
यह कविता दिल के गहरे जज़्बातों को व्यक्त करती है, जहाँ प्रेम की गहराई और प्रियतम की यादें हर पल जीवन में शामिल हैं।
इसका हर शब्द मे हर अनुभूति, हर क्षण, प्रिय की उपस्थिति का एहसास दिलाती है, मानो उनका साया हर ओर छाया हो।
“प्यार की गहराई
रात की चुप्पियाँ हैं, चारों तरफ अंधेरा है,
दिल की आँखों से देखा, तेरा ही पहरा है।
चमकते तारों में तेरा चेहरा नजर आता है,
समंदर की गहराइयों से भी तेरा प्यार गहरा है।
तू दूर थी, फिर भी पास सा एहसास था,
तुम्हारे हर ख़्वाब में मैं तुम्हारे पास था।
दिल बेचैन था बस एक झलक पाने को,
तेरे गीत, तेरे नगमे मेरे लिए खास था ।
मुझे हर पल याद आती हैं तेरी बातें,
वो धूप की तपिश और वो चाँदनी रातें।
तू तो बस गई है मेरी रूह में,
तुझसे ज़िंदा हैं मेरी धड़कन, मेरी साँसें।
अब हर पल मैं तुझे याद करता हूँ,
कभी अपनी मोहब्बत से फरियाद करता हूँ।
तुझसे ही तो हर जगह नूर छाया है,
जिधर भी देखूँ, बस तेरा ही साया है।
(विजय वर्मा)

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अतिसुन्दर रचना सर जी 🙏🏻 सुप्रभात
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बहुत-बहुत धन्यवाद! 🙏🏻
आपके इस स्नेह और प्रोत्साहन ने मेरा दिन और भी सुंदर बना दिया। ऐसी ही सकारात्मकता बनाए रखें। सुप्रभात! 😊
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very nice
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Thank you so much.
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तू दूर थी, फिर भी पास सा एहसास था,
तुम्हारे हर ख़्वाब में मैं तुम्हारे पास था।
पूरी कविता यूँ तो प्रेम का आभास था
पर इन दो पंक्तियों में कुछ ख़ास था
बहुत ख़ूबसूरत रचना 🌸🌸
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आपके इन मधुर शब्दों ने मेरे दिल को छू लिया। ❤️
सच में, इन पंक्तियों में भावनाओं का सार छिपा है—वो एहसास, जो दूरी के बावजूद दिलों को करीब लाता है।
आपका सराहना भरा संदेश मेरे लिए प्रेरणा है।
बहुत-बहुत धन्यवाद इस खूबसूरत प्रतिक्रिया के लिए! 🌸🙏
आपके साथ और भी ऐसी रचनाएँ साझा करता रहूँगा। 😊
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