
मैं कौन हूँ? शायद एक अधूरी कहानी…
कभी-कभी लोग पूछ लेते हैं—”विजय जी, आप आखिर हैं कौन?”
यह प्रश्न सुनने में जितना सरल लगता है, उसका उत्तर उतना ही कठिन होता है। क्योंकि इंसान केवल नाम, पेशा या रिश्तों का जोड़ नहीं होता; वह अपने अनुभवों, संघर्षों, आदतों, कमजोरियों, सपनों और प्रेम का जीवंत संग्रह होता है।
मैं विजय वर्मा हूँ।
दो बच्चों का पिता, एक पत्नी का पति और आपमें से अधिकांश का मित्र। किसी का दुश्मन भी हो सकता हूँ, लेकिन सच कहूँ तो मुझे आज तक पता नहीं चला कि किसका।
मैं बिहार की मिट्टी से निकला हूँ। थोड़ी-सी जिद मेरे स्वभाव में है। कोई बात, कोई विचार या कोई चीज़ यदि दिल को छू जाए, तो फिर उसे पाने या निभाने के लिए पूरी ईमानदारी से जुट जाता हूँ।
“Be yourself; everyone else is already taken.”
— Oscar Wilde

मैंने कृषि की पढ़ाई की, लेकिन पूरी ज़िंदगी बैंकिंग में बिताई। जीवन ने शायद यही सिखाया कि डिग्री रास्ता दिखाती है, लेकिन मंज़िल अक्सर अनुभव तय करते हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद बहुत लोग सोचते हैं कि अब जीवन की गति धीमी हो जाएगी। पर मेरे लिए यह एक नया जन्म था।
वर्षों से मन के किसी कोने में दबे हुए शौक—लेखन, चित्रकारी, संस्मरण, कविता—एक-एक करके फिर साँस लेने लगे।
तब समझ आया—
“Retirement is not the end of the road. It is the beginning of the open highway.”
मैं स्पष्टवादी हूँ। जो कहना होता है, सामने कह देता हूँ। इसी वजह से कुछ लोग मुझे सनकी भी समझते हैं। लेकिन पीठ पीछे किसी की बुराई करना न कभी सीखा, न पसंद आया।
हाँ, मैं भावुक भी हूँ।
लोगों द्वारा कहे गए मामूली झूठ, अनजाने में दिए गए ताने और टूटते हुए विश्वास मुझे भीतर तक चोट पहुँचा देते हैं। शायद इसी कारण मैं अपने काम, अपने शब्दों और अपने छोटे-से संसार में सुकून तलाशता हूँ।
मैं जुनूनी भी हूँ।
जब किसी काम से प्रेम करता हूँ तो पूरी शिद्दत से करता हूँ। आधे मन से जीना कभी सीखा ही नहीं।
“Whatever you do, do it with all your heart.”
— Confucius
मुझे नए मित्र बनाना अच्छा लगता है। नई जगहों पर घूमना अच्छा लगता है। यात्राएँ मुझे सिखाती हैं कि दुनिया केवल हमारी सोच जितनी छोटी नहीं है। हर शहर की अपनी कहानी है और हर इंसान अपने भीतर एक उपन्यास समेटे बैठा है।
टेबल टेनिस की तेज़ रफ्तार, पानी में तैरने की स्वतंत्रता और बागवानी की शांति—ये सब मेरे व्यक्तित्व के अलग-अलग रंग हैं। मिट्टी में बीज बोते हुए मुझे हमेशा लगता है कि इंसान को भी अपने भीतर उम्मीद के पौधे लगाते रहना चाहिए।
लेकिन यदि कोई मुझसे पूछे कि मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है, तो शायद मैं कोई पद, पुरस्कार या सम्मान का नाम नहीं लूँगा।
- मैं उन लोगों का नाम लूँगा जिन्होंने मेरे शब्दों में अपना अक्स देखा।
- उन मित्रों का, जिन्होंने कहा कि मेरी रचनाएँ उन्हें मुस्कुराने का कारण देती हैं।
- उन पाठकों का, जिन्होंने लिखा कि मेरे ब्लॉग उनके उदास दिनों की भीनी-भीनी खुशबू बन जाते हैं।
- उन साथियों का, जिन्होंने माना कि उम्र केवल एक संख्या है और जीवन को नए सिरे से जीना कभी देर नहीं होती।
सच तो यह है कि लेखक अपने पाठकों से बनता है।
उनकी प्रतिक्रियाएँ केवल प्रशंसा नहीं होतीं; वे आईना भी होती हैं। वे हमारी कमियाँ दिखाती हैं, हमें बेहतर बनने के लिए प्रेरित करती हैं और यह भरोसा देती हैं कि हमारे शब्द किसी के दिल तक पहुँच रहे हैं।
दोस्तों, मैं एक खुली किताब हूँ और हमारे बारे में लोग क्या कहते है उसे भी आप सबों से शेयर करना चाहता हूँ | जी हाँ, इस ब्लॉग में हमारे कुछ मित्रों ने मेरे बारे में लिखा है जिसे यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ …..

B K VERMA
” ये तो हमारे और दोस्तों के लिए संजीवनी का काम कर रही है |
रोज इतना अच्छा ब्लॉग पढ़कर दिन की अच्छी शुरुआत होती है | जब भी मन उदास होया है, आपके ब्लॉग की भींगी भींगी खुशबू मेरे दिलों दिमाग को ताज़ा कर देती है और फिर से रिफ्रेश हो जाता हूँ | बहुत ही काम लोग खुशनसीब होते हैं, जिन्हें सच्चा निःस्वार्थ प्रेम की अनुभूति होती है | ये तो प्रेम ही है जिसपर सारा संसार टिका हुआ है |
अगर आपस में प्रेम न हो तो जीवन नीरस हो जाता है | इसी प्रेम की डोर से परिवार, समाज, देश जुड़ा हुआ है|
रियली अच्छा लग रहा है. धीरे धीरे चलते रहो…. “

Sanjeev Lal
You are making a very productive use of your retired life and doing all creative things, be it writing serial stories, memoirs, motivational blogs, poetry, sketching and drawing.
May you continue to progress in your creative pursuits and attract more readers to your blog posts.
Best wishes.

Kishori Raman
Banker (Canara Bank)
” कहते हैं कि जब लेखन केवल अपने लिए हो या फिर केवल लिखने के लिए हो तो वह सार्थक नहीं होता | सार्थक तब होता है जब यह पढ़ने वाले को अपने से जोड़ सके, उन्हें मज़ा दे सके |
विजय जब लिखता है तो उसका उद्देश्य होता है अपने भोगे हुए यथार्थ को, जीवन की कड़वी सच्चाइयों को सरल एवं सपाट भाषा में पन्नों पर उतारना |यह अच्छे भी लगते हैं और गुदगुदाते भी हैं | नाटकियता इसकी जान होती हैं , जो आगे की घटनाओं को जानने की जिज्ञासा को अंत तक बरक़रार रखती हे | हर पढ़ने वाले को ये उसकी अपनी कहानी लगती है, और यही इसकी विशेषता भी है |
हालाँकि, संस्मरण लेखन में लेखक के पास लीक से ज्यादा हटने की गुंजाईश नहीं होती है क्योंकि तब निरसता उत्पन्न होने का खतरा रहता है | विजय की रचनायें इनसे बच कर निकलती हैं और तेज़ रफ़्तार से चलती हैं |
विजय की रचनायें इन कसौटियों पर खरी उतरती हैं | मेरी शुभ कामनाएँ |आप इसी तरह लिखते रहे और सबको गुदगुदाते रहे |”

कृष्णा कुमार
“वाह विजय ,क्या खुब लिखते हो | पढने में बड़ा मज़ा आता है |
सरल भाषा ,सुंदर विषय वस्तु और नाटकीय घटनाक्रम रचना
को पठनीय बनाते है | जब हम पढना शुरू करते है तो बिना अंत के
उसे छोड़ नहीं पाते है और एक उत्सुकता अंत तक बनी रहती है
आगे की घटना को जानने के लिए | रचनाएँ आम जीवन के काफी
करीब महसूस होती है | उत्सुकता और इंतज़ार यही तो मज़ा है ज़िन्दगी में ,
जो रचनाएँ सहज ही उपलब्ध कराती है ….
आगे भी इसी तरह प्रयास ज़ारी रहे |
शुभकामनाओ सहित “

Sumit Sinha
“While many may find it difficult, you have embraced this for long.
It is a pleasure to go through the thoughts;
the myriad experience flows through…”

Vijay Kumar Jha
(1) You are a genius; I have no any doubt at all. Your Sankalp Sakti is beyond par. What you think you always want and try to achieve the goal .You are also an allrounder, sir .
You are a story writer, Poet , essay writer , health and wellness advisor and now your painting artistic has been revealed by you .
Your artistic paintings are very beautiful and having imagination of minute description. I salute you for your conviction and presenting a way to us to how to live life after retirement. Bravo.
(2) बहुत ही सुन्दर आलेख । जीओ और जीने दो के लिए जरुरी है हँसो और हँसाओ । बधाई ।
Shailesh Patel
DECEMBER 23, 2021
आपको धन्यवाद ब्लॉग सालगिराह पर, आपके विचार, आपके अनुभवों का निचोड हमें लगातार मीलते रहते है जो हमारे लिए बहुत प्रेरणादायक है। आप ईसी तरह लीखतें रहे और हम उसका आनंद लेते रहे यही अभिलाषा सह एक बार फिर से आपका धन्यवाद। .. Shail

Sanjeev Lal
July 29, 2021
I must complement you for being so committed in writing blogs on daily basis without fail. Your blogs are informative and interesting and spreading positivity. More power to you for writing daily blogs.

Md. Kamran
JULY 20, 2020
I liked your blog and read it to the last. I don’t find words to Express my joy and happiness,
but the way u have reinvented yourself is amazing. You are really an inspiration for every retired person. I too wonder why we the retirees think that our time is over.
Age is just a number. What others can do we too can. At last, I am to request u to please guide me to reinvent me as u have done.
With warm Regards
दोस्तों द्वारा मेरे व्यक्तित्व और ब्लॉग के बारे में किया गया कमेंट, मुझे और अच्छा लिखने के लिए प्रेरित करते है | आपके कमेंट हमें अपनी कमियों को सुधारने का मौका भी देते है …
तो आप अपने कमेंट से कब अवगत करा रहे है … आपके कमेंट का मुझे इंतज़ार रहेगा |
“There is no greater joy for a writer than discovering that his words have found a home in someone else’s heart.”
मैं कोई महान व्यक्ति नहीं हूँ।
मैं गलतियाँ करता हूँ।
कभी ज़िद्दी हो जाता हूँ।
कभी जल्दी आहत हो जाता हूँ।
कभी अपने ही विचारों में खो जाता हूँ।
लेकिन मैं सच्चा रहने की कोशिश करता हूँ।
और शायद यही मेरी पहचान है।
आख़िर में, मैं स्वयं को एक खुली किताब मानता हूँ। जिसके कुछ पन्नों पर संघर्ष लिखा है, कुछ पर प्रेम, कुछ पर हँसी, कुछ पर आँसू और कुछ पन्ने अभी भी खाली हैं।
शायद जीवन का सौंदर्य भी इसी में है कि कहानी अभी समाप्त नहीं हुई है।
कल फिर कोई नया अनुभव होगा।
कोई नई यात्रा होगी।
कोई नया मित्र मिलेगा।
और शायद कोई नया ब्लॉग भी जन्म लेगा।
क्योंकि—
“Life isn’t about finding yourself. Life is about creating yourself.”
— George Bernard Shaw
यदि मेरे शब्द किसी एक व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान ला सकें, किसी थके हुए मन में आशा जगा सकें, या किसी सेवानिवृत्त व्यक्ति को यह विश्वास दिला सकें कि अभी बहुत कुछ बाकी है—तो समझूँगा कि मेरा लिखना सार्थक हुआ।
मैं विजय वर्मा हूँ।
एक साधारण इंसान।
लेकिन अपनी अधूरी कहानी को पूरे मन से जीने की कोशिश करता हुआ।

BE HAPPY… BE ACTIVE… BE FOCUSED… BE ALIVE
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Categories: infotainment
वर्मा जी, यह केवल आत्मपरिचय नहीं, बल्कि जीवन को पूरे मन से जीने वाले एक संवेदनशील इंसान की सुंदर झलक है। पढ़कर मन छू गया। आपकी सादगी, आत्मीयता और सकारात्मक दृष्टि ही आपकी सबसे बड़ी पहचान है। 🌷
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आपके इतने स्नेहपूर्ण शब्दों के लिए हृदय से धन्यवाद। 🙏🌷
सच कहूँ तो मैंने अपने बारे में जो कुछ लिखा, वह किसी आत्मप्रशंसा के लिए नहीं था, बल्कि जीवन के उन छोटे-बड़े अनुभवों को साझा करने का एक विनम्र प्रयास था जिन्होंने मुझे गढ़ा है। यदि उनमें आपको सादगी, आत्मीयता और सकारात्मकता की झलक दिखाई दी, तो यह मेरे लिए किसी बड़े सम्मान से कम नहीं है।
हम सब अपने-अपने संघर्षों, खुशियों और संवेदनाओं के साथ जीवन की यात्रा तय कर रहे हैं। यदि मेरे शब्द किसी के मन को छू सकें, मुस्कान दे सकें या कुछ पल ठहरकर स्वयं से मिलने का अवसर दे सकें, तो मुझे लगता है कि मेरा लिखना सार्थक है।
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We all need to reflect to see who we really are from time to time. While it is nice to get the accolades from others, we have to like ourselves first, when we look deeper. This self evaluation needs to include accomplishments, failures and shortcomings, so there is always room to grow, always something to work on. I have always liked Oscar Wilde’s words and nobody followed them better than Oscar…Be yourself, everyone else is already taken. We spend so many hours trying to be the people that others want us to be, we often lose our sense of self. Keep being yourself Verma ji. Happy Monday. Allan
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Thank you so much, Allan, for this thoughtful reflection.
You are absolutely right—true self-evaluation requires honesty. It is easy to celebrate our accomplishments and enjoy the appreciation of others, but real growth begins when we also acknowledge our failures, limitations, and the areas where we still have work to do. The mirror does not merely show us who we are; it gently reminds us of who we can still become.
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आप लेखक हैं जिसमे ज्ञान अनुभव संवेदना सब का समावेश है शुभ रात्रि सर जी 🙏🏻
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आपके स्नेहपूर्ण शब्दों के लिए हृदय से धन्यवाद। 🙏🏻
सच कहूँ तो मैं स्वयं को ज्ञानवान लेखक नहीं, बल्कि जीवन का एक साधारण विद्यार्थी मानता हूँ। जो कुछ देखा, जिया, समझा और महसूस किया, वही शब्दों का रूप लेकर कागज़ पर उतर आता है। यदि उनमें आपको ज्ञान, अनुभव और संवेदना का समावेश दिखाई देता है, तो यह मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है।
हम सब अपने-अपने अनुभवों से सीखते हुए आगे बढ़ रहे हैं। मेरी लेखनी भी उसी सीखने की यात्रा का एक छोटा-सा प्रयास है। पाठकों का स्नेह और मित्रों का प्रोत्साहन ही इसे सार्थक बनाता है।
आपका यह अपनापन और आशीर्वाद यूँ ही मिलता रहे, यही कामना है।
शुभ रात्रि सर जी। ईश्वर आपको स्वस्थ, प्रसन्न और शांतिमय जीवन प्रदान करें। 🌷🙏🏻✨
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वर्मा जी🙏
आपका परिचय पढ़कर लगा कि यह किसी आदमी का परिचय कम और एक पूरे युग का हिसाब-किताब ज्यादा है।
आजकल लोग अपना परिचय देते हैं तो पहले पद बताते हैं, फिर उपलब्धियाँ गिनाते हैं, फिर इतने विशेषण जोड़ देते हैं कि अंत तक पहुँचते-पहुँचते आदमी कहीं खो जाता है। आपने कम-से-कम यह ईमानदारी तो दिखाई कि अपनी कमजोरियों को भी परिचय-पत्र में जगह दी।
मुझे सबसे ज्यादा आश्चर्य इस बात पर हुआ कि आपने सेवानिवृत्ति को जीवन का विराम चिह्न नहीं माना। हमारे यहाँ तो बहुत-से लोग नौकरी से रिटायर होते ही जीवन से भी रिटायर हो जाते हैं। सुबह अखबार, दोपहर शिकायत और शाम पुरानी यादों के सहारे काट देते हैं। आपने उल्टा कर दिया नौकरी छोड़ी और जीवन शुरू कर दिया।
आपके मित्रों की टिप्पणियाँ पढ़कर यह भी लगा कि आपने बैंक में केवल खाते नहीं संभाले, कुछ दिलों में भी जमा-पूँजी छोड़ आए हैं। यह उपलब्धि किसी पदक या प्रशस्ति-पत्र से बड़ी है।
हाँ, एक बात से सावधान रहिए। लोग जब किसी लेखक की बहुत प्रशंसा करने लगते हैं, तब लेखक के भीतर एक छोटा-सा अहंकार जन्म लेने लगता है। वह बड़ा खतरनाक जीव होता है। वह धीरे-धीरे लेखक को पाठकों से नहीं, आईने से प्रेम करना सिखा देता है। अभी तक तो आप बचते दिखाई दे रहे हैं, आगे भी बचते रहिए।
और जहाँ तक आपकी अधूरी कहानी का प्रश्न है भाई, पूरी कहानी तो केवल समाधि-लेख में मिलती है। जीवित आदमी हमेशा अधूरी कहानी ही होता है। अच्छा लेखक वही है जो आखिरी पन्ने तक जिज्ञासा बनाए रखे।
लिखते रहिए, मुस्कुराते रहिए और लोगों को यह याद दिलाते रहिए कि उम्र बढ़ने और बूढ़ा होने में बहुत अंतर होता है।
मनुष्य की सच्ची पहचान उसके पद या परिचय में नहीं, उसके व्यवहार और संवेदनाओं में होती है। आपके शब्दों में जीवन की धूप-छाँव है, संघर्ष की धूल है और अनुभव की वह गरमाहट है जो पाठक को अपना बना लेती है। जिस व्यक्ति ने सेवा-निवृत्ति के बाद भी जीवन को नए उत्साह से अपनाया हो, वह वास्तव में वृद्ध नहीं, अनुभवी युवक है। आपकी सबसे बड़ी पूँजी आपकी रचनाएँ नहीं, वे हृदय हैं जिनमें आपने अपने लिए स्थान बनाया है। ईश्वर करे आपकी यह अधूरी कहानी अभी बहुत दूर तक चले और अनेक जीवनों को स्पर्श करती रहे।🌹🙏
विजय श्रीवास्तव
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आपके स्नेहपूर्ण शब्दों के लिए हृदय से धन्यवाद। 🙏🏻
सच कहूँ तो मैं स्वयं को ज्ञानवान लेखक नहीं, बल्कि जीवन का एक साधारण विद्यार्थी मानता हूँ। जो कुछ देखा, जिया, समझा और महसूस किया, वही शब्दों का रूप लेकर कागज़ पर उतर आता है। यदि उनमें आपको ज्ञान, अनुभव और संवेदना का समावेश दिखाई देता है, तो यह मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है।
हम सब अपने-अपने अनुभवों से सीखते हुए आगे बढ़ रहे हैं। मेरी लेखनी भी उसी सीखने की यात्रा का एक छोटा-सा प्रयास है। पाठकों का स्नेह और मित्रों का प्रोत्साहन ही इसे सार्थक बनाता है।
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Beautiful and so wholesome, this post by Verma. I am so grateful that I stumbled across this blog and that we’ve not only shared our passions for writing but also genuine community and support on each other’s blogs. It is always a joy to tune in and hear your thoughts about life. You grant all of us a joyful and thought-provoking perspective of the simplicity of life’s many chapters. I love this line right here: “Every city has its own story, and every person holds a novel within them.” I love your worldview, Verma!
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Thank you from the bottom of my heart for such a generous and touching comment. 😊🙏
Your words truly mean a lot to me. One of the greatest blessings of blogging has been discovering kindred spirits like you. What began as a shared love for writing has grown into something far more meaningful—a genuine friendship built on encouragement, thoughtful conversations, and mutual support.
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