थाम के रख उम्मीद का दामन ,
तो हर वक़्त तेरा है …
जहाँ मन में हार नहीं ,, वहीँ नया सवेरा है …

दो दिनों की यात्रा कर अंजना वापस अपने शहर लौट चुकी थी | आज सुबह – सुबह जब अपने ऑफिस पहुँची तो उसे आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा, जब उसने देखा कि निर्मला पहले से ही यहाँ मौजूद है और उसका इंतज़ार कर रही है |
अंजना उसे अपने साथ चैम्बर में ले गई और कहा…तुम बेकार में चिंता कर रही हो निर्मला | मैं जब तक हूँ तुम्हे किसी बात की चिंता करने की ज़रुरत नहीं है |
और अंजना ने उसी के सामने विजय को फ़ोन लगा दिया |
अंजना का नम्बर देखते ही विजय फ़ोन उठाया और कहा …तुम कैसी हो अंजना ?
मैं ठीक हूँ विजय …अंजना ने संक्षिप्त सा उत्तर दिया |
तुम्हारी और मेरी कहानी दुनिया वालों को भी पता चल गया अंजना | समाचार पत्र ने तुम्हारी चाची की गन्दी हरकत का पर्दाफाश कर दिया है | मुझे तो पुरे परिवार से ही…
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