# यूँ ही इंतज़ार करते है #

बुढ़ापे की ज़िन्दगी कैसी हो ? , यह जानने के लिए बुढ़ापे को जीना ज़रूरी है |

चाहे ज़िन्दगी में कितनी ही रुकावटें आयें, तकलीफें आए उसका डट कर मुकाबला करना है |

क्योकि हमें अपनी ज़िन्दगी के प्यार करना चाहिए | हमें तो ज़िन्दगी जीना है |

कभी कभी ऐसा लगता है कि ज़िन्दगी की रफ़्तार हमारी सोच से अधिक तेज़ हो गयी है , तब दिल के कोने से एक आवाज़ उठती है कि ….

चाय के साथ

आओ किसी का यूँ ही इंतजार करते हैं

चाय के साथ  फिर कोई बात करते हैं

उम्र पचपन  की हो गई है तो क्या

अपने बुढ़ापे का इस्तक़बाल करते है |

किसको पड़ी है फिक्र हमारी सेहत की

आओ हम एक दूसरे की देखभाल करते हैं

बच्चे हमारी पहुँच से दूर हैं तो क्या

आओ उन्ही को फिर से कॉल करते हैं |

जिंदगी जो बीत गई सो बीत गई

 जो बची है आओ उससे  प्यार करते हैं,

जो भी दिया लाजवाब दिया ऊपर वाले ने

इसके लिए कोटि कोटि धन्यवाद करते है

आओ किसी का यूँही इंतजार करते हैं

चाय के साथ कोई फिर बात करते हैं |

(विजय वर्मा )

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Categories: kavita

17 replies

  1. Nice to read the trailor of old man’s life.Film to baki hai.👌👌👌

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  2. Kya baat hai… Zindagi ko jeena hai, umra bas ek number hai… well said sir..

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  3. बहुत बढ़िया 👌

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  4. Beautiful lines 👌👌

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  5. अति सुन्दर 👌👌👍👏👏💐।
    खूब मस्ती करने वाले वह गीत और नाच भी अच्छी लगी। Very much positive and enthusiastic. 👏👏👏

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  6. Contemporary yet realistic

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