दीप तले अँधेरा

ज़िन्दगी में टेंशन ही टेंशन है , फिर भी लवों पर मुस्कान है

क्योंकि जीना जब हर हाल में है, तो मुस्कुरा के जीने में क्या नुक्सान है ..

कोई कैसे सोच सकता है कि… जो इंसान अपनी खुशिओं का हमेशा social media में, फेसबुक के  द्वारा नुमाइश करता रहता है,  दुसरो को नसीहत देता फिरता है कि हमेशा खुश रहो |

जिंदगी जीने के नए आयाम सिखाता रहता है, परन्तु  खुद अंदर से इतना दुखी कैसे हो सकता है |

उसकी आँखों में ख़ुशी के नहीं दुखों के सैलाब नज़र आते है …..लेकिन यह सत्य है दोस्तों कि  दिए तले ही अँधेरा होता है |

कभी कभी इंसान अपनी दुखों  एवं कसक को छुपाने के लिए जीवन रूपी रंग मंच पर हकीकत से परे  अभिनय (role play)  करता है | 

दुनिया को वो सब नसीहत देता फिरता है जो उसके खुद के जीने के लिए जरूरी है |

एक डॉक्टर जो स्वयं  ही diabetic मरीज है वो दुसरो का diabetic ठीक करने का ईलाज करता फिरता है और  उसे सटीक दवा उपलब्ध कराने की कोशिश करता है |

उसे खान- पान में परहेज और  सही जीवन शैली के बारे में सलाह देता है..

 परन्तु वो स्वयं पर इसे  क्यूँ  लागू नहीं कर पाता है ,…. यह सोचनिए विषय है ?  

क्या उसके खुद के जीने कि इच्छा समाप्त हो गई है ?..  शायद नहीं |

वह सब कुछ जानते हुए भी खुद पर लागू क्यों नहीं कर पाता है |

यह कहावत सत्य है कि “दुसरे को उपदेश देना बहुत आसान है, लेकिन खुद उन उपदेशों का पालन करना बहुत ही कठिन है “

यह ज़िन्दगी  है दोस्त, … बस, यह यूँ ही चलता रहेगा ….जब तक कि खुद में दृढ संकल्प और इच्छा शक्ति ना हो उसे अपने पर लागू कर पाने का |

यह प्रश्न  इतना कठिन नहीं है, शायद इसका उत्तर बहुत कठिन है | लेकिन इसका उत्तर ढूँढना होगा, जल्द ही खोजना होगा..  आखिर ऐसा क्यूँ ….??? 

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जिद करना मज़बूरी नहीं

जिद करना ज़रूरी है

ख्वाब बुनना ज़रूरी है

किस्मत के सहारे ना बैठ

 कोशिश करना ज़रूरी है

हाँ, जिद करना ज़रूरी है …

जिद करो कि  मंजिल को पाया जाए

तंग सोच से पीछा छुड़ाया जाए…

जिद हो कि आंधियो  में दिया जलाया जाए

दशरथ मांझी सा हिम्मत जुटाया  जाए

जिद हो कि  रोते को हंसाया जाए

और दुनिया को  खूबसूरत बनाया जाए

असफलता को गले लगाना मजबूरी है

हाँ,  जिद करना ज़रूरी है …..

जिद करो कि हार जीत में बदल जाए

डगमगाते कदम  भी संभल जाए

अपने अन्दर के गन्दगी को हटाया जाए

और, खुद को बेहतर इंसान बनाया जाए 

 जिद  करना  मज़बूरी  नहीं

हाँ ….जिद करना ज़रूरी है  ||

…..विजय वर्मा

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सकारात्मक विचार – 14

मिले  जहां जब भी जो  खुशी,
फैला  के दामन  बटोरा  करो,
जीने  का  हो अगर   नशा,
हर  घूंट में जिंदगी  को पिया करो,
किस्तों  में  मत  जिया   करो …..

यह सच है कि हमारी सोच पर बहुत कुछ निर्भर करता है | अगर  हमारी  सोच सकारात्मक होंगे तो  आस पास के वातावरण में पॉजिटिव vibes का संचार होगा और तब हम सकारत्मक ज़िन्दगी जी सकेंगे ….

दरअसल हमारे पास दो तरह के बीज होते हैं, सकारात्मक  और नकारात्मक विचार वाले बीज |  हम जैसा बीज बोते है, आगे चलकर वैसा ही हम  अपने नजरिये और व्यवहार रूपी पेड़ का निर्धारण करते हैं।

हम जैसा सोचते हैं, वैसा ही बन जाते हैं। इसलिए कहा जाता है कि जैसे हमारे विचार होते हैं, वैसा ही हमारा आचरण होता है।

यह सच है कि हमारे विचारों पर हमारा स्वयं का नियंत्रण होता है इसलिए यह हमें ही तय करना होता है कि हमें सकारात्मक सोचना है या नकारात्मक ।

यह पूरी तरह से हम पर निर्भर करता है कि हम अपने दिमाग रूपी जमीन में कौन- सा बीज बोना चाहते हैं।

अगर थोड़ी सी समझदारी का उपयोग करें तो  हम कांटेदार वृक्ष  को भी महकते फूलों के वृक्ष में बदल सकते हैं।

अगर आने वाले समय में  हमें  अपने जीवन में सफल होना है तो हमें आज से ही अपनी सोच सकारात्मक बनानी होगी।  

इसी बात को ध्यान रखते हुए हम अपने ब्लॉग में रोज़ सुबह सकारात्मक विचारों को लिखते है ताकि हमारी सुबह सकारात्मक सोच से शुरू हो सके |

आज कल हमारे आस पास का  वातावरण  कुछ ऐसा हो गया है कि नकारात्मक विचार खुद ब खुद हमारे अंदर आ जाती है | परन्तु सकारात्मक विचार को मन में लाने के लिए हमें अपने आप को motivate (mind को activate)   करना पड़ता है |

कल ही की बात है… मैं सुबह में मोर्निंग वाक के लिए घर से थोड़ी दूर स्थित पार्क की ओर पैदल ही जा रहा था |  रास्ते में हमारे पुराने मित्र राम शरण जी से मेरी  मुलाकात हो गयी |

आज बहुत दिनों के बाद उनसे मुलाकात हुई थी, सो हमने पूछ लिया ….और कैसी कट रही है ?

तभी उनके चेहरे पर चिंता के भाव उभर आये  और उदास होते हुए बोले… क्या कहें डिअर, अब तो जीने की इच्छा ही समाप्त हो गई है |

मैंने तुरंत पूछा …ऐसा क्यों बोल रहे है ?

 उन्होंने कुछ सोचते  हुए कहा… अब क्या बताएं. …मन बहुत दुखी रहता है … शारीरिक चिंता, पारिवारिक कलह , आर्थिक चिंता  सब कुछ मिल कर चैन से रहने नहीं देता है |

बात करते हुए हमलोग पार्क में पहुँच  चुके थे | हम दोनों वही एक चबूतरे पर बैठ गए | चूँकि उनसे बहुत दिनों बाद मुलाकात हो रही थी तो मैंने बातों का सिलसिला आगे बढ़ाते हुए पूछा…  अब इस उम्र में तो थोड़ी बहुत शारीरिक कष्ट तो लगी ही रहती है, और धन सम्पति के बारे में इस उम्र के पडाव में क्या चिंता करना |

बस दो वक़्त की रोटी आराम से पा रहे है | घर में बाल बच्चे सब settle कर गए है | फिर तो आप को हमेशा खुश रह कर ज़िन्दगी जीना चाहिए |

करीब  आधे घंटे तक तर्क वितर्क होता रहा | हर चीज़ में उनकी नकारात्मक सोच दिख रही थी |  तब मैंने उन्हें एक सुनी हुई  कहानी सुनाई …

एक बार भगवान् गौतम बुद्ध अपने शिष्यों को उपदेश देते हुए एक कहानी सुना रहे थे |

एक  राजा अपने नियमित  विचरण के लिए हाथी पर बैठ कर राज्य का  भ्रमण कर रहे थे |

वो थोड़ी दूर ही चले होंगें कि एक दूकान के सामने अपने हाथी को रोक दिया और साथ चल रहे मंत्री से कहा…. मालूम नहीं क्यों , मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि इस दूकानदार को कल सुबह फाँसी पर लटका दूँ  |

मंत्री अपनी जिज्ञासा शांत करने के ख्याल से राजा जी से पूछने ही वाला था कि तब तक राजा  ने हाथी को आगे बढ़ा दिया और दूसरी ओर चल दिए |

मंत्री बहुत होशियार था, लेकिन उसके मन में अब भी यह प्रश्न उठ रहे थे कि राजा ने ऐसा क्यों कहा | दुकानदार ने तो कोई गुनाह भी नहीं किया |

जब राजा  वापस अपने महल में पहुँचे,  तो वो मंत्री वहाँ से भेष बदल कर साधारण जनता की तरह वापस  उस दूकानदार के पास पहुँचा | वह  देखता है कि दूकानदार चन्दन की लकड़ियाँ बेच रहा है | उसने दुकानदार से  कहा… और सेठ जी,  आप का व्यापार कैसा चल रहा है ?

सेठ जी मंत्री को पहचान नहीं सके और एक साधारण प्रजा समझ कर उनसे कहा …क्या बताएं दोस्त, व्यापार बहुत मंदा चल रहा है | ग्राहक आते तो है, चन्दन की लकड़ियों की खुशबू का आनंद लेते है, उसकी तारीफ भी करते है, लेकिन खरीदता कोई नहीं |

मैं तो सिर्फ इस इंतज़ार में बैठा हूँ कि  अपने राज्य की राजा  की मौत हो जाये तो उसके अंत्येष्टि में ढेर सारे चन्दन की लकड़ी की ज़रुरत पड़ेगी और उस दिन से  शायद मेरा  व्यापार चल निकले |

अब मंत्री को माज़रा समझ में आ रहा था | उसके राजा  के प्रति नकारात्मक विचार को  यहाँ से गुजरते हुए राजा ने महसूस किया  होगा |और उनके दिमाग में भी उसके लिए वैसा ही नकारात्मक विचार आया होगा |

मंत्री बुद्धिमान थे | उनके मन में एक विचार आया और  कुछ सोच कर उन्होंने कहा …. मैं थोड़ी चन्दन की लकड़ी खरीदना चाहता हूँ | 

उनकी खरीदने की बात सुन कर  दूकानदार बहुत खुश हुआ | बहुत दिनों के बाद कोई ग्राहक आया था  |

उसने  अच्छी तरह कागज में लपेट कर चन्दन की लकड़ी मंत्री को दे दी |

दुकानदार को मालूम नहीं था कि वे उसी राजा के मंत्री है |

मंत्री जी अगले दिन चन्दन की लकड़ी लेकर राजा  के पास पहुंचे और उनसे बोले … महाराज, वो जो दूकानदार था, वह आपके लिए यह तोहफा भेजा है |

राजा तोहफा पाकर बहुत खुश हुए | और कहने लगे… मैं तो बेकार में ही उस दुकानदार  को फांसी पर लटकाने की सोच रहा था  | उसने तो मेरे लिए तोहफा भेजा है |

उसने पैकेट खोल कर देखा तो चन्दन की खुशबूदार लकड़ी थी | राजा ने भी बदले में कुछ सोने के सिक्के उन दुकानदार के लिए भिजवाए |

मंत्री अगले दिन सोने के सिक्के लेकर आम जनता की भेष में ही  दुकानदार के पास  पहुंचे और राजा  द्वारा दी गयी सिक्के उसे सौप दिया |

दुकानदार  सोने के सिक्के पाकर बहुत खुश हुआ और बोला…मैं तो फालतू में ही सोच रहा था कि राजा को चले जाना चाहिए इस दुनिया से | जिसकी चिता के लिए  चन्दन की लकड़ी खरीदी जाएगी |

राजा तो बहुत अच्छे है, बड़े दयालु है |  भगवान् उनकी उम्र लम्बी करे |

यह एक छोटी सी कहानी बताती है कि ये जो हमारे मन में विचार चलते है और जो विचार शब्दों के रूप में बाहर निकलते है और जो  भावनाएं  हम प्रदर्शित करते है  वो सब सब हमारे कर्म है |

गौतम बुद्ध ने कहा था … आपके विचार ही आपके कर्म है | अगर हमने  अपने विचारों को नियंत्रित  कर लिया तो हम को हमेशा सुख की अनुभूति होगी |

इसीलिए आप हमेशा सकारात्मक सोचिये  और सुखी रहिये. …

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स्वस्थ रहना ज़रूरी है – 12

मुश्किल बड़ी घड़ी है

संयम बनाये रखना

कुछ सावधानी अपना कर

खुद को बचाये रखना

फिर आया कोरोना

दोस्तों,

 मैंने  दो दिनों पूर्व ही कोरोना के ऊपर ब्लॉग पोस्ट किया था, जिस पर बहुत सारी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली, खास कर इस रोग से बचने के लिए सुझाए गए उपायों को लोगों ने बहुत पसंद किया है |

जैसा कि हम देख रहे है कि कोरोना वायरस से पीड़ित होने वाले लोगों की संख्या लगातार बढती जा रही है और हमलोग फिर से दशहत में ज़िन्दगी जीने को मजबूर हो गए है | इसलिए मैं आज इस विषय पर फिर एक बार चर्चा करना चाहता हूँ |

समाचार पत्रों के द्वारा यह  पता चल रहा है कि कोरोना के नए मरीजों में “डबल म्युटेंट वायरस” भी पाया गया है, जो कि चिंता का विषय है |

यह नया स्ट्रेन का वायरस  ज्यादा खतरनाक बताया जा रहा है । अभी तक सामन्य  कोरोना से लड़ना मुश्किल  हो रहा था और इस यह नए  स्ट्रेन वाले कोरोना के आ जाने से खतरा और भी बढ़ गया है ।

आम भाषा में समझा जाए तो वायरस ज्यादा घातक होने के लिए समय के साथ अपनी संरचना को बदलता रहता है।

भारत में अभी कोरोनावायरस के करीब 7000 म्युटेंट सक्रिय हैं। लेकिन इनमें से सबसे अधिक चिंता “डबल म्युटेंट वायरस” को लेकर है, क्योंकि इसमें वायरस की संरचना में काफी बदलाव देखा गया है।

नए लक्षणों वाले मरीजों की अधिकता

वर्तमान में कोरोना के कुछ नए लक्षण उभर कर आ रहे हैं जैसे :- जीभ पर धब्बे और सूजन का उभरना , स्किन पर लालिमा , स्किन पर जलन , पाँवों के तलवों में जलन , पैरों के तलवों में सूजन , स्किन एलर्जी , डायरिया , उल्टी दस्त , अपच , पेट में दर्द , बहती हुई नाक , सुखी खांसी , बुखार इत्यादि । 

 

source: Google.com

कोरोना के शुरुआती लक्षण :- 

कोरोना वायरस से ग्रसित लोगों में निम्नलिखित  शुरुआती लक्षण नज़र आते है ..

•     तेज़ बुखार 

•     खांसी 

•     जुकाम 

•     गले में खराश 

•     सांस लेने में तकलीफ होना 

•     तेज़ सर दर्द 

कोविड –19 के सामान्य लक्षण :- 

कोरोना वायरस के कुछ सामान्य लक्षण है जिनसे सतर्क रहने की बहुत आवश्यकता है । 

•     शरीर में दर्द होना

•     गले में खराश 

•     दस्त लगना 

•     आँख आना | आँखों में तकलीफ होना 

•     सरदर्द | तेज़ सरदर्द 

•     स्वाद या गंध का चला जाना  

•     त्वचा पर दाने या उंगलियों या पैर की उंगलियों का कटना |

कोरोना वायरस के गंभीर लक्षण :- 

कोरोना के ये लक्षण में मरीज़ स्थिति काफी गंभीर हो जाती है ..

•     सांस लेने में कठिनाई या सांस की तकलीफ 

•     ऑक्सीज़न लेवल का गिरना 

•     सीने में दर्द या दबाव की शिकायत 

•     बोलने और चलने-फिरने में परेशानी 

•     शरीर का टूटने लगना 

आंकड़ों के नए रिकॉर्ड ने बढ़ाई चिंता

कोविड 19 वायरस तेजी से बढ़ते हुए आज पूरी दुनिया पर हावी हो गया है । इस वायरस ने पुरे विश्व में अब तक 28 लाख  से ज्यादा जानें ले ली हैं | भारत में अब इसका प्रकोप बढ़ता जा रहा है । इस समय भारत में भी कोरोना से मरने वालों की संख्या 1.66 लाख के पार पहुँच चुकी है |

सबसे चिंता की बात है कि कोविड 19 रोगियों के लिए सरकारी और  प्राइवेट हॉस्पिटल में बिस्तर की  उपलब्धता एक समस्या बन गयी है |

तो ऐसे में किया क्या जाए, यह वाजिब प्रश्न  है जिसका समाधान हमें ढूँढना होगा |

हार्ट केयर फाउंडेशन  ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के.के.अग्रवाल ने बताया है कि कोविड 19  के 70 से 80 प्रतिशत मामले हल्के लक्षणों वाले होते हैं, यानि अगर मरीज को घर पर क्वारंटिन करके देखभाल में रखा जाए, तो वह ठीक हो सकता है ।

परंतु वह कौन-सी सावधानियां हैं, जिनके पालन से रोगी और उसके घरवालों को बिना किसी खतरे के क्वारंटिन किया जा सकता है या ठीक रखा जा सकता है ।

आइये जानते है कि कोरोना के इस दौर में हर घर में वह कौन से टूल्स होने चाहिए, जिनसे व्यक्ति स्वंय को और घर के दूसरे लोगों को इस बीमारी से सुरक्षित रख सकता है …

हर घर में हो ऑक्सीज़न मीटर

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि आज हर घर में एक ऑक्सीज़न मीटर जिसे कोविड मीटर भी कहते हैं, होना अनिवार्य है । इस मीटर से यह पता लगाने में आसानी होती है कि शरीर में ऑक्सीज़न की मात्रा कम तो नहीं हो रही है ।

इसके साथ ही ऑक्सीज़न कंसल्टट्रेटर की भूमिका भी बहुत अहम है, इसलिए वह भी उपलब्ध होना चाहिए । ऑक्सीज़न कंसल्टट्रेर व्यक्ति को 5 लीटर प्रति मिनट के हिसाब से ऑक्सीजन देने का काम करता है । अगर यह दो चीजें आपके पास हैं तो आप घर पर ही कोरोना के साधारण मरीज को संभाल सकते हो |

कपूर का प्रयोग..

आज ही मेरे मित्र द्वारा भेजा गया मेसेज देखा , जिसमे बताया गया है कि शरीर में ऑक्सीजन लेवल की  कमी होने पर एक  टुकड़ा कपूर और एक चम्मच आजवाइन को कपडे की छोटी पोटली बना लें | उसे १० से 15 बार गहरी सांस के साथ सूंघे | इस क्रिया को प्रत्येक दो घंटे में दोहरायें | ऐसा करने से 24 घंटों में उसके शरीर  का ऑक्सीजन लेवल बढ़ सकता है |

मास्क का उपयोग करना..(एन95) : 

वैसे  तो सभी लोग कहते है कि मास्क लगाना बहुत ज़रूरी है | लेकिन एन95  मास्क संक्रमण से बचाने  के लिए सबसे सुरक्षित मास्क माना जाता है। यह संक्रमण को शरीर में जाने से रोकता है। डॉक्टर भी आमतौर पर इसी मास्क का प्रयोग करते हैं। लेकिन यह मास्क बेहद टाइट होते हैं और इसी वजह से इन्हें लंबे समय तक पहने रहना संभव नहीं होता है।

अगर हाथ साफ नहीं है तो आंख और मुंह को छुने से बचें :

यदि आपने अनचाहे स्थानों और लोगों से हाथ मिलाया है या आप किसी तरह उनके संपर्क में आए हैं तो कोशिश करें कि अपने मुंह पर हाथ न लगाएं । यदि आप मुंह, आंख, कान, नाक आदि पर हाथ लगाएंगे और आपके हाथ में कीटाणु मौजूद हैं तो वो आपकी नाक द्वारा सांसों में चला चले जाएगा और आप को मुश्किल में डाल सकता है । इसलिए ध्यान रहे कि जब भी कहीं बाहर से लौटें तो फौरन किसी साबुन, हैंड वॉश और सैनिटाइज़र से हाथ धोएं ।

क्या मुझे कोविड वैक्सीन लेनी चाहिए ?

दोस्तों, मास्क लगाना, हाथ sanitize करना और सोशल distancing के बाद अब कोविद वैक्सीन यह चौथा प्रोटेक्टिव उपाय  माना  जा रहा है |

हालांकि कहीं भी कोविड वैक्सीन लगवाना अनिवार्य नहीं किया गया है. लेकिन ज़्यादातर लोगों को यह सलाह दी जाती है कि वो वैक्सीन लगवायें | .

हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे लोगों के मामले में यहाँ अपवाद हो सकता है |

अभी हमारे यहाँ दो तरह के वैक्सीन उपलब्ध है – कोविशील्ड और कोवैक्सीन | .

सीडीसी का कहना है कि वैक्सीन ना सिर्फ़ कोविड-19 से सुरक्षा देती है, बल्कि दूसरों को भी सुरक्षित करती है.|

 इसके अलावा सीडीसी के द्वारा  टीकाकरण को महामारी से बाहर निकलने का सबसे महत्वपूर्ण ज़रिया बताया जा रहा है |.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि संक्रमण को रोकने के लिए कम से कम 65-70 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन लगानी होगी, जिसका मतलब है कि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को टीका लगवाने के लिए प्रेरित करना होगा |

मैंने भी कोवैक्सीन का पहला डोज़ लिया है | आप ने अब तक लिया है कि नहीं…

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यक्ष प्रश्न

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कोरोना महामारी का प्रकोप फिर तेज़ी से हमारे देश में फ़ैल रहा है | अतः फिर से लॉक डाउन लगाए जाने की  संभावनाए बढ़ रही है | आने वाले वक़्त में  लॉक डाउन लगेगा या नहीं यह आज हमारे सामने  ‘यक्ष प्रश्न’ की तरह है | 

अक्सर हम लोग उन सवालों को ‘यक्ष प्रश्न’ कह देते हैं, जिनका जवाब देना बड़ा मुश्किल होता है |

यक्ष प्रश्न की बात जेहन में आते ही .. महाभारत की वो घटना याद आता है जिसमे यक्ष और युधिष्ठिर के बीच  संवाद हुआ था | उसमे यक्ष ने  युधिस्टर से बड़े ही गूढ़ प्रश्न पूछे थे और युधिस्ठिर ने उन सभी पश्नो का सही और सटीक जबाब देकर यक्ष को प्रसन्न किया था |

उनके  संवाद सुनने  के बाद मुझे अजीब तरह की अनुभूति हुई थी, इसलिए   इस ब्लॉग में महाभारत के इस घटना के बारे में लिखने की प्रबल इच्छा हुई | यह जीवन दर्शन को दर्शाता है |

जिस तरह यक्ष के मन में प्रश्न उभरे थे उसी तरह हम सभी भी  अपने जीवन काल में  कुछ सांसारिक प्रश्नों के उत्तर  ढूंढने में लगे रहते है |

इस संवाद के द्वारा ऐसे ही अध्यात्म, दर्शन और धर्म से जुड़े प्रश्न किये गए है जो हकीकत में हमारी जिंदगी से जुड़े प्रश्न है ।

यक्ष द्वारा पूछे गए प्रश्नों को हम “यक्ष प्रश्न ” के नाम से आज भी याद करते है और युधिष्ठिरः द्वारा दिए गए उत्तर आज के परिवेश और परिस्थितियों में भी बिलकुल खरा  उतरता है | तो आइये आज उन यक्ष प्रश्नों की  हम चर्चा करते है |

यह घटना उस समय की है जब पांडवजन अपने तेरह-वर्षीय वनवास के दौरान वनों में भटक रहे थे | इसी दौरान युधिष्ठिर को प्यास लगी |  वे अपनी  प्यास बुझाने के लिए पानी की तलाश करने लगे | जब आस पास कही पानी नहीं दिखा तब उन्होंने अपने सबसे छोटे भाई

सहदेव को  पानी का प्रबंध करने का जिम्मा सौपा ।

सहदेव पानी की तलाश में भटकते  हुए एक जलाशय के पास पहुँचे | वे  जलाशय से जल लेने का प्रयास कर ही रहे थे,  तभी  जलाशय के स्वामी अदृश्य यक्ष ने आकाशवाणी  द्वारा उन्हें रोकते हुए पहले कुछ प्रश्नों के  उत्तर देने की शर्त रखी।

 सहदेव यक्ष  और उनके शर्तों को अनदेखा कर जलाशाय से पानी लेने लगे । तब यक्ष ने उसकी शर्त न मानने पर क्रोधित हो कर सहदेव को निर्जीव कर दिया ।

सहदेव के न लौटने पर क्रमशः नकुल, अर्जुन और फिर भीम ने बारी बारी से पानी लाने की जिम्मेदारी उठाई । वे भी उसी जलाशय पर पहुंचे और यक्ष की शर्तों की अवज्ञा की | फलस्वरूप उन सबो का भी वही हश्र हुआ और यक्ष के द्वारा सभी को एक एक कर निर्जीव कर दिया गया |

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अंत में चिंतातुर युधिष्ठिर स्वयं अपने भाइयों की खोज करने निकल पड़े और वे भी उस जलाशय के समीप पहुंचे ।  उन्हें प्यास लगी थी इसलिए वे भी पानी पीने  के उद्देश्य से जलाशय के नजदीक गए | वहाँ वे अपने सभी भाइयों को मूर्छित पाकर आश्चर्य चकित हो गए. |

तभी अदृश्य यक्ष उनके सामने प्रकट हुआ और  उनसे आगाह किया कि अगर वे उसके प्रश्नों के उत्तर नहीं देंगे तो उनकी भी हालत अपने भाइयों जैसी हो जाएगी |

युधिष्ठिर शांत चित व्यक्ति थे इसलिए उन्होंने धैर्य दिखाया  और यक्ष से प्रश्न पूछने को कहा |

उन्होंने न केवल यक्ष के सभी प्रश्न ध्यानपूर्वक सुने अपितु उनका तर्कपूर्ण उत्तर भी दिया जिसे सुनकर यक्ष संतुष्ट हो गया।

यक्ष के द्वारा पूछे गए वो प्रश्न क्या थे और संतुष्ट होने के बाद यक्ष ने क्या किया ..आइये आगे जानते है ..

#1 . यक्ष : पृथ्वी से भी भारी क्या है? आकाश से भी ऊंचा क्या है?

युधिष्ठिर : माता पृथ्वी से भी भारी है. पिता आकाश से भी ऊंचा है.


#2. यक्ष: हवा से भी तेज चलने वाला क्या है? तिनकों से भी ज्यादा असंख्य क्या है?

युधिष्ठिर: मन हवा से भी तेज चलने वाला है. चिंता तिनकों से भी ज्यादा असंख्य होती है.

#3 यक्ष: रोगी का मित्र कौन है? मृत्यु के समीप व्यक्ति का मित्र कौन है?

युधिष्ठिर : वैद्य रोगी का मित्र है. मृत्यु के समीप व्यक्ति का मित्र है दान.


#4 यक्ष : यश का मुख्य स्थान क्या है? सुख का मुख्य स्थान क्या है?

युधिष्ठिर : यश का मुख्य स्थान दान है. सुख का मुख्य स्थान शील है.


#5 यक्ष : धन्य पुरुषों में उत्तम गुण क्या है? मनुष्य का परम आश्रय क्या है?

युधिष्ठिर : धन्य पुरुषों में उत्तम गुण है कार्य-कुशलता. दान मनुष्य का परम आश्रय है.

#6 यक्ष : लाभों में प्रधान लाभ क्या है? सुखों में उत्तम सुख क्या है?

युधिष्ठिर : निरोगी काया सबसे प्रधान लाभ है. सबसे उत्तम सुख है संतोष.

#7 यक्ष: दुनिया में श्रेष्ठ धर्म क्या है? किसको वश में रखने से मनुष्य शोक नहीं करते?

युधिष्ठिर : दया दुनिया में श्रेष्ठ धर्म है. मन को वश में रखने से मनुष्य शोक नहीं करते.

#8 यक्ष: किस वस्तु को त्यागकर मनुष्य दूसरों को प्रिय होता है? किसको त्यागकर शोक नहीं होता?

युधिष्ठिर: अहंकार को त्यागकर मनुष्य सभी को प्रिय होता है. क्रोध को त्यागकर शोक नहीं करता.

#9 यक्ष: किस वस्तु को त्यागकर मनुष्य धनी होता है? किसको त्यागकर सुखी होता है?

युधिष्ठिर : काम-वासना  को त्यागकर मनुष्य धनी होता है. लालच को त्यागकर वह सुखी होता है.

#10 यक्ष: मनुष्य मित्रों को किसलिए त्याग देता है? किनके साथ की हुई मित्रता नष्ट नहीं होती?

युधिष्ठिर : लालच के कारण मनुष्य मित्रों को त्याग देता है. सच्चे लोगों से की हुई मित्रता कभी नष्ट नहीं होती.

#11 यक्ष : दिशा क्या है? जो बहुत से मित्र बना लेता है, उसे क्या लाभ होता है?

युधिष्ठिर : सत्पुरुष दिशाएं हैं. जो बहुत से मित्र बना लेता है, वह सुख से रहता है.

#12 यक्ष : उत्तम दया किसका नाम है? सरलता क्या है?

युधिष्ठिर : सबके सुख की इच्छा रखना ही उत्तम दया है. सुख-दुःख में मन का एक जैसा रहना ही सरलता है.

#13 यक्ष : मनुष्यों का दुर्जय शत्रु कौन है? सबसे बड़ी बीमारी क्या है?

युधिष्ठिर : क्रोध ऐसा शत्रु है, जिस पर विजय पाना मुश्किल होता है. लालच सबसे बड़ी बीमारी है.

#14 यक्ष : साधु कौन माना जाता है? असाधु किसे कहते हैं ?

युधिष्ठिर: जो समस्त प्राणियों का हित करने वाला हो, वही साधु है. निर्दयी पुरुष को ही असाधु माना गया है.

#15 यक्ष : धैर्य क्या कहलाता है? परम स्नान किसे कहते हैं?

युधिष्ठिर: इंद्रियों को वश में रखना धैर्य है. मन के मैल को साफ करना परम स्नान है.

#16 यक्ष : अभिमान किसे कहते हैं? कौन-सी चीज परम दैवीय है?

युधिष्ठिर: धर्म का ध्वज उठाने वाले को अभिमानी कहते हैं. दान का फल परम दैवीय है.

#17 यक्ष: मधुर वचन बोलने वाले को क्या मिलता है? सोच-विचारकर काम करने वाला क्या पाता है?

युधिष्ठिर : मधुर वचन बोलने वाला सबको प्रिय होता है? सोच-विचारकर काम करने से काम में जीत हासिल होती है.

#18 यक्ष: सुखी कौन है?

युधिष्ठिर: जिस व्यक्ति पर कोई कर्ज नहीं है, जो दूसरे प्रदेश में नहीं है, जो व्यक्ति पांचवें-छठे दिन भी घर में रहकर साग-सब्जी खा लेता है, वही सुखी है |.

#19 यक्ष : आश्चर्य क्या है ?

युधिष्ठिर : हर रोज संसार से प्राणी यमलोक जाते हैं. लेकिन जो बचे हुए हैं, वे सर्वदा जीने की इच्छा करते रहते हैं. इससे बड़ा आश्चर्य और क्या होगा ?

#20 यक्ष : सबसे बड़ा धनी कौन है ?

युधिष्ठिर : जो मनुष्य प्रिय-अप्रिय,  सुख-दुःख, अतीत– भविष्य में एक समान रहता है, वही सबसे बड़ा धनी है |.

आखिरकार युधिष्ठिर ने सारे प्रश्नों के सही उत्तर दिए, जिसे पाकर यक्ष प्रसन्न हो गया |

 फिर यक्ष ने उनके बोला…, ‘युधिष्ठिर, ममैं  तुम्हारे एक भाई को जीवित करूंगा । तुम बताओ कि तुम इनमे किसे जीवित देखना चाहते हो ?

तब युधिष्ठिर ने अपने छोटे भाई नकुल को जिंदा करने के लिए कहा।

उनकी बात सुन कर यक्ष हैरान होकर पूछा …. तुमने भीम और अर्जुन जैसे वीरों को जिंदा करने के बारे में क्यों नहीं सोचा।’

इस पर युधिष्ठिर बोले…., मनुष्य की रक्षा धर्म से होती है ।

मेरे पिता की दो पत्नियां थीं । कुंती का एक पुत्र मैं तो बचा हूँ और  मैं चाहता हूं कि माता माद्री का भी एक पुत्र जीवित रहे ।

यक्ष उत्तर सुनकर काफी प्रसन्न हुए और उनके सभी भाइयों की जीवित कर दिया |

अंत में उन सभी भाइयों को लम्बी आयु और मंगलमय भविष्य की शुभकामना देते हुए अपने धाम लौट गए।

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स्वस्थ रहना ज़रूरी है ..11

ईश्वर ने हमें धरती पर एक खाली चेक की तरह भेजा है,
गुणों और योग्यताओं के आधार पर हमें स्वयं अपनी कीमत उसमें भरनी होती है।

काढ़ा का प्रयोग

दोस्तों,

मैंने चार दिनों पूर्व कोरोना का वैक्सीन लिया था | मैंने पूरी तरह अपने को observation में रखा हुआ था | दुसरे दिन बांह में थोडा दर्द था और  हल्का बुखार जैसा लग रहा था | लेकिन अब मैं बिलकुल ठीक हूँ |

हालाँकि  अभी भी मैं कोरोना से बहुत डर  रहा हूँ  | इस डर के कुछ वाजिब कारण भी है |

पुरे देश में आजकल कोरोना फिर से अपनी रफ़्तार पकड़ चूका है | रोज़ के आने वाले आंकड़े बेहद  डराने वाले है | सिर्फ कल का ही आकड़ा १.oo लाख के पार हो गया | .

अगर यही रफ़्तार रहा तो आगे क्या होगा , कहना बहुत ही मुश्किल है |

दूसरी वजह  यह है कि  हमारे अपार्टमेंट में ही एक बुजुर्ग दम्पति ने 15 दिनों  पूर्व कोरोना का  वैक्सीन लिया था |  इसके बाबजूद वे कोरोना से संक्रमित हो गए | इतना ही नहीं, उनके घर के सभी आठों  सदस्य भी  एक साथ कोरोना की  चपेट में आ गए  | मेरे मन में  सवाल उठाना वाजिब है कि वैक्सीन लेने का फायदा क्या हुआ ?

मैंने सुना है कि वैक्सीन का पहला डोज़ लेते ही शरीर  में एंटी बॉडी बनना शुरू हो जाता है | जब हमारे शरीर में एंटी बॉडी बन रहा होता है तो उन दौरान हमारी इम्युनिटी बहुत कम हो जाती है |

दूसरा डोज़ लेने के बाद तो इम्युनिटी और भी कम हो जाती है |

उसी समय सबसे ज्यादा  सावधानी बरतने की ज़रुरत होती  है | हालाँकि दूसरा डोज़  लेने के 15 दिनों के बाद फिर इम्युनिटी में इजाफा हो जाता है | और आदमी कोरोना से बहुत हद तक सुरक्षित हो जाता है. |

फिर भी  इस डेढ़ महीने के दौरान इम्युनिटी कम होने के कारण हम कोरोना की चपेट में न आयें…..  इसके लिए कुछ सावधानियां बहुत ही आवश्यक है ….

  •  पहले डोज़ के डेढ़ माह तक अपने को सुरक्षित रहना बहुत ज़रूरी है | घर से बाहर अगर बहुत  ज़रूरी हो तभी जाना चाहिए |
  • मास्क का प्रयोग नितांत आवश्यक है और  sanitizer  का प्रयोग निर्देशानुसार करते रहना चाहिए |
  • एक दूसरे से निश्चित दूरी बनाये , भीड़ वाली जगह से बचे, .लापरवाही बिलकुल न बरते |
  • गरम पानी पीना और भाप लेते रहना चाहिए |
  • उपवास न करें ,  कोई भी खाली पेट न रहे |
  • रोज एक घंटा धूप लें , AC का प्रयोग न करें |
  • सरसों का तेल नाक में लगाएं , घर में कपूर वह गूगल जलाएं |
  • रात को एक कप दुध में हल्दी डालकर पिये ,  हो सके तो एक चम्मच चवनप्राश खाएं |
  • फलों में संतरा ज्यादा से ज्यादा खाएं और आंवला किसी भी रुप में चाहे अचार, मुरब्बा,
    या चूर्ण इत्यादि खाएं ।
  • बाहर से घर आते ही कपडे अलग कर गरम पानी से स्नान करना चाहिए. |
  • इस समय का कोरोना (अफ्रीकन स्ट्रेन) पुरे परिवार को एक  साथ चपेट में लेता है |
  • इसके अलावा सुबह उठ कर गर्म पानी और निम्बू का प्रयोग करना चाहिए |
  • और सबसे ज़रूरी इन सबो के अलावा देशी और घतेलु इलाज़ भी काफी कारगर साबित हो सकता है |

देशी इलाज़ में काढ़ा का उपयोग के बारे में यहं हम चर्चा कर रहे है …

कोरोना महामारी के इस दौर में हमें अपनी इम्यूनिटी मजबूत बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। शुरुआत से ही यह बात कही जा रही है कि कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को कोरोना आसानी से अपनी चपेट में ले सकता है।

ऐसे में इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए देश के ज्यादातर घरों में जिस एक चीज का सेवन बढ़ा है, वह है आयुर्वेदिक काढ़ा

source: Google.com

कोरोना संक्रमण से बचने के लिए जरूरी उपायों में काढ़ा पीना भी हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। हालांकि पिछले कुछ महीनों से ऐसा भी लगातार सुनने को मिल रहा है कि काढ़ा का ज्यादा सेवन हानिकारक हो सकता है।  ज्यादा काढ़ा पीने से खासतौर से लिवर को नुकसान पहुंच सकता है।

हालाँकि काढ़ा पीने की सलाह देने वाले आयुष मंत्रालय ने ऐसे सवालों पर विराम लगाया है। आइए जानते हैं इस पर आयुष मंत्रालय का क्या कहना है :

आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि काढ़ा पीने से शरीर को नुकसान नहीं होता है। मंत्रालय की ओर से यह बताया गया है कि काढ़ा पीने से शरीर स्वस्थ और निरोग बनता है। काढ़ा का सेवन ताउम्र भी किया जा सकता है।

अगर किसी व्यक्ति को काढ़ा का सेवन करने से नुकसान हो भी रहा है तो हो सकता है कि उसे पहले से लिवर की समस्या हो। काढ़ा से नुकसान इस बात पर भी निर्भर करता है कि काढ़ा किन चीजों से और कितनी मात्रा में लेकर बनाया जा रहा है। 

कोरोना से बचाव करने में भूमिका

आयुष मंत्रालय ने कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए इम्यूनिटी बढ़ाने को लेकर काढ़ा पीने, हल्दी युक्त दूध पीने, , च्यवणप्राश का सेवन करने आदि उपाय करने का सुझाव दिया था।

आयुर्वेद के अनुसार काढ़ा में इस्तेमाल होने वाले मसाले,  औषधि की तरह होते हैं, जो प्रकृति द्वारा स्वस्थ शरीर के लिए दी गई अमूल्य विरासत हैं।

आयुष मंत्रालय की ओर से तुलसी, काली मिर्च, दालचीनी, अदरक और किशमिश का उपयोग कर काढ़ा तैयार करने की सलाह दी गई थी।

 साथ ही काढ़ा का सेवन दिन में दो बार करने के लिए कहा गया है।

नियमानुसार काढ़ा का सेवन करें ताकि आपका शरीर निरोग रहे और कोरोना वायरस संक्रमण से बचे रहें।

काढ़ा में इस्तेमाल की गई सामग्री प्राकृतिक हैं और भारतीय समाज में भोजन बनाने में इनका उपयोग नियमित तौर पर होता रहा है।

मालूम हो कि कोरोना वायरस हमारी श्वसन प्रणाली पर ही सबसे पहले हमला करता है और काढ़ा के सेवन से हमारा श्वसन तंत्र भी मजबूत होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। 

घर पर बना सकते हैं काढ़ा 

तुलसी की चार पत्तियां लें, एक लौंग,  थोड़ी दालचीनी और 5-10 ग्राम अदरक, सभी को  एक साथ कूट  लें। 

अब डेढ़ कप कप पानी में इसे उबालें और जब यह एक कप रह जाए तो उसमें शहद डालकर पी सकते हैं। 

डायबिटीज पीड़ित लोग चीनी या शहद न मिलाएं। मंत्रालय की वेबसाइट पर और भी विस्तार से जानकारी दी गई है

इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए क्या करें

  • चिकित्सकों का कहना है कि इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए फल और दूध का नियमित  सेवन करना भी सही तरीका है।
  • काढ़े का संयमित इस्तेमाल करें ।अपने दिनचर्या में योग और व्यायाम को शामिल करते हुए संयमित भोजन लेना चाहिए। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाएगी और इसका शरीर पर कोई नकारात्मक प्रभाव भी नहीं पड़ता है। 
  • काढ़ा अगर ले रहे हैं, तो चाय की तरह एक से दो बार सेवन करना काफी होगा। 

दवाएं न छोड़ें डायबिटीज, ब्लडप्रेशर के मरीज

डॉ. सिंह ने कहा कि अगर कोई ब्लडप्रेशर और डायबिटीज के मरीज हैं तो दवाएं किसी भी हाल में बंद न करें। डॉक्टर से पूछे बिना किसी तरह का कदम उठाना नुकसानदायक हो सकता है। उन्होंने कहा कि हार्ट के मरीजों को भी डॉक्टर से संपर्क में रहना चाहिए।

यह सत्य है दोस्तों, कि कोरोना का दूसरा wave पहले  से ज्यादा खतरनाक और तेज़ है | अतः हमें और ज्यादा सतर्कता बरतने की ज़रुरत है |

हमने कोरोना बीमारी के पहले दौर का मुकबला अब तक सफलता पूर्वक किया है | अब तो  हमारे पास इस कोरोना  बीमारी से लड़ने के लिए बहुत सारी जानकारियाँ और पर्याप्त अनुभव भी है |….

अतः हम सब मिल कर इस कोरोना के दुसरे wave का भी मुकाबला सफलता पूर्वक करेंगे और अंत में जीत हमारी होगी …..

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सागर किनारे एक शाम

कभी कभी हमारे जीवन में ऐसे पल भी आते है जब हम टुकडो में जी रहे होते है, दिशाहीन और बिना लक्ष्य की  ज़िन्दगी | ऐसा लगता है कि खुद के ऊपर कोई नियंत्रण ही नहीं है | हमारे अन्दर नकारात्मक विचारों का समावेश हो चूका है |

जिसे कभी हम बहुत प्यार करते थे उसकी सूरत से भी नफरत हो जाती है | अचानक जिंदगी गहरी खाई में डूबती नज़र आती है |

एक समय मैं भी ऐसी ही मनःस्थिति से गुज़र रहा था, तभी मुझे  puri sea beach पर जाने का मौका मिला |

दरअसल उन दिनों मेरी पोस्टिंग Cuttack  शाखा में थी और ब्रांच की ऑडिट करने हेतु ऑडिटर साहब आये हुए थे | मैं व्यक्तिगत समस्याओं से परेशान रहने के बाबजूद , किसी तरह उनको भी झेल रहा था |

शाखा में आये हुए ऑडिटर हमारे मेहमान होते है इसलिए उनके हर इच्छा का ख्याल रखना होता था |

मैं  मानसिक रूप से परेशानी से गुज़र रहा था | शायद ऑडिटर साहब को भी मेरे चेहरे की  परेशानी दिख गयी  थी |

ऑडिट का काम करीब करीब समाप्त हो चूका था तभी उन्होंने  पूरी मंदिर (जगन्नाथ दर्शन) देखने की इच्छा प्रकट की | उनको मना  करने का तो सवाल ही नहीं था और फिर  मैं भी थोडा मन को relax देने के ख्याल से उनके साथ जाने को तैयार हो गया .|

उनको शाखा में ही लंच कराया और फिर हमलोग पूरी दर्शन के लिए रवाना हो गए | उनके पास  24 घंटे थे जिसे वे अपने मन के अनुसार खर्च कर सकते थे |

मैंने वहाँ पहुँच कर एक होटल में चेक इन किया | शाम का वक़्त था और  मौसम भी सुहाना था | ना ज्यादा गर्मी और ना ज्यादा ठंडी,  बहुत  सुकून देने वाला मौसम था |

ऑडिटर साहब नहा धोकर फ्रेश हो लिए थे | मैं जब उनके रूम में पहुँचा तो उन्होंने बियर पिने की इच्छा जताई | मुझे उनके कहे अनुसार इंतज़ाम करना पड़ा |

 लेकिन उनकी पार्टी में मैं शरीक नहीं हुआ | वैसे लोग कहते है कि दारु पिने से मानसिक तनाव कम हो जाती है , लेकिन गुरुवार दिन होने के कारण  मुझे यह सब वर्जित था | इसलिए उनको खुद से एन्जॉय करने के लिए उनके कमरे में छोड़ दिया और मैं होटल से बाहर निकला |

सामने ही sea beach था | मैं  sea beach की ओर चल पड़ा | वहाँ रेत  पर बैठते ही मुझमे एक  नयी उर्जा का संचार हुआ  | मैं कुछ समय के लिए भूल गया कि मैं मानसिक रूप से पर्रेशान हूँ |

वह क्षण मेरे लिए विशेष थे , जगह नया, नज़ारा नया , मूड भी बदला ..ऐसा क्यों..?

  • मैं sea beach के किनारे टहलते हुए डूबता हुए  सूरज को देख रहा था ..ऐसा लग रहा था कि  वह धीरे धीरे  समुद्र के आगोश में समां रहा हो  …उसे देखते हुए मेरे मन को बहुत शांति मिल रही थी…..अब मैं खुद को अच्छा महसूस कर रहा था |  मैं उस समुद्र के किनारे  रेत  पर बैठ कर डूबते सूरज की लालिमा की परछाईं जो पानी में उभर रही थी, उसको एक टक  निहारता रहा |
  • मेरे कानो में समुद्र की उठती लहरों की आवाज़ आ रही थी,  मानो जल तरंग बज रहे हो | मैं वही समुद्र के किनारे रेत पर बैठ कर आँखें बंद किये बस सुनता रहा | कभी कभी उन लहरों से छटक कर पानी की कुछ बूंदें मेरे चेहरे को भिगों रहे थे |
  • Beach पर चल रही ठंडी हवा की बयार मेरे शरीर से टकरा कर मेरे मन को रोमांचित कर रहे थे…..एक अजीब शांति महसूस करा रही थी| मैं वहाँ बैठ कर आँखे बंद किये ठंडी ठंडी चलती हवाओं को महसूस कर रहा था |
  • अचानक मेरी नज़र एक कलाकार पर पड़ी…वह पास ही रेत  की सहायता से अपने कारीगरी में खोया हुआ था | कुछ लोग उसके आस पास खड़े थे |और रेत से बनने वाले सुन्दर आकृति को देख कर  उसके तारीफ के पुल बाँध रहे थे | ,,लेकिन वह इन सब बातों से बेखबर अपने हुनर को प्रस्तुत करने में एकाग्रचित था | ऐसा लगा जैसे उसकी एक अलग ही दुनिया हो | वह साधारण सा दिखने वाला इंसान, गजब की कारीगरी का नमूना प्रस्तुत  कर रहा था |
  • थोड़ी देर के बाद, मैंने देखा कि कुछ दूर पर बैठा एक व्यक्ति अपनी आँखे बंद किये योगा और ध्यान कर रहा है |  उसे देख कर मेरी भी इच्छा हुई कि मन को  शांत करने के लिए योगा करूँ और ध्यान लगाऊं. |.मैं वही रेत पर बैठ कर खुले आसमान के नीचे  योग और ध्यान में आधे घंटे का समय बिताया |

     शुरू में तो  मैं आराम करने का नाटक कर रहा था लेकिन बाद में मुझे वास्तव में बहुत आराम महसूस होने लगा | मेरा  मन प्रसन्नचित हो गया  | सचमुच यह जगह मुझे inspire कर रही थी  | सागर की लहरों में बहुत शक्ति होती है, जो हमारे  सारे दुःख तकलीफों को थोड़ी देर के लिए ही सही, आप से ले लेती है और फिर यह गीत गुनगुनाती है …..

नदिया चले चले रे धारा  

चंदा चले चले रे तारा

तुझको चलना होगा ..तुझको चलना होगा

  • तभी एक नारियल पानी वाला कुछ आवाजे लगता पास से गुजर रहा था | मैं उसे रोक कर नारियल पानी का आनंद लिया  और अपनी इस हसीन शाम को यादगार बना रहा था  |

समुद्र तट पर आये लोगों के चेहरे पर ख़ुशी और उत्साह देख कर अच्छा लग रहा था | सब लोग मिलकर मस्ती कर रहे थे और उनको देख कर मुझे भी जोश आ गया |

मैं वहाँ पर चल रहे वाटर बोट  पर बैठ कर समुद्री सैर का मजा लेने लगा | अब मेरा मन बिलकुल बदल चूका था और मैं भी जोश से भर गया था |

वहाँ पर घूम रहे एक फोटो ग्राफर को बुलाया और अपनी तस्वीर खींचने को कहा | मैं बहुत मस्ती करने के मूड में था लेकिन तभी ऑडिटर साहब का फ़ोन आ गया और मुझे ना चाहते हुए भी उस जगह से जाना पड़ा | इस तरह सागर किनारे की एक शाम को कैमरे में कैद कर वापस होटल आ गया |

आगे की कहानी अब क्या बताऊँ दोस्तों… ..ऑडिटर साहब ने अपनी कसम दे दी |  डिनर के पहले फिर दारु का दौड़ शुरू हुआ और इस बार मुझे भी शामिल होना पड़ा |

जब पीने लगा तो उनके निर्देश का पालन करना पड़ा ..नतीजा यह हुआ कि मैं अपने रूम में आते ही मुझे wash रूम में जाना  पड़ा | और फिर इतनी उल्टियाँ हुई कि मुझे होश ही नहीं रहा कि कब मेरी आँख लग गयी…

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तुम मेरी कविता हो..

पीछे  मुड कर देखता हूँ तो अभी कुछ दिनों की बात लगती है,…ज़िन्दगी यूँ ही धीमी गति से चली जा रही थी कि अचानक से मेरे बचपन के शौक ने मेरे मन में उथल पुथल मचाया था  और तभी कुछ शब्दों के जाल मैं ने बुने ..और इस तरह से  एक कविता का जन्म हुआ |

मैं कुछ घबराते हुए और कुछ सकुचाते हुए अपने एक खास  दोस्त को सुनाया था  |

उसने मेरी कविता की तारीफ की और मेरा हौसला बढाया था | फिर तो मेरे हौसले बुलंद हुए और मेरी  कविता लिखने की शुरुआत हुई |

अब तो आलम यह है कि कविता मेरी ज़िन्दगी का हिस्सा बन चुकी है | हर चीज़ में बस अपनी कविता को ढूंढता रहता हूँ . .क्योकि अब यह मेरा सच्चा दोस्त है,  मेरी तन्हाई का साथी है और मेरी  संवेदना भी |

इसके बहुत से आयामों को मैं जीता हूँ…. मेरी कविता  कभी संजीदा हो मेरी आँखों को भिगोता है तो कभी चुलबुली बन होठों पे मुस्कुराता है ..सच तू मेरी कविता ही तो है…|

रिश्तो का एहसास

इस अँधेरी रात में कलम थामे हाथ में

कागज़ पर स्याही बिखरने को बेचैन है…

लिखूँ तो क्या लिखूँ ..मैं शब्दों का बाजीगर नहीं

जुबान तो खामोश है .. आँसू से भींगे नयन है

सवाल सिर्फ रिश्तों के सिमटने का नहीं है

सवाल तो अपने ज़ख्मों के रिसने का भी है…

ताउम्र रहे बेखबर वे अपनी नादानियों से

सवाल उनके दिए दर्दों के टीसने का भी है..

इसी कशमकश में सोचता हूँ रात गुज़र जाने दूँ 

वो आये ना आये उनके ख्वाबों को आने दूँ ..

तिनका तिनका जोड़कर जो घोसला बनाया था हमने

हवा के झोकों से कैसे उन्हें बिखर जाने दूँ..

नहीं,  कुछ तो करूँगा अपने सपनों को बचाने के लिए

कोई  चिराग जलाऊंगा , अंधेरों  को भगाने के लिए ..

और फिर जब भोर की पहली किरण फूटेगी

रेशमी स्पर्श आएगा  मुझे जगाने के लिए ..

और प्यार का एहसास फिर लौट आएगा

अपने रिश्तों का मिठास फिर लौट आएगा ..

सब कुछ होगा पहले की तरह सुन्दर और रंगीन

उनके वादों पे एतबार फिर से लौट आएगा ||

                        …विजय वर्मा.

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एक कहानी सुनो

समय का सदुपयोग

वक़्त नहीं रहता कहीं टिक कर

इसकी आदत भी आदमी सी है..

आज की कहानी एक राजा और उसके राज्य की है |

उस राज्य की प्रजा  राजा  का चुनाव पाँच  साल के लिए करते थे और फिर पाँच  साल पूरा होने के बाद  उस राजा के लिए नियम था कि उसे ऐसी जगह पर ले जा कर छोड़ दिया जाता था जहाँ जीवन के जरूरत की कोई भी चीज़ उप्ताब्ध नहीं थी |

ना खाने पीने की कोई चीज़ थी  और ना कोई आस पास रहता था | वहाँ सिर्फ जंगल और जंगली खूंखार जानवर थे |

यही उस राज्य का नियम था | फिर भी महत्वाकांक्षा रखने वाले लोग राजा बनते थे और अंत में उनको उस वीरान जंगल में ले जा कर छोड़ दिया जाता था जहाँ उनकी दर्दनाक  मौत हो जाया करती थी |

एक बार की बात है कि जब वर्तमान राजा ने  पाँच साल राज कर लिए,  यानी उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा कर लिया तो उन्हें वहाँ की प्रजा ने  घोड़े पर बिठाया, और भारी जुलुस निकाला गया |

सभी लोग ढोल नगाड़े बजाते नाचते गाते उस राजा को नदी पार कर उस जगह पर छोड़ कर आ गए , जहाँ सिर्फ जंगल और खूंखार जंगली जानवर थे |

उस राजा का भी वही  हश्र  हुआ जो  अन्य राजाओं का हुआ करता  था | उस जंगल के खूंखार जानवर राजा जी को चिर फाड़  डाला और उनकी मौत हो गयी |

प्रजा के द्वारा  तब उस राजा की  लाश  उस जंगले से लाया गया और उनका अंतिम संस्कार किया गया |

शायद वहाँ के प्रजा का यह विश्वास था कि ऐसा करने के राज्य में खुशहाली बनी रहेगी |

अब  राज्य के नए राजा को  बनाने की कवायद शुरू हो गयी | उस राजा का  हश्र देख कर और प्रजा द्वारा बनाए गए इस कठोर नियम के कारण कोई भी राजा बनने को तैयार नहीं हो रहा था |

तभी उस राज्य में एक बहुत ही बुद्धिमान और होशियार आदमी के बारे में पता चला …जिसे वहाँ की प्रजा उसे राजा बनाना चाहती थी |

उन लोगों ने उस बुद्धिमान व्यक्ति के पास जाकर उसकी  खूब मान मनौवल की  |

वो बुद्धिमान व्यक्ति कुछ सोच कर राज्य के नियम के तहत राजा बनने को तैयार हो गया | लेकिन उसने एक शर्त रखी  कि पहले मुझे वह जगह देखनी है जहाँ आप लोग पिछले राजा को छोड़  आये थे |

उस बुद्धिमान आदमी  ने नाव से पार कर उस जगह को जाकर देखा तो पाया कि वहाँ घना जंगल है और बहुत सारे जंगली  जानवर भरे पड़े है |

 बहुत सारे नर कंकाल भी मिले जो पिछली राजाओं के थे | फिर भी उसने  राजा  बनने के लिए अपना मन बना लिया और उनलोगों से कहा … मैं राजा बनने के लिए तैयार हूँ |

और पांच साल के बाद उस जगह पर जाने के लिए भी तैयार हूँ |

राजा  बनते ही उसने अपने पाँच  साल की प्लानिंग बनाई और उसी के हिसाब से काम करना शुरू कर दिया |

जिस तेज़ बुद्धि के लिए वह मशहूर था उसी  बुद्धि का इस्तेमाल वह करने लगा |

उसने पहले साल में उस घने जंगल के सारे पेड़ कटवा दिए और वहाँ तक पक्की सड़के बनवा दी ताकि वहाँ आना जाना आसान हो सके |

दुसरे साल में उनसे वहाँ के खूंखार जंगली जानवर को हटवा दिया, जिनके कारण  वहाँ की जगह बहुत खतरनाक हो गयी थी | जंगल कटने से जानवर भी पलायन कर चुके थे |

तीसरे  साल में उस भूमि पर खेती बारी शुरू करवा दिया | वहाँ की मिटटी उपजाऊ तो थी ही,   लोगों को रोज़गार मिलने लगा और  खाने के लिए अन्न भी उपलब्ध होने लगे |

चौथे साल में उसने  नदी पर पुल बनवा दी और वहाँ तक आने जाने के लिए पक्की सड़के भी | इसके आलावा  कुछ मकान  का भी निर्माण कराया,  जहाँ लोग बसने आ गए |

अब उस जगह में ज़रूरत के सभी सामान आराम से उपलब्ध होने लगे और उस जगह की सूरत ही बदल चुकी थी |  अब वह जगह खूंखार जंगल के बजाये  सुन्दर बस्ती बन गयी | देखते देखते राजकोष में भी वहाँ से टैक्स के रूप में काफी रकम आने लगी |

अब पांचवे वर्ष में राजा  ने अपने प्रजा की सभा बुलाई | राजा  ने सभा में उपस्थित अपने प्रजा से कहा..  हमें अब उस जगह पर भेज दीजिये जहाँ अन्य राजाओं को भेजा है |

प्रजा ने राजा की बात सुनकर कहा… हे राजन, अभी तो आपके पाँच  साल पुरे भी नहीं हुए और अभी से वहाँ जाने की बात कर रहे है |

लेकिन राजा को उन जगह जाने की  उत्सुकता थी, एक जोश था | वह वहाँ जाकर देखना चाहता था कि उसकी प्लानिंग कितनी कारगर साबित हो सकी है |

इस तरह पाँच  साल का कार्यकाल जैसे ही उस राजा ने पूरा किया,  प्रजा उनके पास पहुँच गयी और उनसे कहा …. हे राजन, आज आप का जाने का समय आ गया है |

पहले का अनुभव बताता था कि राजा पाँच  साल तक ठाठ से मजे करते थे और अंतिम विदाई के वक़्त राजा के चेहरे पर डर और घबराहट को देख कर प्रजा को बहुत मजा आता था और इस बार भी मजा लेने के लिए वे लोग एकत्रित हुए |  ढोल- बाजे के साथ जुलुस निकाला गया |

लेकिन यहाँ क्या ? … अन्य राजा की तरह उनके चेहरे पर ना भय था ना दुःख और ना चिंता … राजा तो बहुत खुश नज़र आ रहे थे |

 प्रजा आश्चर्य से राजा से पूछा … आप खुश कैसे नज़र आ रहे हो ?, जबकि आपको पता है कि आप को जंगल में खूंखार  जानवरों के बीच  भेजा जा रहा है |

इस पर राजा  ने जबाब दिया …  मैंने पाँच  साल सिर्फ  ऐश मौज  नहीं किया बल्कि  उन पाँच सालों में आगे की ज़िन्दगी की  तैयारी की है |  मैंने पांच सालों में वे काम किये है जिससे आने वाला समय सुखमय हो सके |

यह सच है दोस्तों कि आज हम अपने वर्तमान के  समय का सदुपयोग किस तरह से करते है  उसी पर हमारा भविष्य निर्भर करता है |  …अगर हम वर्तमान समय  को मौज मस्ती में गवां देते है तो अंत समय में पछ्ताने और अफ़सोस करने के सिवा कुछ भी नहीं बचता है  |

अतः हम अभी के समय को उपयोग कैसे करते है  उसी के अनुसार यह  तय होता है कि हमारे   भविष्य  में जंगल होगा  या फिर जंगल में मंगल |

आइये हम वर्तमान समय को संभाल कर अच्छी तरह उपयोग करे | एक लक्ष्य बना कर अच्छी  प्लानिंग से आगे बढे ताकि आने वाला  हमारा कल  सुखमय हो  |

(pic source :Google.com)

 समय की अहमियत भला अखबार से ज्यादा कौन समझ सकता है

सुबह सुबह जो चाय के साथ प्रस्तुत था शाम तक रद्दी बन जाता है..

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स्वस्थ रहना ज़रूरी है ..10

आंवला अमृत समान

हेल्लो फ्रेंड्स..

आज कल  मैं अपना इम्युनिटी  बढाने के लिए रोज़ एक घंटा पार्क में जाकर मॉर्निंग वाक (morning walk) करने लगा हूँ |

लेकिन इन दिनों मैंने एक अच्छी बात नोटिस किया |  पार्क के मेन गेट पर एक ठेला लगता है जो वीट ग्रास (wheat grass) जूस , आंवला जूस, करेला जूस इत्यादि बिलकुल ताज़ा  निकाल कर पिलाता है | मात्र २० रूपये ग्लास में आप कोई भी जूस का सेवन कर सकते है |

मैं भी रोज़ आंवला जूस का सेवन सुबह सुबह करता हूँ | मैंने सुना है कि आंवला का सेवन सुबह खाली पेट करना काफी फायदेमंद होता है. |

लोगों का कहना है कि रोजाना सुबह एक से दो  आंवला  खा सकते हैं |  हालाँकि दिन में दो आंवले से ज्यादा न खाएं. क्योंकि इसमें भरपूर्ण मात्रा में मौजूद विटामिन – सी कब्ज की समस्या पैदा कर सकता है |.

लोग यहाँ तक कहते है कि आंवला जूस का सेवन सुबह खाली पेट करने से अमृत सामान फल देता है | जब इसके बारे में जानकारी इकट्ठी की तो मैं आंवला के फायदे के बारे में जान कर हैरान रह गया |

इसलिए मैंने सोचा कि क्यों न आंवला के फायदे के बारे में जानकारी शेयर किया जाए |

सर्दियों में आवंला खाने के काफी फायदे होते हैं. विटामिन-सी से भरपूर आंवला, आंखों, बालों और त्वचा के लिए फायदेमंद होता है. आयुर्वेद में इसे कई बीमारियों के लिए रामबाण भी कहा गया है.

आंवले को विटामिन सी का एक समृद्ध स्रोत माना जाता है. इसमें पॉलीफेनोल जैसे यौगिकों से भरपूर, लौह और जस्ता जैसे खनिज, कैरोटीन और विटामिन बी कॉम्प्लेक्स जैसे विटामिन निश्चित रूप से कई बीमारियों को दूर रख सकते हैं.|

 इसमें कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो हमारी इम्यूनिटी को बढ़ाने और फेफड़ों को वायु प्रदूषण से बचाने में भी  मदद करता है.|

कैंसर से करता है बचाव

आंवला में एंटीऑक्सीडेंट गुणों की मात्रा भरपूर होती है,जो कैंसर जैसी घातक बीमारियों से बचाव करता है. यह कैंसर का रूप लेने वाली कोशिकाओं को भी प्रभावित करता है. इसके अलावा कैंसर के इलाज में भी आंवला अर्क का इस्तेमाल किया जाता है |.

एसिडिटी में लाभ 

आंवले (Indian gooseberry) के 10 ग्राम बीजों को रात भर जल में भिगोकर रखें। अगले दिन गाय के दूध में बीजों को पीस लें । इसे 250 मिली गाय के दूध के साथ सेवन करें । इससे एसिडिटी में लाभ होता है ।

या फिर आंवले का पाउडर , चीनी के साथ मिलाकर खाने या पानी में डालकर पीने से एसिडिटी से राहत मिलती है। इसके अलावा आंवले का जूस पीने से पेट की सारी समस्याओं से निजात मि‍लती है।

डायबिटीज  में राहत

डायबिटीज के मरीजों के लिए आंवला बहुत काम की चीज है । पीड़ि‍त व्यक्ति अगर आंवले के रस का प्रतिदिन शहद के साथ सेवन करे तो बीमारी से राहत मिलती है। 

पथरी की समस्या में कारगर

पथरी की समस्या में भी आंवला का उपयोग  कारगर साबित होता है । पथरी होने पर 40 दिन तक आंवले को सुखाकर उसका पाउडर बना लें, और उस पाउडर को प्रतिदिन मूली के रस में मिलाकर खाएं । इस प्रयोग से कुछ ही दिनों में पथरी गल जाने सम्भावना बन जाती है…

खून की कमी की समस्या से निजात

 रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी होने पर, प्रतिदिन आंवले के रस का सेवन करना काफी लाभप्रद होता है। यह शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायक होता है, और खून की कमी नहीं होने देता।

मोतियाबिंद की समस्या दूर करती है

आंखों के लिए आंवला अमृत समान है, |  यह आंखों की रौशनी को बढ़ाने में सहायक होता है। इसके लिए रोजाना एक चम्मच आंवला के पाउडर को शहद के साथ लेने से मोतियाबिंद में भी  लाभहोता  है |

गर्मी से राहत

शरीर में गर्मी बढ़ जाने पर आंवला सबसे बेहतर उपाय है। आंवले के रस का सेवन या आंवले को किसी भी रूप में खाने पर यह ठंडक प्रदान करता है।

हिचकी तथा उल्टी होने पर भी  आंवले के रस को मिश्री के साथ दिन में दो-तीन बार सेवन करने से काफी राहत मिलती है .|

चेहरे पर चमक आती है

 चेहरे के दाग-धब्बे हटाकर उसे खूबसूरत बनाने के लिए भी आंवला उपयोगी होता है । इसका पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा साफ, चमकदार होती है और झुर्रियां भी कम हो जाती हैं ।

बालों के लिए फायदेमंद

 बालों को काला,  घना और चमकदार बनाने के लिए आंवले का प्रयोग होता है,  इसके पाउडर से बाल धोने या फिर इसका सेवन करने से बालों की समस्याओं से निजात मिलती है ।

इस तरह हम पाते है की आंवला हमारे लिए बहुत ही उपयोगी है  |

इसके  अलावा भी अपने स्वास्थ को बेहतर रखने के लिए निम्न बातों का भी ध्यान रखना चाहिए…

  • आमाशय घायल होता है जब आप प्रातः काल अल्पाहार नही करते हैं।
  • किडनी घायल होती है जब आप 24 घण्टे में 10 गिलास पानी नही पीते ।
  • पित्ताशय घायल होता है जब आप रात्रि 11 बजे तक सोते नही है और सूर्योदय से पूर्व जागते नही हैं।
  • छोटी आंत घायल होती है जब आप ठंडा और बासी भोजन करते हैं।
  • बड़ी आंत घायल होती है जब आप बहुत तला भुना और मसालेदार भोजन करते हैं।
  • फेफड़े घायल होते हैं जब आप सिगरेट, और धुयें  आदि से प्रदूषित वातावरण में सांस लेते हैं।
  • लिवर घायल होता है जब आप बहुत मात्रा में जंक, फ़ास्ट फ़ूड खाते हैं।
  • हृदय घायल होता है जब आप अपने भोजन में अधिक नमक और घी तेल खाते हैं।
  • अग्नाशय घायल होता है जब आप मीठी चीजे ज्यादा  मात्रा में खाते हैं क्योंकि  वो स्वादिष्ट और सहज उपलब्ध हैं।
  • -आंखे घायल होती हैं जब आप कम प्रकाश में मोबाईल और कम्प्यूटर स्क्रीन पर काम करते हैं।
  • मस्तिष्क घायल होता है जब आप नकारात्मक सोचने लगते हैं।
  • आत्मा घायल होती है जब आप नैतिकता के विरुद्ध कार्य करते हैं।

यह ध्यान रहे कि आप के पास यह सभी अंग अमूल्य है क्योंकि यह सभी अंग बाजार में उपलब्ध नही  हैं । इसे अच्छी तरह से देखभाल कर अपने शरीर  को स्वस्थ रखें  ।

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प्यारी दोस्त गौरैया..

 

दोस्तों

कुछ दिनों पूर्व यानी २० मार्च को दुनिया भर में  विश्व गौरैया दिवस (World Sparrow Day) मनाया गया |

इसका मुख्य उद्देश्य गौरैया  पक्षी के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाना और उसके संरक्षण के लिए ज़रूरी उपाय करना है |  

दोस्तों यह देखा जा रहा है कि गौरैयों की संख्या  दिनों दिन घटते जा रही है, जो कि एक चिंता का विषय है | हमें इस हकीकत को समझना होगा …

हमें उस पक्षी के लिए प्यार और स्नेह की भावना फैलाना होगा क्योकि  हमारे जीवन में गौरैया बहुत महत्व  है |

आशा है कि हमारे इस प्रयास से लोगों का ध्यान इस ओर आकृष्ट हो सकेगा  और उसके संरंक्षण के लिए  हम सभी मिलकर अपने घर और आस पास के इलाकों में गौरैया के लिए घर और खाने पीने के लिए मिट्टी के बर्तन की व्यवस्था करेंगे !

मैं सच कहूँ  तो मुझे इस पक्षी से भावनात्मक लगाव है क्योकि करीब ३० वर्षों से हमारे घर में यह मेरा दोस्त बन कर रह रही है |

मुझे आज भी याद है वह दिन … मैंने  अपना नया घर बनवाया था | मेरे ड्राइंग रूम (drawing room) का रोशनदान खुला था,  इसलिए उस पर एक कार्टून का बक्सा रख दिया था ताकि बाहर से धुल और गन्दगी अन्दर नहीं आ सके |

लेकिन एक सप्ताह के बैंक के ट्रेनिंग के बाद जब वापस घर आया तो मेरे जिज्ञासा का ठिकाना नहीं रहा |. .

उस कार्टून में किसी शिल्पी के तरह गौरैया ने  गोल गोल छेद  बना कर करीब सात-आठ घोसले बना लिए थे | सुबह सुबह उसकी चहचहाते की  आवाज़ सुन कर मेरी नींद खुल गयी |

फिर तो मैंने  रोज उसी एक जगह पर चावल और पानी रखने की व्यवस्था कर दी | और वे सब अपना अधिकार समझ कर फुदक फुदक कर खाती और आस पास खेलती |

करीब सात आठ जोड़े अपने उसी घोसले में रहने लगी | तब से आज तक वह मेरे घर का हिस्सा है |

यह मासूम चिड़िया हमेशा घरों में व मानवीय बस्तियों के पास ही रहना पसंद करती है। यह  इंसानों के बेहद करीब मानी जाती है इसलिए यह जंगलों या जहाँ इंसान नहीं रहते है वहाँ विरले ही दिखाई देती है |

यह गौरैया पक्षी दाने के साथ साथ हमारे प्यार की भी भूखी होती है |

जब जाड़े के दिनों में मैं बरामदा में बैठ कर खाना खाता तो यह गौरैया भी खाने के लिए आसपास व ऊपर नीचे उड़ना शुरू कर देती |  जोर-जोर से शोर मचाकर हक से अपना हिस्सा माँगती । शायद वह मुझे एहसास दिला रही होती है कि वह भी हमारे  परिवार का ही एक हिस्सा है ।

कभी कभी कुछ घटनाएं ऐसी भी घट जाती है जो दिमाग में स्मृति बन कर बैठ जाती है |.

गर्मी का दिन था और ड्राइंग रूम का पंखा चल रहा था |  सुबह सुबह हमलोग सभी TV में  महाभारत देख रहे थे | चिड़ियाँ सब रोशनदान में बने घोसले के आस पास चहचहाहट के शोर के साथ खेल रहे थे |

 तभी अचानक पंखे से किसी चीज़ की टकराने की आवाज़ आयी |  हमारा ध्यान जैसे ही उधर गया तो पाया कि एक नर चिडिया पंखे से टकरा कर एक कोने में जा गिरी है |

हम सभी दौड़ कर उस ओर भागे और उस चिड़ियाँ को हाथ में लेकर पानी पिलाना चाहा |

पहले तो हमें देख कर वह डर गयी लेकिन फिर थोडा सा  दुलार और सुरक्षा का भाव महसूस करते ही वह थोड़ी सहज हो गयी |

मैंने पाया कि उसके पैर और पंख घायल है | घर के सभी सदस्य उसके उपचार में जुट गए |

मैंने पानी पिलाया और फिर दवा  लगाया | दिन भर तो उसकी देख भाल होती रही और रात को एक छोटी टोकरी में रख कर अपने रूम में ही रखा |

लेकिन जब सुबह उठा तो मेरे आँखों में आँसू छलक आये , वह मर चूका था और उसकी पत्नी चिड़ि उदास अपने घोसले के पास अकेली बैठी थी |

कुछ दिनों तक मैंने  उस अकेली चिड़ि को watch करता रहा | फिर करीब एक सप्ताह के बाद  पाया कि एक दूसरा चिड़ा उसके साथ आ चूका है और वह पहले की तरह फिर से ख़ुशी ख़ुशी चहक फुदक रही है | जैसे सब कुछ पहले जैसा सामान्य हो चूका था | मेरे दिल को  तसल्ली हुई |

फिर एक और अजीब दृश्य देखा | मैं नया नया ड्राइंग रूम में बेसिन लगवाया था और उसके ऊपर बड़ा सा mirror टांग दिया था | जो कि रोशन दान और उन गौरया के घर के पास था |

वही  चिड़ि रोज सुबह सुबह  mirror के सामने आती और अपने प्रतिबिम्ब को mirror में देख कर उसमे खूब चोच से मारती रहती ,  जैसे वह कोई दूसरी चिड़ि हो |

 यह सिलसिला रोज देखता और मैं अपने मन में उसकी  मानसिकता को समझने की कोशिश करता | यह सिर्फ वही चिड़ि कर रही थी जिसका चिड़ा मर गया था  |

मैं उसे अच्छी तरह पहचानता था क्योकि उसके एक पैर नहीं थे | मुझे उनलोगों की दिनचर्या देखने में बहुत मज़ा आता था और मेरा सन्डे को तो दिन भर उसी के साथ बीतता,  क्योकि उससे दोस्ती जो हो गयी थी |

लोग कहते है कि गौरया चार पाँच सालों तक जीवित रहती है | मुझे नहीं पता कि उसकी उम्र क्या थी लेकिन एक दिन की अप्रिय घटना ने जैसे मुझे अन्दर तक झकझोड़ दिया |

रात में मैं सोया था |  करीब 2 बजे रात में अचानक ड्राइंग रूम में उस गौरैया की ची ची की आवाज़ आयी | मेरी नींद खुल चुकी थी और मैं दौड़ कर ड्राइंग रूम में जाकर लाइट ऑन किया |

..एक काली बिल्ली को उस चिड़ि को मुँह में दबाए जाते हुए देखा… शायद बेसिन लगाने से उस पर चढ़ कर उसके घोसले तक पहुँचना बिल्ली के लिए आसान हो गया  था |

वैसे सभी को एक न एक दिन मरना तो है ही और जीवन मरण ऊपर वाले के हाथ में है |

लेकिन कुछ मौत विशेष परिस्थितियों में हो जाती है,  जिसके जिम्मेदार हम न चाहते हुए भी बन जाते है .. और इस बात का हमेशा ही अफ़सोस रहता है कि हमारे कारण  ही किसी निर्दोष की जान चली गयी | आज तक मैं अपने को उसका गुनाहगार मानता हूँ |

दोस्तों , जैसा कि हम सभी जानते है कि अगर पर्यावरण बचाना है तो हमें ना सिर्फ पेड़ पौधों को बचाना होगा,  बल्कि जंगलो में रहने वाले जीव जंतु और पशु को भी बचाना होगा |  हमारे घरों के मुदेंरो पर और आसपास रहने वाले पक्षियों को भी हमें बचाना होगा |

यह तो सत्य है कि इन पक्षियों के अस्तित्व खतरे में है । लेकिन हम अपनी इस दोस्त के संरक्षण के लिए अपने स्तर पर कुछ कदम उठा सकते हैं |

कृपया निम्न बिन्दुओ पर विचार करें…

  • सबसे पहली बात कि अगर हमारे घर में गौरैया घोंसला बनाए, तो उसे बनाने दें और  नियमित रूप से अपने आंगन, खिड़कियों और घर की बाहरी दीवारों पर उनके लिए दाना-पानी रखें। 
  • गर्मियों में न जाने कितनी गौरैया प्यास से मर जाती हैं। इसलिए हमारी कोशिश होनी चाहिए कि हम अपने छतों में और पेड़ों पर पानी के छोटे-मोटे बर्तन भर के रख दें। जिनसे सूखे के दिनों में सभी पक्षी अपनी प्यास बुझा सकें।
  • अपने घर के आस-पास अधिक से अधिक पेड़ व छोटे पौधे लगाएँ जिनसे उनके लिए प्राकृतिक आवास की उपलब्धता भी हो सके ।
  • नियमित रूप से उनको अपने आँगन में आवाज देकर बुलाकर दाना खिलाएँ, देखियें वो हमारी भाषा कैसे समझ लेती है और आप का साथी बन जाती है।
  • आखिरी में सबसे जरूरी कदम जिससे काफी मदद मिल रही है ….. वह है गौरैया के लिए कृत्रिम घर तैयार करना।  कृत्रिम घर बनाना काफी कम खर्चे वाला और आसान है | आज इंटरनेट पर गौरैया के लिए कृत्रिम घर बनाने के हजारों सुझाव उपलब्ध हैं।
  • हमारे घर में फालतू पड़ी पुरानी बोतलें,  ड़ब्बे,  खाल पेटियों की तख्तियों की मदद से,  पुराने छोटे मटकों आदि की मदद से हम अपनी नन्हीं दोस्त के लिए कृतिम घर तैयार कर अपने हुनर का परिचय दे सकते हैं ।

अगर ऐसा होता है तो  हमारे घर आँगन को अपनी चहचहाहट से, खुशी से भर देने वाली नन्हीं दोस्त को हम विलुप्त होने से बचा सकते हैं,

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