# बचपन की होली #

आज जब  मै  बच्चो के साथ होली  खेल  रहा  था  तो अचानक  हमें अपने  बचपन की  होली  की एक घटना याद आ गई और चेहरे पर मुस्कान दौड़ गई |

सचमुच आज के ज़माने की होली और हमारे बचपन  की वो होली में एक ख़ास अंतर महसूस कर पा रहा हूँ |हमारे बचपन की  होली की मस्ती कुछ ज्यादा ही रहती थी |

आज तो ना पीतल वाली पिचकारी है और ना कीचड़ वाली कपडे फाड़ होली होती है | और होलिका जलाने  के लिए पाँच सात दिन पहले से ही रात में दोस्तों की  टीम बनाकर  घर घर जाकर गोइठा मांगते थे, लकड़ियाँ इकठ्ठा करते थे  और खूब मस्ती करते थे |

कभी कभी तो मौका पाकर किसी की  पुरानी खाट को भी चोरी छुपे आग के हवाले कर देते थे |

अब हमलोग शरीफों वाली होली खेलते है etiquette और manner का ध्यान रखते है | हमें आज भी याद है वो दिन, जब मैं और मेरा भांजा पप्पू , जो की   मेरे ही उम्र का था और हमलोग साथ ही रहते थे |

हम दोनों हम उम्र होने के कारण अच्छे दोस्त थे | दोस्ती ऐसी कि हमारे चेहरे के भाव देख कर , बिना बोले सब कुछ समझा जा सकता था   |

होली का दिन था, दिन भर खूब जमकर होली खेलें और शाम को ढोलक और थाली पीट पीट  कर होली के गाने गला फाड़ फाड़ कर गा रहे थे | थोड़ी देर बाद  जोरों की प्यास लगी | पास ही रामू काका भांग की  सरबत बना रहे थे, जिसे ठंडई कहा जाता है |

फिर क्या था हमलोगों ने भांग की शरबत गट – गट कर चार गिलास पी गए | थोड़ी देर बाद दिमाग घुमने लगा | लेकिन बचपन का  शुरुर ऐसा  कि होली के गाने पर डांस जारी रहा |

जब  हमारी दस दोस्तों की टीम नाचते नाचते बहुत थक गए, तो इसी बीच घर से पैगाम आया कि रात काफी हो गई है, आकर खाना खा लिया जाए | हम सभी दोस्त पुआ और पकवान का खूब मज़ा लिए |

अब , हमलोगों ने तय किया कि बिस्तर लेकर खुली छत पर ही सोया जाए, क्योकि किसी को पता नहीं चल सके कि हमलोगों ने भांग  पी है ,वर्ना अपनी खैर नहीं |

बिस्तर के साथ हम दोनों छत पर थे ,और सोने की कोशिश कर ही रहे थे कि मुझे महसूस हुआ कि मेरा दिमाग बहुर जोर जोर से घूम रहा है, | और मैं बिस्तर से ऊपर हवा में उड़ रहा हूँ | हमलोग थे तो बच्चे ही और रात के एक बजे थे |

मैं घबरा कर पप्पू की तरफ देखा तो वह बोल पड़ा…. मेरा दिमाग जोर जोर से घूम रहा है और बोल कर जोर जोर से हँसने लगा , उसे देख कर मुझे भी  जोर जोर से  हँसी आने लगी |

फिर मुझे याद आया कि भांग पीने से ऐसा होता है तो हमने अपनी हँसी रोकने की कोशिश की और उसे भी इशारे से मना किया क्योंकि रात का शांत वातावरण में ध्वनि pollution हो रहा था |, और यदि भांग  वाली बात घर वालों को पता चला, तो रात में ही बिना खट्टी आचार खाए अपना नशा उतार दिया जायेगा |

ऐसा मन में विचार आते ही हमलोग काफी डर गए |, समझ में नहीं आ रहा था कि उड़ने वाली स्थिति से कैसे अपने  को वश में किया जाए | तब पप्पू को एक आईडिया सुझा, कि किसी तरह  रसोई घर में रखे हुए आचार को लाकर खाया जाए तो नशा उतर सकता है |

मैं किसी तरह अँधेरे का फायदा उठा कर चुपके दबे पांव से रसोई में घुसा और अंधेरे में ही एक आचार के डिब्बे में हाथ डाल कर चार पाँच आचार निकाल कर  हम  दोनों ने अँधेरे में ही मुँह में डाल लिया |

लेकिन थोड़ी देर में ही दिमाग की बत्ती जल गई और अँधेरे में ही पानी खोजने लगा , क्योंकि हमलोगों ने गलती से मिरचा का  आचार खा लिया था |

हमलोग काफी घबरा रहे थे कि अब क्या किया जाए, | इधर तीखा आचार से परेशान था उधर घर वालों से भी डर था | हमलोग एक दुसरे का हाथ पकड़ कर धीरे धीरे अँधेरे में ही किसी तरह  अपने बिस्तर पर लौट आए और भगवान को याद कर बस इतना ही कहा ….हे प्रभु, , आज के बाद कभी ज़िन्दगी में भांग की तरफ देखूंगा भी नहीं ….,लेकिन आज के मुसीबत से छुटकारा दिला दो प्रभु …

आज  जब  पप्पू  ने  फ़ोन करके होली की बधाई दी तब हमलोग  उस घटना को याद करके खूब हँसे. ……..

बचपन के दिन भी  क्या दिन थे … आज कल तो ऐसे दोस्त भी नहीं होते  और तो और  जिस पर  सबसे ज्यादा  भरोसा करो वही धोखा दे जाता  है |

इंसानियत को भूल कर लोग सिर्फ पैसे कमाने की अंधी दौड़ में मगन हो गए है | आज रिश्तों की कोई  अहमियत नहीं | … मैंने अपनी यह भूले बिसरे यादें आपको सुना रहा हूँ ताकि आप को भी आज होली के अवसर पर थोड़ी गुदगुदी हो …और आप के चेहरे पर मुस्मुकराहट आये |

कुछ पुराने यादों की  झलक दिखाया हूँ दोस्तों, शायद आपने जी हो ऐसी ज़िन्दगी..देखी होगी |  होली के अवसर पर आप सभी लोगों को दिल से बधाई … happy  Holi …happy holi …happy  holi

BE HAPPY… BE ACTIVE … BE FOCUSED ….. BE ALIVE,,

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Categories: मेरे संस्मरण

4 replies

  1. Very nice

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  2. Happy holi all family members sir ji

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  3. Reblogged this on Retiredकलम and commented:

    आप सभी को आस्था और सत्या के विजय पर्व होलिका दहन
    की हार्दिक बधाई और शुभकामनायें |

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