हम चाहें तो अपने आत्मविश्वास और मेहनत के बल पर
अपना भाग्य खुद लिख सकते है ..और अगर हमको अपना
भाग्य लिखना नहीं आता तो परिस्थितियां हमारा भाग्य लिख देगीं |

एक दिन जब श्री कृष्ण स्वर्ग में विचरण कर रहे थे तो अचानक राधा सामने मिल गई | उसे देख कर विचलित सी कृष्णा और प्रसन्नचित सी राधा .., कृष्णा सकपकाए पर राधा मुस्कुराई |
इससे पहले कि कृष्णा कुछ कह पाते, राधा बोल उठी… कैसे हो द्वारिकाधीश ?
जो पहले राधा उन्हें कान्हा कान्हा कह कर बुलाती थी , उसके मुख से द्वारिकाधीश का संबोधन, कृष्णा को भीतर तक घायल कर गया |
फिर भी किसी तरह अपने आप को संभाल लिया उन्होंने और बोले… राधा, मैं तुम्हारे लिए आज भी वही कान्हा हूँ, तुम तो मुझे द्वारिकाधीश मत कहो |
आओ बैठते है …कुछ मैं अपनी कहता हूँ कुछ तुम अपनी सुनाओ |
सच कहूँ राधा , जब जब भी तुम्हारी याद आती थी इस आँखों से आँसुओं की बुँदे निकल आती थी |
राधा बोली …मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ | ना तुम्हारी याद आई…
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प्रेम व समर्पण का सुंदर संदेश देती खूबसूरत कहानी 👏👏
बेहतरीन कविता 👌🏼👌🏼😊🙏🏼
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बहुर बहुत धन्यवाद ..
मुझे ख़ुशी हुई ..आप ने इसे पसंद किया ..|
आप स्वस्थ रहे …खुश रहें…
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😊🙏🏼
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