी |
कृपया मेरा video देखें औरsubscribe करेगे तो हमे खुशी होगी |
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बहुत साधुवाद। ❣️🙏 मैं वीडियो अवश्य देखूंगा।
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बहुत बहुत धन्यवाद, सर जी |
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good
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Thank you so much.
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बिल्कुल सत्य लिखा है, अपनी कोई हस्ती नहीं है
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जी, बहुत बहुत धन्यवाद |
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लेकिन हम तब भी भटकते रहते हैं
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वैसे हम सब बहुत कुछ जानते हुये भी गलती करते रहते है |
हम अपनी आदत से मजबूर रहते है |
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बिल्कुल सत्य
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