
हमारे रिश्ते कभी बनते है तो कभी बिगड़ते रहते है, यह स्वाभाविक ही है | परन्तु रिश्तों को कुछ गलतियों के कारण समाप्त नहीं करना चाहिए |
हमारे दिल के जो करीब होते हैं उन्ही से रिश्ता कायम होता है | आज के इस कोरोनाकाल में बहुत से ऐसी घटनाएँ देखने और सुनने को मिली, जिसने आपसी रिश्तो को तार -तार कर दिया है | ,
मुसीबत के समय लोगों को रिश्तों की कमजोर का पता लगा | उनकी स्वार्थ की भावना उजागर हो गयी और ऐसे रिश्तो का तब क्या किया जाए, यह एक मूक प्रश्न है .. उन्ही बातो को शब्द देने की एक कोशिश है ‘…’

बनते बिगड़ते रिश्ते
एक अजीब सी बेचैनी है .आज मेरी आँखों में
सारा जग सो रहा है पर नींद नहीं मेरी आँखों में
इस अँधेरी रात में कलम थामे हाथ में
कागज़ पर स्याही बिखरने को बेचैन है…
लिखूँ तो क्या लिखूँ, .मैं शब्दों का बाजीगर नहीं
जुबान तो खामोश है .. आँसू से भींगे नयन है
सवाल सिर्फ रिश्तों के सिमटने का नहीं है
सवाल तो अपने ज़ख्मों के रिसने का भी है
ताउम्र रहे बेखबर वे अपनी नादानियों से
सवाल उनके दिए दर्दों के टीसने का भी है..
इसी कशमकश में सोचता हूँ रात गुज़र जाने दूँ
वो आये ना आये उनके ख्वाबों को आने दूँ ..
तिनका तिनका जोड़कर जो घोसला बनाया था हमने
हवा के झोकों से कैसे उन्हें बिखर जाने दूँ. ?.
नहीं, कुछ तो करूँगा अपने सपनों को बचाने के लिए
कोई चिराग जलाऊंगा अंधेरों को भगाने के लिए ..
और फिर जब भोर की पहली किरण फूटेगी
रेशमी स्पर्श आएगा मुझे जगाने के लिए ..
और प्यार का एहसास फिर लौट आएगा
अपने रिश्तों का मिठास फिर लौट आएगा ..
सब कुछ होगा पहले की तरह सुन्दर और रंगीन
उनके वादों पे एतबार फिर से लौट आएगा ||
…विजय वर्मा.
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Categories: kavita
अच्छी कविता
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धन्यवाद डिअर
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सुंदर पंक्तियां
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बहुत बहुत धन्यवाद सर जी |
आपके शब्द मेरा हौसला बढ़ाते है |
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Rishta hai banane ke Liye. Toot gaya sochho mat ,jodane ke liye
Koshish Karo.yehi hai jindegj. Sunder kavita.
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आपने बिलकुल सही कहा है | रिश्ते बनाना और निभाना भी चाहिए |
आपने विचार साझा करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद../
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Reblogged this on Retiredकलम and commented:
ज़िन्दगी में ऐसे लोग जोड़ना जो वक़्त आने पर आपकी परछाईं ,
और सही वक़्त पर आपका आईना बने….क्योंकि
आईना कभी झूठ बोलता नहीं और परछाई कभी साथ छोडती नहीं ..||
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