# मेरी विदेश यात्रा# 3

तीसरा दिन

हमलोगों को  सिंगापुर की यात्रा में बहुत मज़ा आ रहा था | हालाँकि थका देने वाले टूर के बावजूद दो दिन दर्शानिये स्थल देखने में कैसे निकल गए, पता ही नहीं चला | हाँ, थोड़ी थकान ज़रूर होती थी लेकिन घुमने में बहुत मज़ा आ रहा था |

आज यात्रा का तीसरा दिन था और मुझे सुबह पांच बजे बिस्तर छोड़ देना पड़ा | रात में नींद पूरी नहीं होने के कारण उस समय मेरी आँखे भारी भारी लग रही थी | शरीर  में भी थकावट का अनुभव हो  रहा था |

मैं अपनी थकान को कम करने के लिए, अपने होटल के कमरे के फर्श पर बैठ कर थोड़ी देर योगा किया  |

मेरे भ्रामरी प्राणायाम की आवाज़ सुनकर  मेरी लाइफ  पार्टनर की नींद खुल गई और उन्होंने  मुझे देखते हुए, शिकायत भरे लहजे में कहा … आप तो मुझे सोने ही नहीं दोगे |

अब मैं उसको क्या कहता !  समय पर तैयार  होना भी तो  मज़बूरी थी, क्योंकि पहले से  टूर प्रोग्राम तैयार था और हमें उसी के अनुसार ही घूमना फिरना था |

मैं वहाँ से उठ कर चुप-चाप स्नान करने चला गया | कुछ देर में ही हम सभी तैयार होकर ब्रेकफास्ट हेतु होटल के रेस्तरां में आ गए |

Pinnacle Hotel

होटल तो शानदार था ही,  उसका रेस्टोरेंट भी लाजवाब था | यहाँ ज्यादातर “नॉन वेज” आइटम ही थे | लेकिन मैं हमेशा ऐसे मौकों पर “वेज” आइटम ही पसंद करता हूँ | इसलिए मैंने प्लेट में फ्रूट्स ले लिया, तभी मेरी नज़र वहाँ बना रहे गरमा गरम डोसा पर पड़ी | मुझे अपने देश की याद आ गयी |

फिर क्या था , हमने डोसा का मज़ा लिया और कॉफ़ी पिया | तब तक राजेश जी मुझे ढूंढते हुए आये और कहा – जल्दी चलिए, अपनी गाडी आ गयी है | आज हमलोग को  सेंटोसा आइलैंड घुमने का कार्यक्रम है |

हम लोग बात करते हुए अपनी ट्रेवल वाली  गाडी में आकर बैठ गए | हमारी गाडी फर्राटे भरती  हुई सेंटोसा आइलैंड की ओर चल दी | सिंगापूर में यह अच्छा लग रहा था कि यहाँ की सड़कें चौड़ी  और साफ़ सुथरी थी | कहीं भी किसी प्रकार की गन्दगी नहीं दिखती थी |

रोड के दोनों तरफ जो बड़े बड़े पेड़ खड़े थे, उन्हें कटिंग  करके एक आकर दिया गया था, जिससे इसकी खूबसूरती और भी बढ़ गयी थी | सड़क पर दौड़ते महँगी कारें और इसके अलावा गगनचुम्बी इमारत को देख कर ऐसा लगता था कि यह अमीरों का शहर है, यहाँ तो एक भी भिखारी नहीं दिखा | यहाँ हर चीज़ व्यवस्थित नज़र आ रही थी |

साथ में चल रहे गाइड ने बताया कि सिंगापूर की कुल आबादी मात्र ५८ लाख है | यहाँ के सरकार द्वारा बनाये गए नियम बड़े सख्त है  और यहाँ के लोग बड़े ही अनुशासित है | यह सिंगापुर एक ऐसा सुन्दर राज्य है जो 63 छोटे छोटे आइसलैंड से मिला कर बनाया गया हैं | सच, इसकी सुन्दरता की जितनी भी तारीफ़ करें कम है |

Sentosa Island

 मनमोहक दृश्यों को देखते हुए हमलोग कुछ ही समय में सेंटोसा आइलैंड पहुँच गए |

यहाँ आकर पता चला कि देखने के लिए यहाँ बहुत सारे दर्शनीय स्थल है, जिसे एक दिन में देख पाना संभव नहीं है |  इसलिए हमलोगों  को उनमे से कुछ मनोरंजक स्थान का पहले से चुनाव करना  होगा | हालाँकि टूर – ट्रेवल वालों ने पहले से सारे टिकट खरीद कर हमारा काम आसान कर दिया था | हमें  उसी के अनुसार  घूमना था |  यहाँ  ट्राम – सर्विस की भी व्यवस्था थी  | इस  पर बैठ कर अलग अलग जगहों के डेस्टिनेशन पर  पहुँचने में एक तो समय की बचत होती थी और दूसरा थकान भी नहीं होता था | यह बिलकुल खिलौने जैसा मनमोहक था और इस पर घुमने का आनंद भी बहुत आ रहा था | रास्ते के दोनों तरफ के  खुबसूरत दृश्यों को कैमरे में कैद भी करता जाता था | यहाँ एक अलग ही दुनिया थी | यहाँ आकर हमें महसूस हो रहा था कि तीन दिन में पूरा सिंगापूर नहीं घूम सकते है | इसके लिए हमें  दुबारा आना होगा |

Singapore Zoo

हमलोग सबसे पहले Singapore Zoo पहुँच गए | सुना था कि यहाँ का Zoo वर्ल्ड का सबसे बड़ा Zoo  है | यहाँ हमलोगों ने  सफ़ेद शेर को  बिलकुल नज़दीक से देखा | हम दोनों के बीच  सिर्फ एक शीशे की दीवार बनाया हुआ था | सफ़ेद शेर और शेरनी को पहली बार देख कर मजा आ गया | इसके अलावा और बहुत तरह के जानवर दिखे | ऐसा लगता था कि हम जंगल के अन्दर  विचरण कर रहे है |

Jurong Bird Park

उसके बाद हमलोग  Jurong बर्ड पार्क  में चले आये | यहाँ की खुबसूरत और रंग-बिरंगी पक्षियों को देख कर मन खुश हो गया | इसमें एक बर्ड शो भी चल रहा था जहाँ हमलोग भी शामिल हो कर इन रंग बिरंगी पक्षियों के करतब देखते हुए इनका मजा ले रहे थे |

यहाँ हमलोग ने bird feeding program में भी हिस्सा लिया  और अपने हाथों से इन पक्षियों को  फीड कराया | ये सब पक्षी  बिना डरे आकर कंधे पर बैठ जाते थे | मेरे लिए यह एक नया अनुभव था | यहाँ करीब एक घंटा फूल एन्जॉय किया |

यहाँ पर एक man made  बड़ा सा artificial water fall भी था, जो बहुत ही सुन्दर था | यहाँ कुछ देर बैठ कर बहुत शांति और शुकून का अनुभव हो रहा था | थकान से थोड़ी राहत भी मिल गयी |  थोड़ी दूर आगे चलातभी मुझे वहाँ एक रेपटाइल शो देखने का मौका मिला | एक आदमी अजगर के साथ करतब दिखा रहा था | उसे देख कर हम भी रोमांचित हो गए  और उस शो का हिस्सा बन गए | विशालकाय अजगर के साथ कुछ फोटो  भी खिचाई | हालाँकि इतने बड़े अजगर को गले में लपेट कर डर भी लग रहा था, लेकिन  अजगर को खुद से पकड़ना ही मेरे लिए कौतुहल का विषय था |

अब हमलोगों को  भूख भी सता रही थी,  क्योंकि दोपहर के 3.00 बज चुके थे | वहाँ  लंच का भी अच्छा व्यवस्था था | हमलोगों ने मनपसंद  लंच लिया और फिर हमारा  अगला  प्रोग्राम एक्वेरियम देखना था |

S.E.A. Aquarium  

अद्भुत् , यह एक्वेरियम देखने लायक था ।  पहले तो हमें इस एक्वेरियम को दुनिया का सबसे बड़ा एक्वेरियम होने के इसके दावे पर संदेह था  और हमने सोचा था कि यह सिर्फ एक और ‘अंडरवाटर वर्ल्ड’ है, लेकिन यहाँ आने के बाद लगा कि  मैं  गलत था । हमें वहां घूमने में वाकई बहुत मजा आया।

यह पुरस्कार प्राप्त एक्वेरियम दुनिया में सबसे बड़े एक्वेरियम में से एक है | पुरे एक्वेरियम इसे मनोरंजन के हिसाब से 10 जोन में बांटा गया है, जहाँ अलग अलग तरह के समुद्री जीव रखे हुए है |

यह  एक्वेरियम समुद्री जीवों की एक विस्तृत विविधता समेटे हुए है | यहाँ  समुद्री घोड़ों (SEA HORSE) से लेकर विशाल केकड़ों (CRAB) से लेकर हैमरहेड शार्क तक देखने को मिले | और हमलोगों देख कर काफी रोमांचित हो गए |

 इस एक्वेरियम को देख कर ऐसा लगता था कि समुद्री  जीवों को शीशे के एक्वेरियम में रख कर देखने हेतु प्रस्तुत किया गया  है | लोगो का कहना है कि इस underground एक्वेरियम में करीब 4.50 करोड़ लीटर समुद्री जल है जिसमे एक लाख से ज्यादा समुद्री मछली और जीव रखा गया है |

विभिन्न तरह के मछलियों, ख़ास कर हैमर हेड शार्क को पानी में विचरण करते देख बहुत रोमांच का अनुभव हो रहा था  | इस एक्वेरियम में हमने करीब दो घंटे बिताये | हालांकि यहाँ से जाने की इच्छा नहीं हो रही थी,

 लेकिन अब शाम हो चुकी थी और हमलोग सेंटोसा आइलैंड में घूमते हुए काफी थक चुके थे | अब हमें होटल में जाकर आराम करने की इच्छा हो रही थी |  तभी हमारे टूर – गाइड ने पूछा – क्या सिंगापूर में हिन्दू मंदिर देखना चाहेंगे ?  यह मंदिर बहुत खुबसूरत है |

भगवान् के मंदिर में जाने से भला कौन मना कर सकता था, सो हमलोग थके होने के बाबजूद मंदिर के दर्शन हेतु निकल पड़े |

सचमुच बेहद खुबसूरत हिन्दू मंदिर था  | मेरे मुँह से अनायास ही निकल पडा  — अरे वाह, मेरे भगवान् तो यहाँ विराजमान है | यहाँ प्रभु के चरणों में आकर हम सभी लोग अपनी सारी थकान भूल गए | भगवान् के दर्शन किये | यहाँ भोग प्रसाद भी मिल रहा था जिसे खा कर मन प्रभुमय हो गया |

यहाँ असीम शांति का अनुभव हो रहा था | यहाँ करीब आधा  घंटा व्यतीत करने के बाद रात के करीब 9.00 बजे होटल के लिए रवाना हो गए | जहाँ खाना खा कर बस आराम करना था | क्योंकि फिर सुबह जल्द उठकर अगले दिन के  टूर – प्रोग्राम में शामिल होना था  (क्रमशः) 

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Categories: Tour & Travel

11 replies

  1. सुंदर विवरण|

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  2. यादें ताज़ा हो गई आपके वर्णन से, खूब सुंदर तरीके से लिखा है आपने👏👏

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  3. It’s amazing that there are so many places in Singapore that are forested! It is a unique country, and you wrote an excellent description of it for those of us who will never get to visit it!

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  4. सुन्दर यात्रा वृतांत। पढ़ कर अच्छा लगा।

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  5. Singapore is a good place to visit. Your writing is beautiful adorned with subject and photos. Nice.

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  6. Reblogged this on Retiredकलम and commented:

    When you finally realize that nothing is permanent in this life,
    you will become more tolerant, more forgiving & less Judgmental.

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