# खुदगर्ज इंसान #

आप किसी से प्रेम करते है और आप उसे  प्रपोज करने की सोच रहे है , तभी आपको महसूस होता है कि वह आपके लिए ऐसी ही फीलिंग्स नहीं रखता है |  जब आपको पॉजिटिव  रिस्पॉन्स नहीं मिलता है, तो प्यार जैसे इमोशन का नफरत में बदलना लाजमी है।

 इसमें आपका उदास होना व उसके इनकार करने की वजह ना समझ पाना जैसी सिचुएशन आ जाती है।

ऐसी स्थिति में मन में तरह-तरह  के विचार उठते रहते है | उन्हीं भावनाओं में विचरण करता यह कविता प्रस्तुत है |

खुदगर्ज  इंसान

कितना खुदगर्ज हो गया है

वो मेरी बात भी नहीं करता

वादे  भूल गया अब सारे

वो मुलाकात भी नहीं करता

नाराज़ हो गया है  मुझसे शायद

वो कोई शिकायत भी नहीं करता  

मैं ज़बाब क्या दूँ उसे ,

वो कोई सवाल ही नहीं करता….

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Categories: kavita

7 replies

  1. अच्छी कविता।

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  2. Achhi kavita. Prem me maan chanchal ho jaata hai. Kya kahna samajh bahar ho jaata hai.

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  3. Reblogged this on Retiredकलम and commented:

    तीर चुभने से भी ज्यादा दर्द होता है, जब कोई सबसे करीबी इंसान
    चुभती बात कह देता है /

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