#परिवार का महत्व#   

दोस्तों,

हम एक सामाजिक प्राणी है, हम परिवार और समाज में रहना चाहते है | क्योंकि इसके बिना ज़िन्दगी की कल्पना नहीं की जा सकती है | पहले हम बड़े परिवार में रहते थे, जिसे संयुक्त परिवार कहते है  | लेकिन  धीरे धीरे हमारे परिवार की परिभाषा बदलती गयी और इसका आकार भी सिमटता गया |

वैसे आज के हमारे समाज में तीन प्रकार के परिवार होते है |

संयुक्त परिवार (Joint family) :

इसमें तीन पीढी  साथ में रहते है | दादा – दादी, माता- पिता और बच्चे | इसके फायदे बहुत है | छोटे बच्चे को दादा – दादी का सानिध्य मिलता है  | उनकी गोद में खेलने का सौभाग्य प्राप्त होता है |

बच्चे लोग दादा दादी से पारिवारिक संस्कार सीखते है | माता पिता तो अपने अपने कामो में व्यस्त होते है , लेकिन दादा – दादी  का अपनापन और भरपूर प्यार बच्चे को प्राप्त होता है | आपको भी याद होगा वो पल,  जब दादा – दादी अपने गोद में बैठा कर रामायण, महाभारत और न जाने कितनी प्रेरणादायक कहानियाँ सुनाया करते थे |

लेकिन आज की बदलती जीवन शैली में इन सब बातों को अगली पीढ़ी में नहीं ले जा पा रहे हैं |  आज फिर इसकी ज़रुरत महसूस की जा रही है | सच, संयुक्त परिवार के बहुत फायदे है |

आज के आधुनिक जीवन में तनाव बढ़ता जा रहा है | हम किसी भी बाहरी चुनौतियों का सामना परिवार में रह कर आसानी से कर सकते है |

यह हमारे जीवन के एकाकीपन को दूर करता है | बच्चे परिवार में नैतिक और धार्मिक मूल्यों को सीखते है | एक तरह से उनके लिए यह ओःली पाठशाला होती है, जहाँ बड़े बुजुर्ग बच्चो को प्यार , सम्मान, दोस्ती, इमानदारी दयालुता, साहस और समानता का पाठ पढ़ाते है | उन्हें अपने और समाज के प्रति जिम्मेदारी के मूल्य सिखाते है |

जीवन में जब कभी व्यक्ति बुरे और कठिन दौर से गुज़रता है, (चाहे शारीरिक, मानसिक या आर्थिक परेशानी हो), तब उसे परिवार की सबसे ज्यादा ज़रुरत महसूस होती है |

परिवार में हम सुख – दुःख बांटते है | त्यौहार के समय तो खास कर इसका महत्व का  पता  चलता है | बच्चे – बूढ़े सब एक साथ त्यौहार का आनंद लेते है | आज कल तो बहुत से पारंपरिक त्यौहार भी लोग भूलते जा रहे है | आज लोगों के पास समय का भी अभाव है और त्यौहार मनाने  के लिए परिवार के सभी सदस्य पास नहीं होते है |

एकल परिवार (Nuclear family) :

परिवार का यह दूसरा स्वरुप है, इसे कहते है Nuclear family. जिस तरह एक एटम के अन्दर nucleus में इलेक्ट्रान प्रोटोन और neutron होते  है वैसे ही एकल परिवार में पति, पत्नी और बच्चे होते है |

प्रोटोन यानी पति  होता है जिससे ही परिवार में वजन रहता है, क्योंकि परिवार के लिए वह  धन कमाता है |  बाकि तो इलेक्ट्रान पत्नी होती  है | इसका वजन तो कम होता है लेकिन रहती बहुत सक्रिय है |  वो पूजा-पाठ से लेकर घर की सारी जिम्मेदारी निभाती है |

इसके अलावा पर्व – त्यौहार और रिश्तेदारी का भी ख्याल रखना होता है | | और तीसरा वो  पप्पू है जो बिलकुल न्यूट्रल ही रहता है | वो सिर्फ माता पिता को  हमेशा व्यस्त देखता रहता है | उसके लिए उनलोगों के पास समय ही नहीं होता है | जो आज कल के परिवारों में दीखता है |

वायर्ड  परिवार (Weird Family) : 

परिवार का एक तीसरा प्रकार भी होता है, जिसे कहते है ..Weird Family (वायर्ड परिवार) |

इसकी खास विशेषता होती है कि पति, पत्नी और बच्चे आपस  में कम, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक गैजेट (gadget) से ज्यादा समय जुड़े रहते है | उन सबो के लिए गैजेट ज्यादा ज़रूरी हो गया है | भावनात्मक लगाव आपस में कम होता जा रहा है, जबकि गैजेट और मोबाइल से लगाव बढ़ता जा रहा है |

वैसे तो यह गैजेट और  इन्टरनेट  बहुत अच्छी चीज़ है , क्योंकि यह हमारी बहुत सी समस्याओं का  पल भर में हल ढूंढ लेता है |  लेकिन इसका पूर्ण लाभ तभी मिलेगा जब इसका उपयोग सही दिशा में और  सिमित रूप में किया जाए |

होना तो चाहिए था कि इसे हम गुलाम बना कर  रखते, लेकिन हकीकत में आज हम इसके गुलाम हो गए है | आज हम इसे नहीं चला रहे है बल्कि हमारी  ज़िन्दगी को यह चला रहा है |

आजकल बच्चे मोबाइल के addict होते जा रहे है,  हमारा भी कुछ ऐसा ही हाल है | ड्राइंग रूम में हम जब साथ बैठे होते है तब भी हम सभी के हाथ में एक मोबाइल होता है और सभी लोग बस  उसी में व्यस्त रहते है |

आपस में तो बात करना, हँसी के ठहाके लगाना जैसे आदत ही समाप्त हो गयी है | सोशल मीडिया से ज्यादा जुड़े रहने के दुष्परिणाम भी देखने को मिल रहे है | अब तो परिवार के आपसी रिश्ते भी बिगड़ने लगे है | बच्चो में frustration बढ़ गए है, वे चिडचिडे हो रहे है |  उनमे concentration की कमी देखने को मिल रही है |

दोस्तों,

वैसे तो यह जीवन मिला है वह धीरे धीरे बीत ही जाएगा,  लेकिन जीना किस तरह से है, यह एक  विचारनीये विषय है |  अगर हमें  अपने परिवार को एक अच्छा जीवन देना है, बच्चों को  बेहतर भविष्य देना है  तो इस बारे में विचार करना आवश्यक है | हमें विचार करना होगा कि वर्तमान परिस्थितियों में  हम कैसेअ पनी आदतों और स्वभाव में बदलाव लायें ताकि परिवार में ख़ुशी और  आनंद का माहौल फिर से कायम हो सके |

हमारे इस वर्तमान स्थिति का जिम्मेदार कुछ हद तक कोरोना भी है | इसने हमारी दिनचर्या को बिलकुल ही बदल कर रख दिया है | बच्चो के लिए ऑनलाइन क्लास , मोबाइल एडिक्शन का कारण बन रहा है | खेल कूद के लिए ना प्ले ग्राउंड है और न स्कूल है, इसलिए घर में कैद हमारे बच्चे का मोबाइल के प्रति आकर्षण बढ़ा है |

उसी तर ह work from home ने भी लोगों में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट और मोबाइल के प्रति addiction को बढ़ा दिया है |

लेकिन इस बदलते परिवेश में हमें कुछ बदलाव करना ज़रूरी है | हालांकि पुरानी व्यवस्था में लौटना संभव तो नहीं है लेकिन आज की जीवन शैली में कुछ बदलाव लाना ज़रूरी है | हमे गाँव – घर से फिर से जुड़ना होगा |

जब कभी छुट्टी मनाने का मौका मिले तो हमें अपना कुछ  समय अपने गाँव में अपने बुजुर्ग लोगों के साथ हँसी – ख़ुशी के साथ  बिताना होगा | वो पुराने संस्कार अपने बच्चो को सिखाना होगा, तभी हम एक बेहतर और खुशनुमा ज़िन्दगी जी सकते है |

वैसे तो जानवर भी अपना जीवन जीते है लेकिन जब हमने मनुष्य का  जीवन पाया है तो इसका भरपूर आनंद उठाना चाहिए |

we should spend quality time with our family and friends and enjoy a beautiful life. This should be the purpose of life… आपका क्या विचार है ?

जो वक़्त के साथ साथ अपने आप को बदलता है,

वही अपने हिसाब से दुनिया को बदल सकता है

(All Pic source: Google.com)

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Categories: motivational

25 replies

  1. Olá, amigo ✨ Linda paisagem 💙

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  2. अच्छे विचार।

    Liked by 1 person

  3. Bilkul sahi likha hai. Khaas karke aakhri bhaag aur weird family ke baare mein. Pehle bachche खिलौने ke liye rote the. Aaj kal mobile ke liye khaana tak nahi khaate.

    Liked by 2 people

    • हाँ, आज कल बच्चे लोगों में मोबाइल की लत लग गयी है , जिससे उसने
      शारीरिक और मानसिक विकास बाधित हो रही है | कुछ तो परिस्थिति भी जिम्मेदार है |
      आपके विचाए साझा करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद /

      Liked by 1 person

  4. Very beautiful analysis of family structure and type. At our times we all were staying under one roof. Life was such that we learnt the family ethics from our grand parent.

    Liked by 1 person

  5. Reblogged this on Retiredकलम and commented:

    Always listen to your heart.
    It may be on your left,
    But, It is always right.

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Trackbacks

  1. #परिवार का महत्व#    – आओ कुछ नया सीखें

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