# हाथी को फ़ासी #

दोस्तों,

जानवरों में मुझे हांथी बचपन से ही पसंद है | इसका मुख्य कारण है कि जब मैं छोटा था तो हमारे पडोस में देशी घी की दूकान थी जिसके सेठ के पास अपनी हाथी थी |  उनका गाँव यहाँ से करीब 5 किलोमीटर दूर था  और उनकी अच्छी खासी खेती वहाँ थी |

पहले के ज़माने में लोग अपनी शान शौकत के लिए हाथी पालते थे | वैसे हाथियों का उपयोग सिर्फ शादियों – बारातों में ही हो पाता  था | लेकिन जिसके दरवाज़े पर हाथी बंधा होता था, उसकी गाँव और आस पास के इलाके में बहुत इज्ज़त बढ़ जाती थी |

खैर, मुख्य बात यह है कि वह हाथी हर साप्ताह रविवार को सुबह सुबह शहर आता और घी के दूकान के सामने खड़ा कर दिया जाता था |

आस पास के लोग पूड़ी जलेबी, कोई केला लाकर उसे खिलाता | शायद हाथी को अपने हाथो से खिलाना पुण्य का काम समझा जाता है |

मैं भी डरते डरते महावत की मदद से घर से रोटियां लाकर उस हाथी को  खिलाता था और बदले में मुझे हाथी पर बैठ कर सैर करने की छुट थी | सेठ जी मुझे बहुत मानते थे और उनसे  घरेलु सम्बन्ध थे |

इसलिए कभी कभी हाथी पर बैठ कर उनके गाँव चला जाता था और शाम तक कोई वापस मुझे अपने घर छोड़ देता था | आज जब भी मौका मिलता है मैं  हाथी की सवारी करने से नहीं चुकता हूँ |

और दूसरी बात यह कि हमारे बचपन के दिनों में सर्कस देखने का एक अलग ही मज़ा था | हमारे इलाके में हर साल जेमिनी सर्कस  आता था और मैं हर बार किसी भी तरह सर्कस देखने जाता था |

उसमे मुझे हाथी के करतब देख कर हैरानी  भी होती और ख़ुशी भी |

वो जब स्टूल पर खड़ा हो जाता या दो पैरों पर खड़ा हो कर करतब दिखता तो मैं खुश होकर खूब तालियाँ बजाता |

एक तीसरी  वाक्या याद आ रही है | एक फिल्म थी .. हाथी मेरे साथी | उस फिल्म को देखने का मौका मिला था | फिल्म में जब हाथी को गोली मारी जाती है और वह मर जाता है , उस दृश्य को देख कर मैं हॉल में खूब रोया था | मुझे पता था कि  यह हकीकत नहीं फिल्म है , फिर भी मैं अपनी भावनाओं  को नियंत्रित नहीं कर सका  था |

आज फिर जब यह कहानी …हाथी को फांसी पढने का मौका मिला तो उसे ब्लॉग के माध्यम से आप के साथ शेयर करने की इच्छा हो गई |

आइये पूरी कहानी जो एक सच्ची घटना है उसे  सुनते है ..

दरअसल,  यह घटना आज से करीब 105 साल पुरानी है जो अमेरिका के टेनेसी राज्य में घटी थी |

आज कल तो जानवरों को ले कर बहुत सारे नियम बनाये गए है | उसे किसी भी तरह सताने पर  सजा हो सकती है | शायद इसीलिए सर्कस जैसा शो धीरे  धीरे लुप्त हो चुके है |

हालाँकि यह कहानी १०५ साल पुरानी  है | सुनने में यह कुछ अटपटा लगता है कि इंसानों के लिए बनाया गया क़ानून जानवरों पर भी लागू किया गया है | वैसे जानवरों का अपना क़ानून होता है जब वे जंगल  में रहते है | उससे हम इंसानों का कोई लेना देना नहीं होता है |

मतलब यह कि जब जंगल के जानवरों का कानून इंसानों पर लागू नहीं होता है तो जानवरों पर इंसानों वाला कानून क्यों लागू हो ? जानवर तो इंसानों की न जुवान समझते है और ना तहजीब समझते है | लेकिन ऐसा हुआ |

Source: Google.com

दरअसल, चार्ली स्पार्क नाम का एक शख्स  अमेरिका के टेनेसी में ‘स्पार्क्स वर्ल्ड फेमस शो’  नाम का एक सर्कस चलाता था | उस सर्कस में कई जानवर थे,  जिसमें मैरी  नाम की  एक एशियाई हथिनी  भी थी | उसका वजन करीब पांच टन था |

बताया जाता है कि मैरी उस सर्कस का मुख्य आकर्षण थी | उसमे बहुत सारी खूबियाँ थी |

मैरी जहाँ जहाँ भी अपना शो करती,  लोग उसके दीवाने हो जाते थे |  

वो अपने मुँह से 20 – 25 तरह की  आवाजें और धुन निकालती थी | उसे संगीत की समझ थी,  वह बेस बॉल भी खेलती थी | बच्चे सर्कस में उसी के कारण ज्यादा  मज़ा लेते थे |

मैरी का जन्म  १८८४ में हुआ था और वह 22 साल तक जिंदा रही क्योंकि उसी समय उसे फांसी दिया गया था |

यह घटना है १९१६ की है | उन दिनों एर्विन नामक शहर में एक सर्कस आया था  जिसका नाम था ‘स्पार्क्स वर्ल्ड फेमस शो’ |

 हमलोगों ने अपने ज़माने में इस तरह के सर्कस देखे है | ये सर्कस जब आते थे तो एक बड़े से मैदान मे तम्बू गाड कर महीनो सर्कस का शो करते थे  | इस सर्कस में जानवरों के तरह तरह के करतब भी दिखाए जाते थे |

मौत का कुआँ  होता था और रस्सियों पर लटक कर लोग तरह तरह के करतब दिखाते थे | इन लोगों का एक अपना संसार होता था , जिसमे जानवर के साथ साथ लोग भी एक परिवार की  तरह रहते थे | एक अलग तरह का माहौल होता था |

खैर , यह सर्कस इरविन शहर में आया था | और एक सप्ताह के बाद यह सर्कस शुरू होनी थी |

कहा जाता है कि ठीक उसी समय  मैरी का  महावत किसी वजह से सर्कस छोड़ कर चला जाता है | जिसके कारण सर्कस के मालिक बहुत परेशान थे क्योंकि एक सप्ताह बाद ही सर्कस के शो शुरू होने थे | और समस्या थी  कि मैरी की देख भाल और  उसके  शो का संचालन कौन करेगा |

तभी मालिक के पास एक  ३८ साल का एक नौज़वान पहुँचता है जिसका नाम था वाल्टर | वह महावत बनने को तैयार हो जाता है | हालाँकि उसे इस काम का कोई अनुभव नहीं था |

दरअसल वाल्टर एक होटल में काम करता था और वहाँ उसे पगार के साथ साथ रहने और खाने की भी सुविधा थी | लेकिन अचानक उसके मालिक ने उसे होटल से निकाल दिया था | इससे वाल्टर को खाना के अलावा रहने की भी समस्या हो गई थी | सर्कस में तो रहने की भी सुविधा रहती है इसलिए वो किसी तरह यह काम पाना चाहता था |

मालिक को भी एक महावत की सख्त ज़रुरत थी | दोनों को एक दुसरे की ज़रुरत थी , इसलिए उसे  महावत के रूप में रख लिया |

Source: Google.com

वाल्टर  को हाथी मैरी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी और  मैरी ने भी  उस नए महावत के साथ ज्यादा समय नहीं बिताया था. इसलिए मैरी को कंट्रोल करने में महावत को परेशानी होने लगी  |.

लेकिन इसी बीच एक दिन सर्कस के प्रमोशन के लिए शहर में परेड का आयोजन किया गया, |  जिसमें मैरी समेत सभी जानवर और सर्कस के सभी कलाकार शामिल हुए |

इस दौरान शहर के बीचों-बीच परेड निकाली गई | वाल्टर मैरी के ऊपर सवार हो कर उसे वश में करने की कोशिश कर रहा था | छोटी जगह होने कारण लोग सड़क के दोनों किनारे खड़े हो कर इस परेड का मज़ा ले रहे थे |

इसी दौरान  रास्ते में चलते हुए मैरी को कटे हुए लाल लाल तरबूज दिख जाते है  | वह तरबूज की बेहद शौक़ीन थी | इसलिए वह सड़क पर सीधी चलने के बजाये उस ओर मुड गई जिधर वो आदमी तरबूज बेच रहा था |

मैरी तरबूज खाने के लिए तेजी से आगे बढ़ने लगी  | मैरी के अचानक  ऐसे व्यवहार से वाल्टर घबरा गया और उसने अपने भाले  से उसके कान और गर्दन के पास जोर से चुभोने लगा | चूँकि वह मैरी के लिए नया  था , इसलिए उसके स्वभाव और गुस्से से वाल्टर वाफिफ नहीं था |

वाल्टर के भाला  चुभोने से मैरी  तिलमिला उठी  और गुस्से में  वाल्टर को अपने सूढ़ से पकड़ कर हवा में उछल दिया  और फिर उसके बाद मैरी ने उसके ऊपर अपना पैर रख दिया, जिससे महावत की मौके पर ही मौत हो गई.|

 यह घटना देख कर लोग इधर-उधर भागने लगे. वहीं कुछ लोगों ने हाथी को मार डालने के नारे लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया | एक ने तो अपने पिस्टल से निशाना लगा कर गोली चला भी  दिया लेकिन उसकी गोली से मैरी के मोटे चमड़ी पर कोई असर नहीं हुआ |

हालांकि उस समय तो यह मामला शांत हो गया | मैरी को किसी तरह वश में किया गया और सभी लोग वापस अपने स्थान पर लौट आये |

लेकिन अगले दिन के अखबारों में इस घटना को प्रमुखता से छापा गया, जिसके बाद घटना की जानकारी पूरे शहर में तेजी से फैल गई |

सबों का कहना था कि इस घटना के बदले मैरी को मार दिया जाए | पहले तो मालिक इसके लिए तैयार नहीं था क्योंकि वही तो सर्कस की जान थी | लेकिन शहर के लोग सर्कस के मालिक चार्ली स्पार्क से हाथी मैरी को मृत्युदंड देने की मांग करने लगे |. साथ ही उन्होंने धमकी भी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वो शहर में फिर कभी सर्कस नहीं होने देंगे |.

कई लोगों ने कई तरह से हाथी को मारने की बात कही.|  किसी ने ट्रेन से कुचलवा कर मारने को कहा तो किसी ने हाथी को करंट देकर मारने की बात कही. |

आखिर में लोगों की जिद के आगे चार्ली स्पार्क को झुकना पड़ा और उन्होंने मैरी को मृत्युदंड देने का फैसला किया |

Source: Google.com

मालिक ने  इस मौके का भी फायदा उठाने की कोशिश की | उसने लोगों के सामने मैरी को फांसी देने का फैसला किया, ताकि उसका सर्कस का प्रचार भी हों जाए |  

मैरी का वज़न करीब 5000 किलो था | इसके लिए उन्होंने 100 टन का वजन उठाने वाली एक क्रेन मंगवाई और 13 सितंबर 1916 को क्रेन की मदद से उस हाथी को हजारों लोगों के सामने  फांसी पर लटका दिया गया और यह एक इतिहास बन गया |

शायद पहला मौका था जब किसी जानवर को सरेआम फांसी दी गयी  | गले में फंदा था और मैरी छटपटा रही थी | उसकी दर्दनाक चीख दूर दूर तक गूंज रही थी  लेकिन वहाँ खड़े लोग  तमाशाई बन यह नज़ारा देख रहे थे और  खुश हो रहे थे |

अब सवाल यह है कि एक बेजुबान जानवर को इस तरह  सरेआम फांसी  देना कहाँ तक उचित है ?  चूँकि  ऐसा किया गया है और उस हाथी को  फांसी दी गई है .जिसका विवरण इतिहास में दर्ज है |

हमारे समझ से इतिहास का इकलौता उदहारण तो है ही पर यह इतिहास का काला  अध्याय माना  जाना चाहिए |.. इस सम्बन्ध में आपकी अपनी राय ज़रूर दे ….

( All Pic source: Google.com)

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6 replies

  1. अत्यंत दुखद घटना थी यह।

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    • जी सही कहा आपने |
      इसीलिए तो कहा है कि इसे इतिहास का इकलौता
      और काला अध्याय माना जाना चाहिए |

      Liked by 1 person

  2. बेजुबान जानबर के साथ आज भी ज़्यादती होती है ।हमे इसके खिलाफ लोगो मे जागरूकता फैलानी चाहिए।

    Liked by 1 person

    • बिलकुल सही कहा है | बहुत सारे कानून बनने के बावजूद
      जानवरों पर ज्यादती होती है |

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  3. Bahut dard ki Kahani.

    Liked by 1 person

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