अपनों का साथ बहुत बहुत आवश्यक है,
सुख ही तो बढ़ जाता है और दुःख हो तो घाट जाता है ..

कंपनी की गाडी एयरपोर्ट जाने को तैयार खड़ी थी और सभी लोग अपनी नयी नौकरी पाकर खुश थे और गाड़ी में बैठे गप्पे मारते एयरपोर्ट पहुँचने का इंतज़ार कर रहे थे |
थोड़े ही देर में गाड़ी अपनी तेज़ गति से सड़क पर दौड़ रही थी और उस गाड़ी में बैठा संदीप के दिल की धड़कन किसी अंजान डर से बढ़ रही थी |
संदीप प्लेन से पहली बार सफ़र कर रहा था और जब प्लेन दूर आकाश में जायेगा तो डर लगेगा ही |
फिर उसे घर की याद आने लगी और वह सोचने लगा कि घर से और खास कर राधिका से दूर इतने दिनों तक कैसे रह पाउँगा |
संदीप अपनी आँखे बंद कर अपने ख्यालो में खोया था तभी उसके दोस्त ने उसे झकझोरते हुए उठाया और कहा …कहाँ खो गए दोस्त, अभी तो मंजिल दूर है |
ठीक कहते हो प्यारे, मेरी तो मंजिल सचमुच…
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