#मेरी  विदेश यात्रा ..7

Genting केबल कार में सफ़र करते हुए बहुत मजा आया था | हालाँकि उसमे सफ़र करते हुए मुझे वह घटना को याद कर काफी डर लग रहा था जो एक माह पूर्व ही घटी थी |

जी  हाँ, गाइड ने बताया था कि उस दुर्घटना में ८० लोग बीच में ही केबल चार में घंटे झूलते रहे थे  | घंटो मसक्कत करने के बाद किसी तरह केबल के फाल्ट को ठीक किया गया था |  उसके बाद ही उन केबल कार में सवार लोगों को किसी तरह सुरक्षित निकाला गया था |

मैं भी मन ही मन भगवान् को याद कर रहा था, और हमलोगों ने सुरक्षित केबल कार के  रोमांच का आनंद लिए |

मुरुगन के दर्शन

दिन के 2.00 बज चुके थे और हमलोग को भूख सताने लगी थी |  आज मौसम में कुछ गर्मी ज्यादा थी , इसलिए हमलोगों ने  वही पर एक रेस्टोरेंट में भूख मिटाने की सोची | यहाँ भी रेस्तरां में इंडियन भोजन मिल रहा था , लेकिन हमलोगों ने  यहाँ की  खास पेस्ट्री और आइसक्रीम का मजा लिया |

इसके बाद हमलोग का अगला ठिकाना  बातू गुफाएँ ( Batu Cave )  था | हमलोग गाड़ी में बैठे और गंतव्य स्थान के ओर चल दिए | हालाँकि  मैं मन ही मन सोच रहा था कि अगर बातू केव  सुबह ज़ल्दी जाते हो  शायद इसका नज़ारा और भी खुबसूरत होता,  ख़ास कर गर्मी से थोड़ी राहत भी मिलती |

लेकिन काफी व्यस्त कार्यक्रम होने के कारण यह संभव नहीं था |  हमलोग रास्ते भर खुबसूरत नज़ारा का मज़ा लेते हुए करीब 13 किलोमीटर की दुरी तय कर बातू गुफा पहुँच गए |  हालांकि शाम होने वाली थी, फिर भी इस  वक़्त भी काफी भीड़ थी | हमलोग अपनी गाडी से उतर कर एक बार नज़र दौड़ाया | वाह, सचमुच  बहुत शानदार नज़ारा था |

गाइड ने बताया कि बातू गुफाएँ मलेशिया के गोम्बैक जिले में स्थित है | यहाँ सामने बहुत बड़ा पहाड़ दिख रहा था | उन्होंने  बताया कि यह  एक चुना पत्थर की पहाड़ी है और काफी दूर तक फैला हुआ है | इसमें ही गुफाओं व गुफा मंदिरों की शृंखलाएँ हैं।

सचमुच, बहुत बड़ी प्रतिमा उस पहाड़ के पास दिख रही थी और सामने सीढियों की चढाई थी |

 पहाड़ के पिछले हिस्से में एक नदी बहती है जिसे बातू नदी कहते है | लोग कहते है कि इसी बातू नदी के नाम पर बातू गुफाएँ का नामकरण हुआ था | यहाँ की गुफा में जो प्रतिमा है वह शिव – पार्वती  के ज्येष्ठ पुत्र कार्तिकेय की  है | इन्हें तमिल के लोग भगवान्  मुरुगन भी कहते है |   यह इंडियन, खास कर तमिल लोगों का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है |

ऐसा लग रहा था कि हम किसी साउथ इंडिया के मंदिर में भ्रमण कर रहे है | बिलकुल वैसा ही माहौल था | मंदिर काफी उचाई पर स्थित था | कुल 272 सीढियों की चढाई कर हमलोग मंदिर तक पहुँच पाए थे | इसके गुफा के अन्दर बहुत सारे हिन्दू मंदिर थे |

बातू गुफाएँ

 इस पहाड़ के ऊपर से प्राकृतिक नज़ारा  गज़ब का था |  दुसरे  मंदिरों की तरह यहाँ भी मंदिर के आस पास  बहुत सारे बन्दर थे जिससे अपने सामान को सुरक्षित रखने की हिदायत दी गयी थी |  इतनी ऊचाईयों से देखने पर यहाँ का नज़ारा  गज़ब का खुबसूरत दिख रहा था |

एक तरफ पहाड़ था तो दूसरी तरह उससे बहते हुए झरने  थे जो बड़ा ही मनोरम दृश्य प्रस्तुत कर रहा था | डूबते सूरज में इस जगह की अद्भुत  प्राकृतिक छटा  बिखर रही थी |

गुफा और मंदिर देखने के बाद हमलोग नीचे आ रहे थे | गाइड बार बार हिदायत दे रहा था कि धीरे धीरे सीढियों से उतरे  वर्ना पैर फिसल गया तो अपना शरीर भी वापस नहीं मिल पायेगा |

खैर, हम सभी सुरक्षित नीचे आ गए | यहाँ नीचे में एक बहुत बड़ा प्लेटफार्म बना हुआ था जहाँ लोग कबूतरों को अपने  हाथो से दाना  खिला रहे थे | मुझे यह देख कर बहुत अच्छ लगा कि हजारो कबूतर वहाँ  मौजूद थे | मैंने भी यहाँ दाना खरीद कर अपने हाथों से उन कबूतरों को खिलाया | लोग कहते है कि वहाँ  पक्षी को  दाना खिलाने से भगवान् मुरुगन का आशीर्वाद प्राप्त होता है |

यहाँ के खुबसूरत  नज़ारे को एन्जॉय करने में करीब दो घंटे बीत गए  | हालांकि ऐसी खुबसूरत जगह से वापस जाने का मन नहीं कर रहा था | लेकिन आज ही के एल टावर भी देखना था, क्योंकि सुना था कि रात के समय रौशनी के कारण उस टावर की खूबसूरती और भी बढ़ जाती है |  खैर , बातू गुफाएँ की सैर करने के बाद, दिल ने कहा —पैसा वसूल |

  • हमलोग अपनी गाडी में बैठ अगला ठिकाना की ओर रवाना हो गए | चूँकि 13 किलोमीटर की लम्बी यात्रा थी, इसलिए  हमलोग मलेशिया के खुबसूरत जगहों के बारे में चर्चा कर रहे थे | तभी  हमारे साथ चल रहे गाइड ने मलेशिया से सम्बंधित  कुछ  रोचक जानकारियाँ दी, जिसे मैं शेयर करना चाहता हूँ |
  • कुआलालंपुर का कुआला लंपुर टॉवर (K L Tower) दुनिया का सातवां सबसे ऊंचा भवन है। इसकी उंचाई 421 मीटर है । यहाँ का नजारा बेहद बहुत खुबसूरत  है  | टावर के ऊपर से रात का नज़ारा देखते ही बनता है | | twin टावर बहुत पास में ही नज़र आता है | शाम का नज़ारा काफी गजब का होता है |
  • चूँकि  यहाँ जंगल बहुत है तो यहाँ अन्य जानवरों के अलावा सांप की विभिन्न प्रजातियाँ यहाँ पायी जाती है | दुनिया का सबसे लंबा किंग कोबरा सांप मलेशिया में ही पकड़ा गया था। तब उसकी लंबाई 5.54 मीटर थी। इसे बाद में लंदन ले जाया गया, जहां इसकी लंबाई बढ़कर 5.71 मीटर हो गई थी।
  • मलेशिया का पिनांग पुल एशिया का तीसरा सबसे लंबा पुल है। इसकी लंबाई 13.7 किमी है।
  • मलेशिया का सिपादान द्वीप दुनिया का सबसे शानदार डाईविंग स्पॉट है।
  • मलेशिया में 14 हजार 500 किस्मों के पेड़, पौधे और फूलों की प्रजातियां मिलती हैं। वहीं 200 प्रकार के स्तनपाई, 140 प्रकार के सांप, 600 प्रकार की चिड़ियां, जबकि छिपकलियों की 60 प्रजातियां भी मिलती हैं।
  • मलेशिया में हर साल महज 15 फिल्में ही बनती हैं। वहीं, 300 से 400 टीवी सीरियल बनते हैं। पूरे देश में महज 250 फिल्म थिएटर ही हैं।
  • मलेशिया के बेलम जंगल में सबसे ज्यादा बाघ हैं। यहां प्रति किमी में बाघों की संख्या सर्वाधिक है।
  • दुनिया का सबसे बड़ा गोल आकृति हाईवे मलेशिया में ही मौजूद है जो कि 22 किलोमीटर लंबा है |

के एल टावर

इन सब बातों की चर्चा करते हुए हमलोग  अंततः के एल टावर  पहुँच गए | इतनी विशेषता को सुन कर इसे देखने की बहुत उत्सुकता थी |

यह दुनिया का सातवां   ऊँचा communication टावर है | इसकी ऊंचाई है ४२१ मीटर है |  यहाँ स्काई डेक , स्काई बॉक्स   और observation डेक की सुविधा है |

स्काई डेक  से पूरा कुअलामपुर का गजब का view था , खास कर रात का नज़ारा देखते ही बनता था | पूरा शहर रात की रौशनी में जगमगाता हुआ दिख रहा था , जैसे हम हवाई जहाज़ से देखते है |

स्काई बॉक्स, पूरा ग्लास का बना हुआ है,  जिससे चारो तरफ का दृश्य बहुत मनोरम दिख रहा था | यहाँ से ट्विन टावर तो बिलकुल अच्छी तरह दिख रहा था, खास कर रात की रौशनी में गजब का नज़ारा था |

इसके अलावा ऑब्जरवेशन डेक भी था जहाँ बहुत सारे souvenir  shop थे | साथ ही साथ , सुन्दर नज़ारा को देखते हुए कुछ snacks और refreshment की भी सुविधा थी |  यहाँ आकर जैसे जन्नत का मज़ा आया और दिल ने फिर कहा – जन्नत में पैसा वसूल |

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Categories: Tour & Travel

5 replies

  1. मलेशिया के बारे में रोचक जानकारी मिली। पढ़ कर अच्छा लगा।

    Liked by 1 person

  2. Good information about Malayasia .Presented nicely by you.

    Liked by 1 person

  3. Reblogged this on Retiredकलम and commented:

    Mistakes, Failures, Insult, Frustration and Rejections are
    part of progress and growth of our life. Nobody ever achieved
    worthwhile without facing these five things.

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