मौत के डर से ही सही , ज़िन्दगी को फुर्सत तो मिली
सड़कों को राहत और घरों को रौनक तो मिली ,
कुदरत तेरा रूठना भी ज़रूरी था
इंसान का घमंड टूटना भी ज़रूरी था |

लोग ठीक ही कहते है कि ज़िन्दगी एक कोरा कागज़ की तरह होता है और हम उस पर विभिन्न रंगों को बिखेर कर उसे और सुन्दर बनाने का प्रयास करते है |
मेरी भी जीवन यात्रा कुछ अलग तरह से गुजरी है जिसे याद कर न सिर्फ मन को शुकून मिलता है बल्कि चेहरे पर बरबस मुस्कान बिखर जाती है |
बात उन दिनों की है जब मैं कॉलेज में पढता था और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था |
हालाँकि इंटरमीडिएट मे math और एक्स्ट्रा सब्जेक्ट में बायोलॉजी भी ले रखा था और दोनों में पास भी हो गया था | मतलब यह कि इंजीनियरिंग और मेडिकल दोनों के लिए होने वाले entrance टेस्ट में appear हो सकता था |
मुझे आशा थी कि इंजिनियर या फिर मेडिकल दोनों में से कोई एक में तो क्वालीफाई कर ही जाऊंगा | मैं उसी के अनुसार अपनी तैयारी भी…
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First four lines are so compact and pragmatic,👌
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Yes Dear ,
We feel the impact of nature in our life..
Thanks for sharing your thought..
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