# रिक्शावाला की अजब कहानी #…1

रिश्तों की महक दूरियों से कम नहीं होती ,
जीवन में अगर साथ हो सच्चे रिश्तों का , तो
ज़िन्दगी जन्नत से कम नहीं होती …..

Retiredकलम

दोपहर का समय है और राजेंदर खाना खा कर अपने रिक्शा पर बैठा आराम कर रहा है | थोड़ी ही देर में वह अपने अतीत में खो जाता है | बीती हुई बातें चलचित्र की तरह दिमाग में एक एक कर आने लगता है |

आज भी याद है उसे, कितनी ख़ुशी हुई थी जब उसका मेट्रिक का रिजल्ट आया था और उसने अच्छे अंको से पास किया था | पुरे गाँव में मिठाइयाँ बांटी गई थी /

उसके बाद, कॉलेज का वह पहला दिन आज तक भी नहीं भुला है | जहाँ अनजान दोस्तों के बीच उसे थोड़ी झिझक भी हो रही थी |

लेकिन बड़ा आदमी बनने की ललक और भविष्य के हसीन सपने उसके उमंगो को परवान चढ़ा रहे थे….. …पर शायद नियति को यह मंज़ूर नहीं था |

फिर एक दिन  उसके जीवन में एक भूचाल सा आ गया ..अचानक उसके पिता जी की मौत हो…

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11 replies

  1. This story is good, but started with third person, and later shifted to first person. Any reason?

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    • Sir, I am a novice in this matter, but if you read the whole story,
      then may be you will get the answer to that question .
      Please read the whole story. And also give marg darshan .
      Thank you for your support ..

      Liked by 1 person

      • I always read a story in toto, not in installments, particularly when it was related to Banaras. I couldn’t find the answer till the end. You may help me out.
        And yes, you are not novice, sir. The way you write serialised stories proves that you have expertise in story telling.

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  2. वर्मा जी, मेरे कहने का मतलब था कि कहानी की शुरूआत एक रिक्शे वाले के बारे में कहने से हुई, पर पहले भी भाग में कहानी स्वयं रिक्शा वाला कहने लगा “मैं” कहते हुए।

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    • मतलब “वह” से “मैं” हो गया।

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      • आपने सही पकड़ा है , किस्तों में लिखने से मुझसे भूल हो गयी है मैं ज़ल्द ही
        भूल सुधार कर लूँगा | लेकिन आप की तारीफ करनी होगी कि आप जो
        भी करते है उसमे खो जाते है , आप के लेखनी में भी पता चलता है //धन्यवाद सर /

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        • तारीफ़ के लिए आभार। सिर्फ पहले भाग में ही सुधार करना है। आप स्वयं एक स्थापित लेखक हैं। शेष धन्यवाद।

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          • आपने जो मार्गदर्शन दिया उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद /
            आप इसी तरह मेरे कमियों को बताते रहे , जिससे मैं सुधार कर सकूँ |
            मुझे आप सबों की लेखनी से भी बहुत कुछ सिखने को मिलता है |

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