किस्मत की लकीरें – 5

सारा इलज़ाम अपने सर लेकर

हमने “किस्मत” को माफ़ कर दिया

आज का दिन कालिंदी के लिए बहुत बड़ा दिन था क्योकि अंततः आज उसका वर्षों का सपना पूरा होने जा रहा था | उसे UPSC में सफलता ही नहीं मिली  बल्कि उसे मनचाहा ब्रांच भी मिला |

जी हाँ, उसके द्वारा  चाही गयी आईपीएस  (IPS) कैडर उसे मिला था |

आज उसकी छः महीने की ट्रेनिंग शानदार ढंग से पूरी हुई थी  और उस ट्रेनिंग में अपने  प्रदर्शन ( performance)  से  ना सिर्फ ट्रेनर को प्रभावित किया बल्कि अपने साथियों का भी दिल जीत लिया |

लड़की होते हुए भी कालिंदी ने  काफी जोश – खरोश के साथ हर प्रतियोगिता  में भाग लिया और  सभी में काफी बेहतर प्रदर्शन किया |  

इसके लिए उसे  बेस्ट आईपीएस ट्रेनी (best  IPS trainee)  का अवार्ड भी मिला |

इससे कालिंदी का  मनोबल काफी ऊँचा हुआ था | वह शारीरिक रूप से मजबूत तो थी ही  दिमाग भी उसका बड़ी तेज़ चलता था |

ट्रेनिंग  पूर्ण (complete ) होने के दुसरे दिन ही पोस्टिंग का लेटर भी उसे प्राप्त हो गया |  उसकी पहली पोस्टिंग  महेश पुर इलाका में ASP के पद पर हुआ  था |

इस पोस्टिंग  से कालिंदी बहुत खुश थी  क्योंकि  अब उसे मन में लिए गए संकल्पों को पूरा करने का मौका मिल रहा था |

चूँकि नयी जगह थी और सरकारी बंगला भी काफी बड़ा था इसलिए उसने माँ को भी साथ ले जाना उचित समझा |

कालिंदी ने  पिता जी से पूछा तो उन्होंने इसकी सहर्ष इज़ाज़त दे दी और कहा .. तुम्हारी माँ वहाँ तुम्हारे रहने और खाने पिने का सारा  इंतज़ाम कर देगी |  अतः उन्हें  कुछ दिनों के लिए अपने साथ ही रखो |

कालिंदी को पुलिस की वर्दी पहने देख कर माँ  बहुत खुश थी | बेटी अब बड़ा पुलिस – ऑफिसर बन चुकी थी और इस पर माँ को गर्व महसूस हो रहा था |

उसने  ज़ल्द ही बेटी के साथ जाने की सारी तैयारी पूरी कर ली |

तभी ऑफिस की गाड़ी आयी और माँ – बेटी जीप में बैठ कर स्टेशन रवाना हो गये  |  उसके बाद ट्रेन पकड़ कर महेश पुर पहुँचना था |

ट्रेन के पुरे सफ़र में माँ बेटी बातें करती रही | ट्रेन की खिड़की से ठंडी हवा का झोका आ रहा था और तभी कालिंदी अपनी आँखे बंद किये अपने सुन्दर भविष्य की कल्पना में खो गयी |

उसके मन में तरह तरह के विचार उठ रहे थे | अचानक कुछ सोचते हुए उसके चेहरे पर हँसी बिखर गई |

कालिंदी को इस तरह आँखे बंद किये हँसता देख  माँ ने समझा कि उसे नींद आ रही है इसलिए  माँ ने उसे जगाते हुए कहा… कालिंदी,  अब तुम खाना खा लो | मैं घर से बना कर खाना साथ लेती आयी हूँ | खाना खा कर फिर आराम करना |

इसकी क्या ज़रुरत थी माँ, यहाँ ट्रेन में ही खाना उपलब्ध है … माँ की तरफ देखते हुए कालिंदी ने कहा |

नहीं बेटी , घर का खाना अच्छी सेहत के लिए ज़रूरी है | ऐसा कहते हुए  माँ के अपने बैग से टिफ़िन निकाला और सीट पर ही अखबार बिछा कर दोनों माँ – बेटी ने खाना खाया |

खाना खाने के बाद  कालिंदी ट्रेन की खिड़की पर अपना सिर  टिकाए थोडा  आराम करने लगी |

ट्रेन अपनी तेज़ गति से भाग रही थी और खिड़की से ठंडी – ठंडी हवा आ रही थी तो ऐसे समय में झपकी आना लाज़मी था |

कालिंदी  इसी तरह खिड़की पर सिर टिकाये झपकी ले रही थी और इधर माँ भी ट्रेन की बर्थ पर सो गयी |

अभी आधा घंटा ही बीता था तभी एक यात्री ने आवाज़ लगाया … महेश पुर आने वाला है और वह अपना सामान जो सीट के नीचे रखा हुआ था उसे निकालने लगा |

यात्रियों के हल चल से कालिंदी की नींद खुल गयी और उसने माँ को धीरे से उठाया और कहा …, माँ, हमलोग को अगले स्टेशन में उतरना है |

और थोड़ी देर में वह स्टेशन आ गया जहाँ उन दोनों को उतरना था |

महेश पुर एक छोटा सा स्टेशन था और इक्के – दुक्के लोग ही प्लेटफार्म पर नजर आ रहे थे |

हालाँकि, कालिंदी के पास सामान ज्यादा नहीं थे |

वह माँ के साथ अपना सामान लेकर प्लेटफार्म पर उतर गयी |

कालिंदी प्लेटफार्म के मेन गेट की ओर बढ़ रही थी तभी वहाँ कुछ पुलिस वालों  को फूल के  गुलदस्ते लिए किसी का इंतज़ार करते हुए देखा |

कालिंदी ने सोचा कि  शायद कोई नेता आने वाला होगा  और वे लोग उसी के स्वागत के लिए फुल लेकर आये है |

तभी एक स्मार्ट सा इंस्पेक्टर कालिंदी के पास आकर पूछा .. . क्या आप ही कालिंदी जी है ?

कालिंदी ने उस इंस्पेक्टर को देखते हुए ज़बाब दिया .. यस, मैं ही हूँ  |

तभी वह इंस्पेक्टर  ने सावधान की मुद्रा बनाई और कालिंदी को सैलूट किया और फिर अपना परिचय दिया |

उसके बाद कालिंदी और उसकी माँ को फुल का गुलदस्ता देकर उनलोगों का स्वागत किया |

फिर कालिंदी  की ओर मुखातिब हो कर कहा … मैडम, आपलोगों  के लिए गाड़ी बाहर खड़ी है | आप माँ जी के साथ अपने बंगले में प्रस्थान करें |

किसी भी सामान की ज़रुरत हो, तो आप  हमें बता दीजियेगा |

माँ जी इस तरह के आव-भगत देख कर अपनी बेटी पर गर्व का अनुभव कर रही थी |

कालिंदी माँ के साथ  गाड़ी में बैठ कर अपने सरकारी बंगले में आ गई  |

वैसे महेश पुर छोटी जगह थी | लेकिन ज़रुरत के सभी वस्तुएं आस पास में ही उपलब्ध थे |

इसलिए घर में ज़रुरत की सारी वस्तुएं जमाने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई |

माँ तो इतना बड़ा बंगला देख कर बहुत खुश थी और ज़ल्द ही सभी सामान को सलीके से सजा दिया और खान बनाने की तैयारी में जुट गयी |

आज का दिन तो बिना किसी ज्यादा परेशानी के कट गया |   अब कल तो अपने सीनियर ऑफिसर को रिपोर्ट करनी है….कालिंदी बिस्तर पर सोते हुए सोच रही थी | थोड़ी देर में वह नींद की आगोश में चली गयी |

कालिंदी की नींद  सुबह जल्दी ही खुल गई | उसने देखा कि माँ रसोईघर में ब्रेकफास्ट तैयार कर रही है |

कालिंदी ने माँ के पास आकर उसके पैर छुए और उनका आशीर्वाद लिया |

आज का  दिन कालिंदी के लिए ख़ास है क्योकि आज उसके ड्यूटी का पहला दिन है |

कालिंदी पुलिस हेड क्वार्टर में  योगदान देने के लिए तैयार हो रही थी तभी ड्राईवर अपनी डिपार्टमेंट की जीप के साथ रिपोर्ट किया |

कालिंदी जल्दी से ब्रेकफास्ट  समाप्त किया और जीप में बैठ कर अपने हेड क्वार्टर के लिए रवाना हो गयी |

    कालिंदी बड़े साहब के चैम्बर में पहुंची और सैलूट मार कर अपना परिचय दिया |

साहब उसे देखते ही खुश हो गए और  हँसते हुआ कहा …आओ कालिंदी, मैं अभी तुम्हारी ही फाइल पढ़ रहा था |

तुम तो सचमुच बहादुर और बुद्धिमान (intelligent) ऑफिसर  हो | मुझे  महेश पुर इलाके के लिए तुम जैसे बहादुर और तेज़ तर्रार ऑफिसर की ज़रुरत है |

इस इलाके में कोयला खदानों  की वजह से  माफिया लोगों का बोल बाला है | मुझे ऐसी खबर मिली है कि हमारे डिपार्टमेंट के कुछ लोगों की भी मिली भगत है |

     महेशपुर में लॉ एंड आर्डर को सुधारना तुम्हारी पहली प्राथमिकता होगी |

तब तक चाय आ गयी और कालिंदी भी साहब के साथ चाय पीने लगी |

तभी साहब ने कालिंदी को एक फाइल दिया जिसमे उसके इलाके में चल रही अवैध ( illegal) गतिविधियों की सारी  जानकारी उपलब्ध थी |  उस इलाके के सारे माफिया लोगों के काले चिट्ठे थे उस फाइल में |

इसमें वो सारी जानकारी है जो वहाँ प्रशासन व्यवस्था दुरुस्त रखने में तुम्हारी मदद करेगी…बड़े साहब कालिंदी को समझाते हुए कहा |

कालिंदी ने चाय समाप्त किया तभी  चपरासी ने आकर बड़े साहब को बताया कि सम्मलेन (conference) हॉल में सभी अधिकारी आ चुके है और आप का इंतज़ार कर रहे है |

साहब ने उसे कहा…ठीक है मैं अभी आ रहा हूँ |

और तभी कालिंदी की तरफ देखते हुए उन्होंने कहा … आज हमने आस पास के सभी थाना अधिकारी की मीटिंग बुला रखी है | वे कालिंदी के साथ मीटिंग हॉल में पहुँच गए |

बड़े साहब ने मीटिंग शुरू करते हुए सभी लोगों का कालिंदी से परिचय कराया |

कालिंदी की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा … यह जाबांज ऑफिसर आज ही  हमारे डिपार्टमेंट में ज्वाइन की है |

कालिंदी बहुत ही बहादुर और intelligent ऑफिसर है |

…(क्रमशः)

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किस्मत की लकीरें – 4

मुड़ जाती है हाथों की लकीरें

गर हिम्मत है तूफानों से लड़ने की

होते होते पीछे ही हो जाते है

बात जो हमेशा करते किस्मत की …

 कालिंदी को पता चला कि दिल्ली में UPSC का इंटरव्यू शुरू हो गया है, तो वह चिंतित हो उठी , क्योकि उसका इंटरव्यू लेटर अभी तक प्राप्त नहीं हो सका था |

उसने पिता जी को फ़ोन किया और घबड़ाते  हुए पिता जी को सारी बातें बता दी | उसने यह भी कहा कि शायद मेरा इंटरव्यू – लेटर किसी ने गायब कर दिया है |

उसे पूरा शक हो रहा था कि प्रोफेसर साहेब तो नाराज़ है ही,  उन्होंने ही ऐसी गन्दी हरकत की होगी | हालाँकि, कोई सबूत के आभाव में उन पर आरोप लगाना अभी उचित नहीं होगा |

कालिंदी के  मन में तेज़ी से ऐसे  विचार उठ रहे थे तभी पिता जी की फ़ोन पर आवाज़ सुनकर उसका ध्यान पिता जी की बातों पर चला गया |

पिता जी ने कहा …तुम्हे चिंता करने की आवश्यकता नहीं है बेटी | तुम दिल्ली चलने की तैयारी करो,  तुम्हे मेरे साथ कल ही प्रस्थान करना होगा | मैं आज ही अपने बैंक से छुट्टी ले लेता हूँ |

कालिंदी को पिता जी की बात सही लगी और उसने पिता जी से कहा …जी पिता जी, कल ही हमलोग को जाना चाहिए ताकि मेरी इंटरव्यू की सही जानकारी प्राप्त हो सके |

अगले दिन ही कालिंदी पिता जी के साथ इंटरव्यू स्थल पर पहुँच गयी और वहाँ के अधिकारी से अपने इंटरव्यू लेटर न मिलने की शिकायत की |

अधिकारी अपने रिकॉर्ड की जांच कर कालिंदी से कहा …. आपका इंटरव्यू लेटर यहाँ से सही समय पर dispatch हुआ है और वहाँ किसी ने रिसीव भी किया है |

इतना सुनना था कि कालिंदी को बहुत जोर का गुस्सा आया और उसे पूरा यकीन हो गया कि यह गन्दी  हरकत उसी प्रोफेसर ने की होगी | लेकिन यहाँ गुस्सा  करने से क्या होगा ..वो मन ही मन सोचने लगी |

तभी उस अधिकारी ने अचानक कालिंदी से कहा …. आप का तो  आज ही इंटरव्यू है | अच्छा हुआ आप समय पर आ गयी वर्ना आपका नुक्सान हो जाता |

आप जल्दी से conference हॉल में पधारे जहाँ और सभी प्रतिभागी अपने इंटरव्यू का इंतज़ार कर रहे है |

कालिंदी उस अधिकारी की बात सुन कर एकदम से घबरा गयी | वह तो इस समय मानसिक रूप से अपने को इंटरव्यू के लिए तैयार नहीं कर पाई थी |

तभी बाबू जी उसको समझाते हुए कहा. .. तुम तो पहले से ही तैयारी कर चुकी हो , बस हिम्मत से काम लो और शांत मन से  इंटरव्यू का सामना करो | मेरी शुभकामना तुम्हारे साथ है |

पिता जी की बात सुनकर कालिंदी को थोड़ी राहत महसूस हुई और वह पिता जी के पैर छू कर आशीर्वाद  ली |  वह भगवान् का नाम लेते हुए इंटरव्यू हॉल में पहुँच गयी |

कालिंदी को घबराहट हो रही थी |  

उसने वहाँ रखे फ़िल्टर से पानी लेकर पिया और मन को शांत करने की कोशिश करने लगी |

तभी उसके लिए कॉफ़ी आ गई | कॉफ़ी देख कर कालिंदी खुश हो गई | उसे इस समय कॉफ़ी की सख्त ज़रुरत थी |

वह वहाँ पड़ी कुर्सी पर बैठ कर कॉफ़ी के एक एक सिप का मज़ा लेने लगी | अब उसके चेहरे पर डर  के भाव कुछ कम हुए,  तभी कालिंदी का नाम announce हुआ और अगले ही  पल वह इंटरव्यू बोर्ड के सामने बैठी थी |

इंटरव्यू में  उसके पढाई की हुई सब्जेक्ट से सम्बंधित बहुत सारे प्रश्न पूछे गए जिसका बखूबी से वह उत्तर देती रही |

उसका इंटरव्यू अच्छा जा रहा था, इसलिए उसका आत्म – विश्वास काफी बढ़ गया था |

तभी अचानक उससे एक व्यक्तिगत प्रश्न पूछा गया …आप अगर यहाँ सफल हो जाती है तो इसका श्रेय किसे देना चाहेंगी ?

कालिंदी बिना एक पल रुके ही कहा … सबसे पहले तो पिता जी को इसका श्रेय दूंगी और फिर समाज के उन लोगों को भी श्रेय  दूंगी जिन्होंने समय समय पर मुझे  ताने दिए और मुझे कुरूप समझ कर मेरा उपहास उड़ाते रहे. |

उसी के प्रतिशोध  में मैंने अपने आप को मजबूत  और काबिल बनाया ताकि एक ऊँचा मुकाम हासिल कर सकूँ और उन लोगों को उचित जबाब दे सकूँ |

इंटरव्यू ले रहे लोग कालिंदी की बातों से काफी प्रभावित हुए और कालिंदी भी अपने इंटरव्यू से संतोष महसूस कर रही थी |

तभी इंटरव्यू बोर्ड के एक मेम्बर ने पूछा…अच्छा कालिंदी जी, आप के जीवन के उद्देश्य क्या है ?

प्रश्न सुन कर कालिंदी के चेहरे पर गंभीरता आ गयी |

उसके कहा …अगर मुझे मौका मिला तो मैं आईएएस को छोड़ आईपीएस की नौकरी पसंद करुँगी |

मेरे ज़िन्दगी का मकसद है कि समाज में जो दबे – कुचले लोग हैं जिन्हें लड़की या औरत होने के कारण ना तो बराबरी का हक़ मिलता है ..और ना ही आगे बढ़ने का अवसर |

उनके बेहतरी के लिए काम करूँ | उनके शोषण के खिलाफ एक मिशन छेड़ दूँ  ताकि उन पर ज़ुल्म करने वाले लोगों के मन में एक डर पैदा  हो |

और इस तरह आये दिन उनके ऊपर होने वाले जुल्म और होने वाले वारदात को रोक सकूँ |

कालिंदी से इस तरह के साहसिक उत्तर की  अपेक्षा बोर्ड को नहीं थी ..उसके बातों से बोर्ड के सारे सदस्य काफी प्रभावित नज़र आ रहे थे  |

इंटरव्यू समाप्त कर  कालिंदी सीधे अपने पिता जी के पास आई और उनके  पैर छु कर खुश होते हुए कहा… पिता जी, आप का आशर्वाद काम आया | मेरा इंटरव्यू बहुत अच्छा हुआ है |

पिता जी उसके सिर पर प्यार से हाथ रखा और खुश होते हुए कहा… मुझे तुम पर  गर्व है बेटी | एक दिन तुम अवश्य ही ऊँचा मुकाम हासिल करोगी |

सात दिनों के बाद,  

आज घर में गहमा गहमी थी, कुछ नजदीकी सगे सम्बन्धी भी घर पर आये हुए थे | कल से फ़ोन पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ था |

कालिंदी  के आँखों में गजब की चमक दिख रही थी |

वह बहुत खुश दिख रही थी  और वह खुश हो भी क्यों नहीं ….उसका जीवन का सबसे बड़ा सपना  जो पूरा हो गया था | उसे UPSC में ना सिर्फ सफलता ही मिली  बल्कि  मनचाहा ब्रांच आईपीएस भी मिल गया |

वह अपने स्टडी टेबल पर बैठी इन्ही सब बातों में खोई थी तभी उसके फ़ोन की घंटी बज उठी |

कालिंदी की नज़र जैसे ही मोबाइल स्क्रीन पर पड़ी तो वह चौक गयी,  फ़ोन प्रोफेसर साहेब ने किया था |

कालिंदी जैसे ही फ़ोन उठाया तो प्रोफेसर साहेब ने कहा ….हेल्लो कालिंदी, बधाई हो, तुम्हारी मेहनत और लगन का अच्छा फल मिला | इसमें मेरा भी योगदान है |

कालिंदी ने धीरे से कहा ….जी. थैंक यू सर |

हालाँकि प्रोफेसर साहेब कालिंदी से नफरत करते थे और उसे परेशान करने का कोई ना  कोई षड़यंत्र करते रहते थे |

उन्होंने इंटरव्यू लेटर गायब कर अपनी तरफ से कालिंदी को हानि पहुँचाने की कोशिश कर चुके थे |  लेकिन ऊपर से शुभचिंतक होने का दिखावा करते थे |

कालिंदी को यह बात भली-भांति पता थी | उसे इंटरव्यू लेटर वाली बात याद आते ही उसका मन प्रोफेसर के प्रति घृणा की भावना से भर गयी और वह फ़ोन पर ही उन्हें भला बुरा कहना चाहती थी |

तभी पिता जी, जो पास में ही खड़े थे , इशारे से कालिंदी को ऐसा करने से मना कर दिया |

कालिंदी ने प्रोफेसर साहब को धन्यवाद देकर फ़ोन काट दिया लेकिन उसके चेहरे पर नफरत  के भाव अभी भी दिख रहे थे |

तभी पिता जी ने कालिंदी को प्यार से समझाया और कहा …देखो बेटी, तुम अपने मिशन में सफल हो गयी हो | लेकिन अभी पूर्ण सफलता नहीं मिली है |  

अभी तो तुम्हे अपने काबिलियत  का लोहा मनवाना है और अपने जीवन के उद्देश्य पुरे करने है  |

इसलिए प्रोफेसर जैसे लोगों से इन छोटो छोटी बातों पर मत उलझो और अभी  आगे की प्लानिंग करो |

आप ठीक कहते है पिता जी … कालिंदी अपने गुस्से को त्याग कर कहा |

मुझे तो अपने जीवन के  उद्देश्य की अभी शुरुआत करनी है |  मुझे आशीर्वाद दीजिये पिता जी कि मैं अपने संकल्पों को पूरा कर सकूँ ..

(क्रमशः)

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किस्मत की लकीरें – 3

 

जो दे ख़ुशी के दो पल, वो लम्हा ढूंढ रहा हूँ

जहां मिले साथ वो मंज़र ढूंढ रहा हूँ

लोग ढूंढते हैं अपनी किस्मत की लकीर ,

मैं लकीर लिख दे वो कलम ढूंढ रहा हूँ ||

हालाँकि कोई भी इच्छित कार्य करने में बाधाएं भी आती है | इसी बीच एक नयी परिस्थिति ने जन्म ले लिया | जो प्रोफेसर उसे पढाई में मदद कर रहे थे उससे घनिष्टता धीरे – धीरे बढ़ने लगी |

प्रोफेसर साहब आये दिन कभी कॉफ़ी के बहाने तो कभी फिल्म देखने के बहाने  बाहर चलने  की जिद करते |

शुरू शुरू में तो कालिंदी ज्यादा प्रतिरोध नहीं करती थी, लेकिन अपने पढाई के समय को बर्बाद होता देख वह उनके साथ बाहर न जाने का बहाने बनाने लगी |

प्रोफेसर साहब दिखने में स्मार्ट थे और वह धीरे धीरे कालिंदी की ओर आकर्षित होने लगे |

परन्तु कालिंदी के तरफ से उसकी उदासीनता देख कर  वे मन ही मन बेचैन रहते और अपने मन की बात कहने का बहाना ढूंढने लगे |

आखिर एक दिन जब कॉलेज कैंटीन में कालिंदी कॉफ़ी पी रही थी तभी वह प्रोफेसर साहेब भी वहाँ आ गए और उसके सामने ही बैठ गए | कालिंदी ने ही एक और कॉफ़ी प्रोफेसर साहब के लिए मंगवा ली |

कॉफ़ी पीते हुए कुछ देर तो पढाई – लिखाई  की बातें होती रही, लेकिन तभी प्रोफेसर साहब अपनी भावनाओं को प्रकट करने से नहीं  रोक सकें और कालिंदी की ओर देखते हुए कहा…कालिंदी, मैं बहुत दिनों से अपने मन की बात तुमसे कहना चाह रहा था |

मैं तुमसे प्यार करने  लगा हूँ और अब तुम्हारे बिना नहीं रह सकता |

कालिंदी उनकी इस तरह की अप्रत्याशित बातों को सुन कर स्तब्ध रह गई | वह बिलकुल पत्थर की तरह बुत बन गयी |

अब  कालिंदी को समझ में आ रहा था कि  प्रोफेसर साहब बार बार फिल्म देखने और बाहर घुमने के लिए हमेशा दबाब क्यों बनाते थे |

कालिंदी को चुप देख कर प्रोफेसर साहब ने पूछा… कालिंदी, कहाँ खो गयी ? मेरे बातों का ज़बाब नहीं दिया ?

प्रोफेसर की आवाज़ सुन कर उसका  ध्यान भंग हुआ और फिर अपने को सँभालते हुए कालिंदी ने उनकी ओर देखते हुए दो टुक  शब्दों में कहा … देखिये प्रोफेसर साहब, हमारा और आप का रिश्ता तो एक गुरु और शिष्य का है और मेरा बस एक ही लक्ष्य है कि किसी तरह मैं प्रतियोगिता परीक्षा में सफल हो जाऊं |

कृपया मुझे माफ़ करे, मैं तो आप को अपना अभिभावक के समान  समझती हूँ और आप की इज्जत करती  हूँ |

प्रोफेसर साहेब को कालिंदी के मुँह से इस तरह की दो टूक लहजे में जबाब की उम्मीद नहीं थी | उन्हें इस तरह के जबाब सुन कर बहुत बुरा लगा और कालिंदी पर गुस्सा भी आने लगा |

लेकिन सार्वजानिक जगह होने के कारण यहाँ कुछ प्रतिक्रिया देना उन्होंने उचित नहीं समझा और फिर कॉफ़ी समाप्त कर धीरे से कहा …अच्छा कालिंदी मैं अब चलता हूँ | मुझे अभी एक क्लास लेनी है | मैं बाद में फिर मिलता हूँ |

कैंटीन की इस घटना से कालिंदी थोडा डिस्टर्ब रहने लगी और इधर परीक्षा की तारीख भी नजदीक आ रही थी |

उसे डर था कि कही प्रोफेसर उसकी परीक्षा के समय कोई झमेला ना खड़ी कर दे |  वो अपने हॉस्टल के कमरे में उदास मन से बैठी थी, उसी समय पिता जी उसके कमरे में दाखिल हुए |

कालिंदी अचानक पिता जी को सामने पाकर जल्दी से पिताजी के पैर छू लिए और पूछा… माँ कैसी है पिता जी ?

तुम्हारी माँ बिलकुल ठीक है बेटी | उसने तुम्हारे लिए तिल के लड्डू भेजे है |

पिताजी खुश होते हुए बोले और लड्डू वाला डब्बा उसकी ओर बढ़ा दिए |

वाह, तिल के लड्डू ? कालिंदी  डब्बे से लड्डू निकाल  कर जल्दी से खाने लगी और पिता जी से बोली…माँ ने बहुत स्वादिस्ट लड्डू बनाये है | कालिंदी ने मन ही मन माँ को धन्यवाद दिया |

पिता जी अचानक कालिंदी की तरफ देखते हुए पूछा … तुम कुछ परेशान नज़र आ रही हो, क्या बात है बेटी ?

कुछ नहीं पिता जी, शायद परीक्षा नजदीक आ गयी है, उसी के कारण चिंता हो रही है |

नहीं बेटी, तुम मुझसे कुछ छुपा रही हो ? मैं बाप हूँ तेरा, तुझे अच्छी तरह समझता हूँ | तुम अपनी समस्या बता सकती हो |

कालिंदी ने पिता जी से कुछ भी छुपाना उचित नहीं समझा और प्रोफेसर वाली घटना उन्हें बता दी |

पिता जी कालिंदी की बातें सुन कर इत्मीनान से बोले…बस इतनी सी बात पर तुम परेशान हो गई |  इस तरह की बातें तुम्हारी जैसी उम्र में तो होती ही रहती है |

तुम्हे ऐसी बातों से घबराना नहीं बल्कि उस समस्या का मुकाबला करना है |

तुम्हारा अभी एक ही लक्ष्य है और वो रात – दिन, उठते – बैठते तुम्हारी आँखों में होनी चाहिए तभी तुम्हे इतनी बड़ी सफलता हाथ लगेगी |

पिता जी की बातों  को सुनकर कालिंदी का आत्मविश्वास और भी पुख्ता हो गया |

उसने पिता जी की ओर देखते हुए कहा …..आप ठीक कहते है पिता जी,  मुझे अपना लक्ष्य सदा याद रहना चाहिए |

अब शाम होने वाली थी इसलिए पिताजी आशीर्वाद देकर वापस चल दिए,  लेकिन जाते जाते कालिंदी का मनोबल बढ़ा गए |

कालिंदी दुसरे दिन से ही अपनी पढाई पर ध्यान देना शुरू कर दिया और खूब जम कर पढाई करने लगी |

देखते देखते परीक्षा के दिन भी आ गए  और कालिंदी ने आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दिया /

उसकी पढाई रंग लाई और लिखित परीक्षा में वह दुबारा सफल हो गयी |

आज ही परिणाम घोषित हुई थी और वह अपनी  सफलता पर  खुश हो रही थी, वह मन ही मन सोच रही थी कि  इस बार इंटरव्यू में असफल होने  का सवाल ही नहीं है, क्योकि मेरा मोटापा भी ठीक हो गया, और मेरा रंग भी साफ़ हो गया है |  

अब तो मैं बिलकुल स्मार्ट लड़की लगती हूँ… कालिंदी  स्टडी टेबल के सामने रखे आईने में अपने को देख कर मन ही मन  कहा और उसके चेहरे पर एक मुस्कान बिखर गयी |

इधर प्रोफेसर को कालिंदी की सफलता से कोई ख़ुशी नहीं हुई / उसकी बात ना मानने पर वह तो कालिंदी से नाराज़ था / वह कालिंदी को सबक सिखाने के लिए तरह तरह के षड़यंत्र रचने लगा |

कालिंदी परीक्षा में सफल होने के बाद अपने घर आयी ताकि माँ का आशीर्वाद ले सके /

घर के दरवाजे पर कालिंदी को देख माँ दौड़ कर आई  तो उसने माँ के  पैर छू लिए /

माँ खुश होकर आशीर्वाद दिया और कालिंदी को गले लगा लिया /

 उसकी लिखित परीक्षा में सफल होने पर पिता जी भी खुश थे और उन्होंने बधाई दिया और कहा …मुझे पूरी  उम्मीद है कि तुम इंटरव्यू में भी सफल होगी /

कालिंदी पिता जी  के पैर छू कर कहा …जी, पिता जी, मुझे सफलता ज़रूर मिलेगी क्योकि आप का आशीर्वाद जो  मेरे सिर पर है  /

घर में ख़ुशी का माहौल था और सात दिन कैसे बीत गए पता ही नहीं चला /

सुबह सुबह कालिंदी हॉस्टल जाने को तैयार हो रही थी तो माँ ने कहा …कुछ दिन और रुक जाती अपने घर में /

नहीं माँ, इंटरव्यू का लेटर आने वाला होगा इसलिए होस्टल में रहना ज़रूरी है /

कालिंदी  माता पिता से आशीर्वाद लेकर हॉस्टल आ गयी /

कालिंदी इंटरव्यू लेटर का बेसब्री से इंतज़ार करती रही ताकि पता चल सके कि उसका इंटरव्यू किस तारीख को है / दिन बीतते  गए लेकिन उसका इंटरव्यू लेटर नहीं आया /

किसी ने कालिंदी को बताया कि इंटरव्यू तो शुरू हो चूका है / तब उसे लगा कि इंटरव्यू लेटर आ जाना चाहिए था /

उसके मन में शंका हुई कि ज़रूर किसी ने इंटरव्यू  लेटर गायब कर दिया है /

(क्रमशः)

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किस्मत की लकीरें .. 2

रास्ते है तो ख्वाब है ,

ख्वाब है तो मंजिले है

मंजिलें है तो फासले है

फासले है तो हौसले है

हौसले है तो विश्वास है .

आज कालिंदी का दिल जोर जोर से धड़क रहा था | वह अपने रूम में पढाई करते हुए आज के समाचार पत्र आने का इंतज़ार कर रही थी क्योकि आज ही UPSC का रिजल्ट निकलने वाला था जिसमे वह भी शामिल हुई थी |

उसने काफी मेहनत से परीक्षा की तैयारी की थी और उसे पूरी उम्मीद थी कि उसे सफलता ज़रूर मिलेगी |

तभी अखबार बांटने वाले ने बरामदे  में आज का अखबार डाल कर चला गया |

अखबार गिरने की आवाज़ सुनकर कालिंदी दौड़ कर वरामदे में गई और ज़ल्दी से अखबार  उठा कर चुप चाप अपने रूम में आ गई |

स्टडी टेबल पर बैठ कर धड़कते दिलों से पेपर के पन्ने खंगालने लगी ताकि वह दिख जाए जिसका वह  बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी |

और भगवान् ने उसकी सुन ली, लिखित परीक्षा में वह सफल हो गयी थी |

अब इंटरव्यू में सफल होना है, फिर तो दुनिया अपने क़दमों में होगी |

कालिंदी दोनों हाथ जोड़ कर भगवान् को धन्यवाद दिया और मन ही मन बुदबुदाई…एक बार मैं कलेक्टर बन जाऊं फिर मैं उनलोगों को अच्छी तरह तरह ज़बाब दे पाऊँगी जो लोग मुझे  घृणा की नज़र से देखते है ..

लेकिन इंटरव्यू के लिए तो खूब अच्छी तरह तैयारी करनी पड़ेगी जो दो महीने बाद होने वाला था |

वह मन ही मन सोचने लगी कि इंटरव्यू के लिए तो स्मार्ट बन कर जाना होगा  और तभी सामने पड़ी शीशे में अपना काला चेहरा  देख कर कालिंदी कुछ उदास सी हो गयी |

वह कुछ सोचते हुए अखबार को समेटने लगी,  तभी अचानक उसकी नज़रे एक विज्ञापन पर पड़ी |

उसने गौर से देखा, जहाँ लिखा था .. १००%  गोरा होने की गारंटी |

उसके उदास चेहरे पर अचानक  एक ख़ुशी की लहर दौड़ गयी |

उसने सोचा कि अगर कलेक्टर बन गयी तो कलेक्टर की तरह दिखने के लिए रंग भी तो गोरा होना चाहिए  और इंटरव्यू में भी अभी दो माह का समय है |

उसने घर में बिना  किसी को बताये  दवा  का वह पैकेज तुरंत मंगवाने  का फैसला किया |

कुल १५०००/- रूपये के उस पैकेज के लिए कालिंदी को अपने  वह पुराने गुल्लक आज तोड़ने पड़े जिसे बचपन से संचय कर रखा था |

वह सोच रही थी कि अपने चेहरे के  रंग के लिए वह ऐसे सैकड़ो गुल्लक कुर्बान कर सकती है, ऐसा सोच कर पैकेज के लिए उसने आर्डर कर दिया |  

और बिना ज्यादा इंतज़ार किये ही दो दिनों के बाद वह पैकेज भी आ गया |

पैकेज में दवा के साथ साथ उसे लेने की विधि बताई गयी थी |

कालिदी ने उसमे बताये विधि के अनुसार दवा लेना शुरू कर दिया |

लेकिन लोग ठीक कहते है …. मनुष्य चाहे जितना भी जतन कर ले , पर ..“वही होता है जो मंजूरे खुदा होता है” ..

एक महिना तक  दवा के सेवन के पश्चात् भी उसके चमड़ी के रंग में रत्ती भर भी परिवर्तन नहीं हुआ |

उसका चेहरे का रंग गोरा तो नहीं हुआ |

हाँ, उल्टे दवा का साइड इफ़ेक्ट हो गया और उसके शरीर का वजन बढ़ गया |   

उसका छरहरा बदन फुल गया और वह मोटी दिखने लगी |

माँ को अचानक इस तरह के कालिंदी में आये बदलाव से आश्चर्य हुआ और साथ में वह चिंतित भी हो उठी | उसने  कालिंदी से उसके कारण जानना चाहा  और फिर उसे  कालिंदी से हकीकत का पता चला |

माँ ने  तुरंत घरेलु डॉक्टर से संपर्क किया तो डॉक्टर ने कालिंदी की पूरी जांच की और फिर उसे समझाते हुए कहा …कालिंदी, अब तुम बच्ची नहीं हो, इन सब नीम हाकिम के चक्कर में कैसे पड़  गयी |

उन्होंने साफ़ साफ़ शब्दों में कहा …तुम्हे कम से कम छः माह हमारी दवा लेनी होगी …. तभी तुम्हारा बढ़ा हुआ वज़न कम हो पायेगा |

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जब पैकेज वाली दवा की बात पिता जी को मालुम हुआ तो उन्होंने भी काफी डांट लगाईं |  और इस तरह के विज्ञापनों से दूर रहने की हिदायत दी |

कालिंदी को अपने किये पर पछतावा हो रहा था | वह दो दिनों तक तकिये में मुँह छिपा कर रोती रही |

उसे अब घबराहट हो रही थी कि चेहरे से सांवली तो हूँ ही और मोटापा के कारण कही मैं  इंटरव्यू में असफल न हो जाऊं |

माँ ने समझाते हुए कालिंदी से कहा ….हिम्मत से काम लो बेटी और अपमे मिशन में पूरी ताकत से जुट जाओ |

 कालिंदी को माँ की बातों से थोडा हिम्मत हुआ | उसने अपने आप को संभाला और डॉक्टर के कहे अनुसार दवा के साथ साथ खाने पीने पर भी ध्यान देने लगी |

लगभग महीने भर के बाद नतीजा सामने आ गया और फिर से उसका वज़न कुछ कम होने लगा  परन्तु  उसके चेहरे के रंग में अब भी कोई फर्क नहीं पड़ा |.

और इधर उसके इंटरव्यू का दिन भी आ गया |

कालिंदी मन ही मन आशंकित हो कर इंटरव्यू का सामना किया और रिजल्ट वही हुआ जिसकी उसे आशंका थी |

कालिंदी इंटरव्यू में असफल हो गयी |  इतना सारा किया गया मेहनत बेकार हो गया |

उसका मन बहुत दुखी हुआ | भगवान् ने कितना अच्छा मौका दिया था लेकिन थोड़ी सी लापरवाही के कारण मेरे हाथ से  इतना अच्छा  मौका चला गया |

अफ़सोस के कारण दो दिनों तक तो उसने खाना पीना ही त्याग दिया था, बस अपने कमरे में बैठ कर रोती रहती थी |

उसकी तकलीफ को देख कर पिता जी उसके कमरे में आये और कालिंदी के पास बैठ कर प्यार से समझाने लगे |

एक बार असफल होने से ज़िन्दगी की हार नहीं होती बल्कि दूसरी बार प्रयास ना करना हार कहलाएगी |

कालिंदी को पिता जी की बात बिलकुल सही लगी | जब माँ बाप अपने औलाद की हिम्मत बढाते है तो वह औलाद और ज्यादा ताकत से सफलता पाने की कोशिश करता है |

उसने मन ही मन सोचा ..एक बार की हार से ज़िन्दगी ख़त्म नहीं हो जाती |

मैं फिर से कोशिश करुँगी और अपने मिशन को जब तक प्राप्त नहीं करुँगी तब तक हार नहीं मानूगी |

पढाई और अच्छी तरह हो उसके लिए वह अपने कॉलेज के हॉस्टल में शिफ्ट हो गयी ताकि वहाँ के लाइब्रेरी और अपने प्रोफेसर के संपर्क में रह सके |

कालिंदी की पढाई में कोई रूकावट ना हो इसलिए उसके माता – पिता भी उसे हर तरह से उसकी मदद कर रहे थे | इसलिए उन्होंने हॉस्टल में रहने की इजाजत दे दी |

कालिंदी को पूरी उम्मीद थी कि इस बार UPSC में सफलता ज़रूर मिलेगी | वह दिन रात मेहनत  में जुट गयी और ज्यादा समय कॉलेज लाइब्रेरी में बिताने लगी |

उसके मिहनत और पढाई में लगन को देख कर उसके  प्रोफेसर साहब ने भी उसे हर तरफ से मदद करने लगे |

इधर दवा और संतुलित खान-पान से उसके शरीर  में भी स्वाभाविक परिवर्तन होने लगा और उसका मोटापा गायब हो गया |

कालिंदी के चेहरे का रंग भी साफ़ हो गया | यह किसी चमत्कार से कुछ कम नहीं था | कालिंदी मन ही मन रोज़ भगवान् को धन्यवाद देती |

इस बार की परीक्षा में सफल होने के लिए ज्यादा ही आत्मा विश्वास (confidence) आ गया था |……(क्रमशः)

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किस्मत की लकीरें ..1

    

कालिंदी,  

बड़ा प्यारा नाम है तुम्हारा,  

            तुम बेहद खुबसूरत हो,

                  तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो |

                            सचमुच,.. मैं तुमसे प्यार करने लगा  हूँ |

झूठ मत बोलो विनय | तुम मेरा मजाक उड़ा रहे हो | तुम कितना स्मार्ट दीखते हो, बिलकुल मेरे सपनो के राज कुमार की तरह और एक मैं हूँ बिलकुल काली कलूटी, जो कोई मुझे अँधेरे में देख ले तो भूत समझ कर डर जाए |

नहीं नहीं, तुम अपने आप को गलत समझ रही हो | तुम कभी मेरी नज़रों से अपने आप को देखो,  फिर तुम्हारी यह हीन भावना समाप्त हो जाएगी |

क्या तुम सचमुच मुझसे प्यार करते हो ?.. कालिंदी संशय  से देखते हुए विनय से पूछी |

बिलकुल, मैं तुमसे  बेहद प्यार करता हूँ और तुमसे शादी भी करना चाहता हूँ,  अगर तुम्हे  कोई एतराज़ ना हो तो |

तुम कैसी  बातें कर रहो हो विनय,  तुम जैसा स्मार्ट और अच्छे विचारों वाले को कौन नहीं अपना जीवन साथी बनाना चाहेगा  | कालिंदी विनय को देखते हुए प्यार से कहा और फिर दौड़ कर उसके गले लग  गयी |

ओह विनय, मैं कोई सपना तो नहीं देख रही  हूँ ?

तभी माँ कमरे में दाखिल हुई | कालिंदी को नींद में बडबडाते हुए सुना और झल्लाते हुए कहा .. ..हाँ  हाँ,  तू सपना ही देखती रह | दिन कितना निकल आये है |

हमेशा कहती हूँ कि थोडा ज़ल्दी  उठने की आदत डालो ताकि सेहत ठीक रहे | लेकिन मेरी  बातों का तुझ पर असर ही नहीं होता है |

माँ की आवाज़ कानों में जाते ही कालिंदी की नींद अचानक खुल गयी ..और तभी उसे एहसास हुआ कि सचमुच यह सपना ही था |

वह जल्दी से बिस्तर पर उठ कर बैठ गयी  और सोचने लगी …  मैं बार बार  इस तरह के सपने क्यों देखा करती हूँ, जबकि सच तो यह है कि कोई मुझसे प्यार ही नहीं करता है, कोई भी मुझसे दोस्ती नहीं करना चाहता है क्योंकि मैं दिखने में बिलकुल सांवली हूँ,  साधारण लड़की  हूँ .. मैं मॉडर्न नहीं दिखती हूँ |

कालिंदी को वो सभी पिछली बातें याद आने लगी जो अब तक हर लड़कों ने उसे  ताने देते हुए कहा था, जब भी उसने किसी लड़के से दोस्ती करनी चाही  या उससे  अपने प्यार का इज़हार किया था …

शक्ल देखी है अपनी ?  बड़ी आयी मुझसे प्यार करने वाली |

चेहरा तो देखो …लगता है जैसे भगवान् ने मुँह पर कालिख पोत रखी है |

प्यार और तुमसे …पागल हो क्या |

तुम्हे देख कर तो कोई प्यार क्या तुमसे दोस्ती भी ना करना चाहे …

तुम लड़की कम और आंटी  ज्यादा दिखती हो …

ना तुम में स्टैण्डर्ड है और ना ही अच्छा लुक ..    

वह राजेश  जिसे  अपने कॉलेज का सारा नोट्स शेयर ( share) करती थी  और पढाई में उसकी  कितनी मदद करती थी | उसने भी एक दिन कह  दिया था ….किसी ने मुझे तुम्हारे साथ देखा तो मोहल्ले में मेरी क्या इज्जत रह जाएगी | मुझसे दूर ही रहा करो..

सचमुच, सभी लड़के मतलबी होते है |  इन सब बातों को याद कर उसके  आँखों में आंसूं छलक  आए |

कालिंदी को रोता देख माँ समझ गयी कि फिर किसी ने उसका दिल दुखाया है |

माँ ज़ल्दी से कालिंदी के  पास आयी  और प्यार से सिर पर हाथ रखते हुए कहा .. मेरी बेटी दुनिया की सबसे सुन्दर बेटी है |  इसे तो कोई सपनो का राजकुमार ही मिलेगा |

माँ की बातें सुन कर कालिंदी भावुक  हो उठी और माँ से लिपट कर बोली…माँ, मुझसे कोई प्यार नहीं करता है, कोई दोस्ती नहीं करता | मैं तो सभी की मदद करती रहती हूँ |

फिर भी मेरे साथ लोग ऐसा क्यों करते है ?

धैर्य रखो बेटी, इस समाज को जबाब देने का बस एक ही तरीका है |..तुम पढ़ लिख कर कलेक्टर बन जाओ | फिर तुम उनलोगों के तानो का जबाब  बखूबी दे सकती हो  |

माँ की बातें कालिंदी के दिल में बैठ गयी |  

उसने अपने आँसुओं को पोछा और बिस्तर से उठते हुए बोली…   तुम्हारा वचन सत्य होगा माँ |  मैं खूब मिहनत करुँगी और अपना मुकाम  हासिल करके रहूंगी |

माँ बेचारी तो खुद ही अनपढ़ थी लेकिन वह चाहती थी कि उसकी बेटी खूब पढ़ लिख कर माँ बाप नाम का रोशन करे |

उसे पता था कि पढाई की इच्छा को मन में दबाने  का परिणाम क्या होता है |

उसे अपने दिनों की याद आ गयी., जैसे कल ही की बात हो |

जब वह आठवीं पास कर चुकी थी, और उसके गाँव में हाई स्कूल नहीं थी |

उसके लिए शहर में रह कर पढाई करनी होगी | लेकिन बाऊ जी इसके लिए तैयार नहीं थे |

इसी बीच  बुआ जी शादी के लिए एक लड़के का रिश्ता लेकर भी आ गयी | उन दिनों गाँव में कम उम्र में ही शादी कर दी जाती थी |

लड़के  की नयी नयी नौकरी लगी थी और घर परिवार अच्छा था |

बाऊ जी को पूरी जानकारी  होते ही वे तुरंत मेरी शादी उससे  कराने  के लिए तैयार हो गए |

बाऊ जी मुझे अभी विवाह नहीं करनी है . मैं अभी पढना चाहती हूँ … मैंने सहमते हुए बाऊ जी  से कहा था |

पिताजी अपनी बड़ी बड़ी आँखों से मुझे घूरते हुए कहा था …देखो बेटी, मुझे जितना पढ़ाना  था पढ़ा दिया, और शादी करके चूल्हा चौका  ही तो संभालना है |

वैसे हमारे समाज में लड़कियों को इससे ज्यादा पढ़ाने का रिवाज़ नहीं है |

मुझे आगे पढने की बहुत इच्छा थी लेकिन बाऊ जी के सामने मेरी कुछ भी बोलने की हिम्मत नहीं होती थी इसलिए मुझे मज़बूरी में चुप हो जाना पड़ा |

मेरे उदास चेहरे को देख कर बाऊ जी मेरे सिर पर प्यार से हाथ रखा और समझाते हुए कहा था …तू बड़ी भाग्यशाली है जो तुम्हे ऐसा घर मिल रहा है |

 अब तुम  जितनी जल्द हो सके अपनी माँ से घर गृहस्थी सँभालने के गुण सिख ले | आज तक मुझे इस बात का पछतावा है कि मैंने उस दिन बाऊ जी का विरोध क्यों नहीं किया |

तभी कालिंदी ने माँ को झकझोरते हुए कहा…माँ, अब तुम क्या सोचने लगी ? मैंने कहा ना , तुम्हारा सपना मैं पूरी करुँगी | चलो अब खाना लगाओ मुझे बहुत भूख लगी है |

 कालिंदी के पिता बैंक में मामूली क्लर्क थे लेकिन अपनी इकलौती बेटी की हर इच्छा को पूरी करने को तत्पर रहते थे |

 घर में लगभग सभी सुख सुविधाएँ थी पर कालिंदी को किसी चीज़ की कमी थी तो वह थी उसका वह सांवला रूप |

कालिंदी जिसकी उम्र 19 साल थी और अभी अभी  BA फाइनल परीक्षा अच्छे नंबरों से पास की थी | वैसे पढने में  वह बहुत तेज़ थी और लोगो को पढाई में मदद भी बहुत करती थी |

तभी तो सभी लोग अपना मतलब साधने के लिए उससे जुड़ते थे और अपना काम निकल जाने पर मुँह घुमा कर चल देते थे |

कालिंदी अपने सांवले रूप को लेकर बहुत परेशान रहती थी | वह बहुत तरह के क्रीम आजमा कर देख चुकी थी लेकिन उसके चेहरे के रंग जस के तस रहा  |

(क्रमशः)

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Reinvent Yourself

Love yourself

 It is important to stay positive because beauty comes from the inside..

The most important part of our personality is the way we SPEAK…Because looks can gain only attraction, which is temporary but SPEACH can win hearts forever.

The way people treat you is a statement about who they are as a human being. It is not a statement about you.

When I look back on my life, I see pain, mistakes and heartache. When I look in the mirror, I see strength, learned lessons, and pride in myself.

Success is the time to Re-define our goals and failure is the time to Re-define our methods. Time is the fairest and toughest judge, possibly, without a provision of appeal. Time Management is key to success.
Better be watchful now.

I reinvented myself in 2020

Like everyone else, I had some big plan for the year 2020 but in March when lockdown happened, it was a shock for me. Even then I thought it was a matter of few days.

But  it took me some time to realize that lockdown, health problem  and economic crises is going to last longer than any one would have imagined..

I think reinvention was the key to adapting to the new situation like covid pandemic in 2020 .

When everyone had stated taking interest in their hobby to adjust themselves in the situation arising out due to covid pandemic. I thought, that was the right time to focus on my hobby of creating content and publish through social media.

I used to publish my thoughts earlier on social media but was missing regularity. Last year I reinvented myself, learnt new skill of content writing along with drawing and painting to spend quality time .

I am glad that all my hard work was worth it. I use to post articles on different topics like stories, poems, motivational and health through my Blog.

After posting my articles through my blog each day I  got  amazing response.

So, I think for me the year 2020 was the year of learning new skills and a lot of experiments.

You are requested to please share your own experience through comments.

Thank you for reading my Blog..

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स्वस्थ रहना ज़रूरी है …7

दोस्तों,

दो दिनों पूर्व हमारे एक मित्र का फ़ोन आया था | उन्होंने बातों बातों में कहा .. मुझे आप का ब्लॉग पढना अच्छा लगता है | आप की लिखी बातें पढ़ कर मैं बहुत उत्साहित (motivate) होता हूँ | आप इसी  तरह आगे भीं लिखते रहे |

लेकिन मैं चाहता हूँ कि आप स्वास्थ से सम्बंधित आर्टिकल ज्यादा लिखे ताकि पढ़ कर हम सब अपने शारीर को स्वस्थ रख सकें … और ज़िन्दगी के मजे ले सकें |

यह बात सही है दोस्तों…. अगर तन स्वस्थ है तो हर काम करने में मन लगता है और ज़िन्दगी सकारात्मक लगती है |

इसलिए आप सबों के सलाह को ध्यान में रखते हुए आज एक दवाखाना के बारे में चर्चा करना चाहता हूँ |

जी, हाँ, वही दवाखाना जो हर घर में मौजूद है और उसे कहते है “रसोई घर” | बिलकुल सही बात है, हमारे रसोई घर में जो मसाले और साग सब्जियां होती है उससे भी हम अपने रोगों का इलाज़ कर सकते है |

..इसी क्रम में आज चर्चा करना चाहूँगा रसोईघर  के एक आइटम का जिसे हम “लहसुन” कहते है |

वैसे लहसुन को उसके गंध के कारण तामसी भोजन के श्रेणी में रखा जाता है | लेकिन अगर इसके गुणों पर विचार  किया जाए तो सचमुच इसमें गुणों का खान है |

शहद में डूबा हुआ लहसुन की कली सुबह खाली पेट में लिया जाए तो इसके अद्भुत परिणाम मिलते है | आइये इसकी बिस्तृत चर्चा करते है …

लहसुन की कलियों का छिलका उतारकर शहद की छोटी शीशी में इतनी डालें कि वह शहद में पूरी तरह डूब जाए। लहसुन की 2–3 कलियों को सुबह खाली पेट सेवन करें और 45 मिनट बाद ही कुछ खाए।

इसके सेवन से  शारीरिक कमजोरी हमेशा के लिए ठीक हो जाती है और बढ़ी  हुई चर्बी भी कम होती है। शरीर मजबूत होता है  और सकारात्मक असर दिखाता है।

इसका सेवन करने से असमय ही बुढ़ापे का शिकार होने से बचा जा सकता है। बुढ़ापे का अर्थ है कि धमनियों का सिकुड़ कर रोग-ग्रसत हो जाना। यह धमनियों को सिकुड़ने से बचाता है और जमे हुए कोलेस्ट्रॉल को बाहर निकाल पुनः ठीक कर देता है।

शहद में डूबे हुए लहसुन में भरपूर मात्रा में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जिसके सेवन करने से शरीर में गर्मी आती हैं। जिससे सर्दी-जुकाम जैसी समस्या से निजात पाई जा सकती है और साइनस की समस्या भी काफी कम हो जाती है।

शहद में डुबे लहसुन में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते है जिससे गले में खराश और सूजन से राहत मिलती है। गले के इन्फेक्शन को दूर करता है |

अस्‍थमा रोगियों के लिए तो लहसुन और शहद किसी वरदान से कम नहीं है।

शहद में डूबा हुआ लहसुन हार्ट से सम्बंधित लोगों के लिए बहुत ही लाभकारी माना गया है। इसके कुछ महीने सेवन से हार्ट में होने वाले ब्लॉकेज से छूटकारा पाया जा सकता है। दिल की धमनियों में जमा फैट बाहर निकल जाता है। जिसके कारण रक्त संचार ठीक ढंग से होने लगता हैं, जो दिल के लिए फायदेमंद हैं।

अगर आपको बार-बार डायरिया की समस्या होती है, तो इसे लेना आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता हैं।

इसका सेवन करने से पाचन क्रिया ठीक ढंग से काम करती है जिससे पेट संबंधी किसी भी प्रकार का इंफेक्‍शन नहीं होता हैं। इन दोनों में एंटीबैक्टीरियल गुण होते है, जो फंगल इंफेक्शन को दूर करने का काम करते है।

शहद में डूबा लहसुन लेने से इम्यूनिटी मजबूत होती है। जिससे कई बीमारीयों से छुटकारा पाया जा सकता है।

यह एक प्राकृतिक डिटॉक्स का काम करता है । इसको खाने से शरीर की अंदर से सफाई हो जाती है। जिसके कारण स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है।

लहसुन और शहद में मौजूद फास्फोरस से दांत मजबूत रहते है। यह दांतों से जुड़ी कई समस्याओं को दूर करने का काम करता है।

लहसुन में  फाइबर, कैल्शियम, फस्फोरस आदि तत्व होते हैं जो दांत, बाल और हड्डियों को मजबूत करने में मदद करते हैं।

अगर आप को शहद लेने की मनाही है तो आप सुबह खली पेट दो जौ लहसुन को चबा कर एक गिलास गुनगुना पानी  पिया करें | इससे भी लाभ मिलेगा |

इस तरह हम पाते है कि एक छोटी सी प्रयास से जाड़े के दिनों में खास कर उम्र दराज़ (सीनियर सिटीजन) लोगों के लिए लहसुन का उपयोग बहुत ही लाभदायक सिद्ध होता है . |

(स्त्रोत- “भोजन के द्वारा चिकित्सा” किताब से जानकारी | कोई भी उपाय अपनाने से पहले डॉक्टर्स की सलाह ज़रूर लें )

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हर ब्लॉग कुछ कहता है -14

बुढ़ापा अभिशाप नहीं

दोस्तों,

आज सुबह जब उठा तो मौसम का मिजाज़ कुछ बिगड़ा हुआ पाया | लेकिन मोर्निंग वाक तो जाना ही था सो मैंने ठण्ड से बचने के लिए पर्याप्त कपडे पहने और जैकेट के पॉकेट में हाथ डाल कर  निकल गया पार्क की ओर |

हलकी हलकी धुप थी लेकिन साथ ही ठंडी हवा भी चल रही थी | मैं कान में हेड फ़ोन लगा कर टहलते हुए हनुमान चालीसा  सुन रहा था तभी मेरे मोबाइल में एक कॉल आया और हनुमान चालीसा बजना बंद हो गया |

मैं पॉकेट से अपना मोबाइल निकाल कर देखा तो मिश्रा जी का फोन था |

मैंने जैसे ही फ़ोन उठाया तो मिश्राजी की आवाज़ आयी….हैप्पी न्यू इयर वर्मा जी | आप कैसे है ?

सेम टू यू मिश्रा जी | इतने दिनों के बाद आपका फ़ोन आया | आजकल आप कहाँ है ? और आपका स्वास्थ  कैसा है ?.. मैंने उत्सुकता से पूछा |

मिश्राजी ने संक्षिप्त सा उत्तर दिया… मैं अभी डेल्ही में हूँ अपने बेटे के पास | उनकी आवाज़ कुछ उदास सी लग रही थी |

हमेशा खुशमिजाज़ रहने वाले रमेश मिश्रा जी की आवाज़ आज दुःख भरी लग रही थी |

अभी तीन  साल पहले ही एक साथ हम दोनों बैंक की नौकरी से रिटायर (retire) हुए थे | मैं पटना छोड़ कर कोलकाता आ गया और मिश्रा जी पटना छोड़ कर डेल्ही अपने बेटे के पास चले गए |

मैं कुछ आशंका जताते हुए प्रश्न किया …आप की आवाज़ में आज वो खनक नहीं महसूस  हो रही है जो हमेशा से आप से बात करते हुए महसूस होती है |

आप ठीक अनुमान लगा रहे है | इन दिनों मेरी तबियत ठीक नहीं चल रही है | हमारा ब्लड प्रेशर हाई रहता है और ब्लड सुगर भी ऊपर नीचे होता रहता है …मिश्रा जी ने उदास स्वर में कहा |  

 लेकिन आप तो अपने स्वास्थ पर हमेशा से ध्यान रखते थे फिर कैसे रोग के चक्कर में पड़ गए ?

मिश्राजी लम्बी साँसे खीचते हुए अपनी राम कहानी बताने लगे |

अब आप से क्या छिपाना वर्मा जी | मैंने सोचा था कि रिटायर होकर आराम की ज़िन्दगी जिऊंगा | ऑफिस के काम के टेंशन से दूर अपने शौक मौज को फिर से जिंदा करूँगा |

देश दुनिया का भ्रमण करूँगा |

 लेकिन ऐसा कुछ नहीं कर पा रहा हूँ | हम सब सोचते बहुत कुछ है, लेकिन होता वही है जो मंजूरे खुदा  होता है |

बेटे के साथ रहना अब मज़बूरी हो गई है | उसके एक साल के बच्चे को संभालना पड़ता है क्योंकि बेटा – बहु दोनों नौकरी में है

पत्नी का दुःख देखा नहीं जाता है | उनके घुटने के दर्द के बाबजूद सुबह जल्दी उठ कर बेटे बहु के लिए नास्ता और टिफ़िन तैयार करना पड़ता है |

मुझे भी कुछ काम सौप दिया गया है |

यहाँ नया जगह होने के कारण, ना कोई अपना रिश्तेदार है और न कोई दोस्त |

अकेले मन बहुत घबड़ाता है, और चिंता फिकर होने से तरह तरह के शारीरिक विकार उत्पन्न होने लगे है | इतना सब कहते कहते मिश्राजी रो पड़े | फ़ोन पर उनकी सिसकियाँ सुनाई पड़ रही थी |

मैं उनके दुःख भरी बात को सुन कर उदास हो गया | फिर उन्हें समझाते हुए कहा….क्या मिश्राजी,  आप तो बच्चों की तरह रो रहे है | आज साल का पहला दिन है, आज खुश रहेंगे हो सालों  भर खुश रहेंगे |

आपको याद है ना.. मैं हर साल के पहला दिन को  बैंक में रसगुल्ला  मंगा कर सब को खिलाता था  ताकि सालों भर हमलोग के सम्बन्ध मधुर रहे |

मिश्राजी अपने को सँभालते हुए कहा … आप ठीक कहते है | मुझे वो पहले वाले दिनों की याद आ रही है, जब हमलोगों के दिन हँसते गाते और  ख़ुशी मनाते  बीतते थे |

आज तो एक एक पल काटना मुश्किल लग रहा है | जैसे मुझे किसी ने कैद खाने में लाकर बंद कर दिया है |

मिश्राजी  की बातें सुन कर मेरा भी जी भर आया | मैं उन्हें हिम्मत बंधाते हुए कहा…आप तो खुद ही समझदार है | अगर अभी बी पी,  सुगर और थाइरोइड से ग्रसित हो जायेंगे तो ज़िन्दगी का सुख कैसे भोग पाएंगे |

और आप को तो पता ही है कि अगर आप खाट  पकड़ लिए तो किसी के पास आप को पानी पिलाने के लिए भी टाइम नहीं है |

जिस बाल बच्चे को पालने के लिए न जाने कितने शौक मौज का त्याग किया होगा लेकिन आज आप के लिए किसी के पास समय नहीं है |

बहुत ज्यादा भला वे करेंगे तो आपको  बृद्धा आश्रम छोड़ कर आ जायेंगे  ताकि वहाँ उचित देख भाल हो सके और वे अपनी जिम्मेदारियों से मुक्ति पा सकें |

इसलिए आज से अपनी दिनचर्या बदलिए और आज से ही एक पक्का  इरादा कर डालिए … वैसे भी आज साल का पहला दिन है … अपने को खुश रखने के लिए वो सब कुछ कीजिये जो आप को अच्छा लगता है |

यह भूल जाइये कि लोग क्या कहेंगे | खुल कर जीना शुरू कीजिये और सबों को खुश रखने की कोशिश करना छोड़ दीजिये |

आप ठीक कहते है वर्मा जी, अब अपने लिए समय निकालना और अपने लिए जीना शुरू करना ही पड़ेगा | जब तन खुश रहेगा तभी मन भी  खुश रहेगा |

मैं आज क्या, अभी से मोर्निंग वाक शुरू करता हूँ |

अच्छा फ़ोन रखता हूँ वर्मा जी, थैंक यू एंड… हैप्पी न्यू इयर, वन्स अगेन |

दोस्तों, मेरा मानना है कि हमें भी अपने जीवन में बदलाव लाने के लिए अपने व्यस्त समय में से थोडा समय अपने लिए भी ज़रूर निकालना चाहिए, जिससे कि हमारा तन और मन दोनों खुश रहे | 

बुढ़ापा अभिशाप नहीं है, यह अभिशाप तब बनता है जब हम लापरवाही के कारण बीमारी से घिर जाते है | यह समय है अपने मन का करने का | अपनी इच्छा के अनुसार जीने का

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हर शब्द में अर्थ होता है …

हर अर्थ में तर्क होता है  !

सब कहते हैं हम….

हँसतें बहुत हैं  !

लेकिन हंसने वालों के,

दिल में भी तो दर्द होता है ..

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साल नया और संकल्प पुराना …

 

दोस्तों,

जब मैं  नया साल २०२१ में अपने पुराने संकल्पों के बारे में जांच पड़ताल करता हूँ तो पाता  हूँ कि कुछ ही संकल्पों को मैं प्राप्त कर सका हूँ और बाकी तो अधूरे ही रह गए है …

आज उन सभी संकल्पों पर एक बार फिर से विचार करने का उपयुक्त समय है …और यह भी पता लगाने का समय है कि मेरे बहुत सारे संकल्प क्यों अधूरे रह गए …..आखिर कमी कहाँ रह गई |  .

.अतः बेहतर होगा कि उन सारी  संकल्पों को यहाँ पुनः प्रस्तुत करें और एक -एक संकल्प पर विचार किया जाए .|

साथ ही अपने किए गए  प्रयासों का मूल्यांकन भी किया जाए ताकि उनमे उपयुक्त सुधार  किया जा सके |

, आइये अब अपने संकल्पों की चर्चा करे…

पहला संकल्प 1:  किसी भी तरह के नशे से तौबा करना

यह सही है कि कभी कभी दोस्तों के बीच  ड्रिंक्स ले लेता हूँ | मुझे पता है कि  मेरे उम्र के इस पड़ाव में यह काफी हानिकारक है, इसलिए मैं आज संकल्प लेता हूँ कि कभी शराब को हाँथ नहीं लगाऊंगा | नए साल के celebration में भी शराब को हाँथ नहीं लगाया था |

दूसरा संकल्प :   चाय पीना  कम करेंगे या छोड़ देंगे

पिछले साल में भी यह निश्चय किया था  कि इस साल या तो चाय पीना कम करेंगे या  छोड़ देंगे, पर होता यह है कि जब भी हम इन्हें छोड़ने के बारे में गंभीरता से सोचते हैं तो उतनी ही गंभीरता से हमें इनकी तलब लग जाती है। उस समय हम अपना संकल्प भूल जाते हैं। सुबह की शुरुआत ही चाय या कॉफी से होती है।

लेकिन इस बार हम असफल नहीं होंगे और इसका पालन करने की कोशिश करेंगे |

तीसरा संकल्प:  मोर्निंग वाक और योगा  नियमित रूप से करेंगे …

वैसे पिछली साल भी मोर्निंग वाक और योगा करते रहे है लेकिन बीच बीच  में किसी कारण वश यह बंद भी हो जाता था | लेकिन इस बार हम संकल्प लेते हैं कि इस नये साल में रोज कम से कम पांच किलोमीटर की सैर और योगा नियमित रूप से करेंगे |

चौथा संकल्प : किसी की बुराई नहीं करेंगे

इस दुनिया में 100 में से 80 लोग ऐसे होते हैं जो हमेशा दूसरो की बुराई करने में लगे रहते हैं। ऐसे लोग खुद की Value तो कम करते ही हैं साथ में Negativity को भी Attract करते हैं।

इसलिए हमने सोचा है कि बुराई करने की आदत से अपने को बचाएंगे और और अच्छाई की ओर कदम बढ़ाएं।

पांचवा संकल्प :  Social Media  का सिमित उपयोग करेंगे .

सोशल मीडिया के बिना हम एक क्षण भी नहीं रह सकते है | यह लत इतनी बुरी है कि इसका असर हमारे रिश्‍तों पर भी पड़ने लगा है। परिवार में कलह का एक कारण यह भी बन गया है।

आज कई Students फेसबुक पर Online रहते हैं और अपनी पढाई की ओर ध्यान नहीं दे पाते। और फ़ालतू में अपने कई घंटे बर्बाद कर देते हैं। दफ्तर में काम के बीच चैटिंग करने से हम बाज नहीं आते और बॉस की डांट खाते हैं।

हालाँकि सोशल मीडिया आज कल के समय में इतना important है कि इसे पूरी तरह नज़रंदाज़  नहीं किया जा सकत , लेकिन उसके उपयोग को सिमित किया ही जा सकता है, इसलिए अन्य संकल्पों की तरह एक संकल्प लेते है कि सोशल मीडिया पर दो घंटे से ज्यादा समय नहीं बितायेगे /

छठा संकल्प:  अपने गुस्से पर काबू करेंगे, और खुश रहेंगे ..

क्रोध में व्यक्ति हमेशा नुकसान ही करता है। वह चाहे अपना हो या दूसरों का …. यह बात तो जग जाहिर है गुस्सा हमारे लिए कितना खतरनाक है। हमें सुखी जीवन जीने के लिए गुस्सा को त्यागना ही पड़ेगा | इसलिए इस साल  यह भी संकल्प लेते है कि गुस्सा ना अपने आप पर और ना दुसरो पर करेंगे


सातवाँ संकल्प : खुद के लिए समय निकालेंगे

आज की इस भगा दौड़ भरी ज़िन्दगी में हम खुद के लिए थोड़ा सा भी समय नहीं निकाल पाते। हम हमेशा खुद को काम में हमेशा busy रखते हैं। लगातार काम करने से काम का तनाव हम पर हावी हो जाता है। इससे हम ज़िन्दगी तो जीते है पर हम ज़िन्दगी का लुत्फ़ नहीं उठा पाते है ।

इसलिए हम संकल्प लेते है कि अपने घर-परिवार के अलावा खुद के लिए भी समय निकालेंगे। और अपने अधूरे शौक को पूरा करेंगे |

आठवां संकल्प :  फालतू के कामों में अपना समय बर्बाद नहीं करेंगे

हम अपना अधिकतर  समय बर्बाद करने में रुचि रखते हैं। कोई अपना समय  दोस्तों के साथ बिताने में लगा देता  है तो कोई गप्पे मारने में समय बर्बाद करता है। बहुत कम लोग होते हैं जो इस Time की वैल्यू को समझते है और उसकी क़द्र करते  हैं।

समय की कीमत समझते हुए हम संकल्प लेते हैं कि वो हम अपना सिमित और कीमती समय फालतू कार्यों में लगा कर बर्बाद नहीं करेंगे।

 नौवां संकल्प:   अपने  काम को हमेशा खुश करेंगे

अगर आपको लाइफ में दुःख से दूर रहना है तो  अपना काम खुद करना आपको आना चाहिये। दुसरे पर निर्भर नहीं होना चाहिए |

अपना काम खुद करने में एक अलग ही आनंद आता है और शारीर भी स्वस्थ रहता है /.

इस बात को  ध्‍यान में रखते हुए हम यह भी संकल्प लेते है कि  अपना काम खुद करेंगे


दसवां संकल्प :  ज्ञानवर्धक  पुस्तकों से दोस्ती करेंगे

हम सभी जानते है कि एक सफल और अच्छे इंसान बनने के लिए हमें अपने  ज्ञान (Knowledge) को अपडेट करना और नयी नयी बातें सीखना बहुत ज़रूरी है /

 किसी महान व्यक्ति की जीवनी, किसी बिसनेसमैन की Success Story और किसी फील्ड से Related Information, पढ़ने के लिए किताबें तो हम मंगा तो लेते है पर पढ़ नहीं पाते है /

परन्तु इस बार ऐसा नहीं होगा / हम संकल्प लेते है कि उन सभी किताबों को पढ़ते रहेंगे |

एक संकल्प और :   नियमित रूप से ब्लॉग लिखेंगे और   पेन्टिंग ड्राइंग करेंगे ..

जैसा कि आप सभी लोग जानते है कि हमने पिछले साल से ही यह blogging शुरू किया है , इस साल इसे continue करते हुए रोज एक या दो ब्लॉग पोस्ट करने की कोशिश करेंगे | इसके अलावा ड्राइंग और  पेन्टिंग जो अब मेरा passion बन गया है , उसके लिए रोज  थोडा समय निकाल कर अपने शौक को जीवित रखेंगे | इसके द्वारा हम अपने दोस्तों के संपर्क में रहते है जिससे अपना मन प्रसन्नचित रहता है |

दोस्तों , इस बार लिए गए संकल्पों की समीक्षा हम बीच बीच में करते रहेंगे, ताकि कितनी प्रतिशत सफलता अर्जित की है उसका पता लग सके …आप कितनी प्रतिशत सफतला का अनुमान लगाते है , हमें अपने कमेंट द्वारा ज़रूर अवगत कराएँगे ..

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नए साल के नए संकल्प

दोस्तों

नया साल २०२१ दस्तक दे चूका है, इसलिए सबसे पहले आप सभी को नए साल की शुभकामनाएं |

जाहिर है कि पिछली बार की तरह इस बार भी हम अपने मन में कुछ संकल्प करेंगे और उसका सालों भर पालन भी करेंगे |

हम सभी लोगों  ने महसूस किया है कि  गुज़रा  साल हमलोगों के लिए काफी कष्टप्रद रहा है | कोरोना के महामारी के चलते हम लोग अपने घरों में कैद होकर रहे |

आपस में मिलना जुलना छोड़ कर, सभी सोशल डिस्तेंसिंग (social distancing) का पालन करते रहे  है |

यह  साल हम रिटायर्ड लोगों के लिए तो और भी ज्यादा कस्टप्रद  रहा है | खुल कर हँसना तो जैसे भूल ही गए है और  एक डर के माहौल में ज़िन्दगी जी रहे है | 

 सबसे ज्यादा यह साल उनलोगों के लिए भयावह रहा जो रोज कमाते और रोज खाते है |

और वे छोटे छोटे बच्चे घरों में कैद होकर रह गए है | स्कूल जाना बंद , घर के बाहर अपने हम उम्र के बच्चों के साथ खेलना बंद, बस घर के अन्दर कैद |  

जिसका नतीजा  यह हुआ कि इन  सब बच्चे को मोबाइल और टी वी का लत (addiction )लग गया है  जो आने वाले समय में बहुत ही  खतरनाक परिणाम लाने वाला है |

ऐसे उत्पन्न हुई इन परिस्थितियों में  मुझे लगता है  कि हम सबों को समाज के लिए कुछ करने की आवश्यकता है |

जब मैं बैंक के जॉब में था तो बैंक के तरफ से बहुत सारे सामाजिक भलाई (C.S.R.) का  काम बैंक प्रबंधन के सहयोग से  किया जाता था |

हमें आज भी याद है जब हमने अपने बैंक शाखा की ओर से एक सरकारी स्कूल को गोद लिया था |

समय समय पर वहाँ  पढ़ रहे बच्चो को किताब – कापियाँ तो उपलब्ध कराते  ही थे, बच्चो के लिए स्कूल में सीलिंग फैन लगवाना या अन्य सुविधाएँ भी उपलब्ध करवाया करते थे |

 स्कूल के बच्चों को शुद्ध जल मिले उसके लिए स्कूल में वाटर पुरिफायर (Water Purifier ) लगवाए थे | वहाँ के मेघावी बच्चो के लिए छात्रवृति के तौर पर  कुछ राशी हर महीने दिया करते थे |

सच में इन सब गरीब बच्चो को मदद करके हम सबों को  बहुत संतुष्टि  मिलती थी | और बैंक को लोगों के बीच पहचान भी मिलती थी |

अब मैं रिटायर  कर गया हूँ, फिर भी उन बच्चो के लिए अभी भी मदद करने का  जज्बा है |

यह सही है कि अब  हमारे पास संसाधन सिमित है लेकिन वक़्त बहुत है |

इस लिए कुछ वक़्त उन सरकारी स्कूल में पढ़ रहे गरीब बच्चो के लिए निकाला जाए तो उन बच्चो के साथ साथ समाज के गरीब परिवारों की मदद कर सकते है |

हमारे पास  समय के साथ साथ अनुभव भी है और इसका लाभ हम गरीब बच्चो को पढ़ाने में  और उसकी आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद कर सकते है .|

हालाँकि आज कल ऐसे कार्य करने के लिए बहुत सी संस्थाएं (NGO) काम कर रही है |

इन संस्थाओ के माध्यम से या  स्वम् अपनी इच्छानुसार इन गरीब बच्चो की मदद कर सकते है |

तो आइये इस नए साल में हम सब मिल कर एक नया संकल्प करें कि गरीब और लाचार  बच्चो की बेहतरी और उनकी उत्तम सिक्षा हेतु हम सब प्रयास करेंगे |

साथ ही किसी सरकारी स्कूल या किसी स्वयं सेवी संस्था से जुड़ कर उन बच्चो के बेहतर स्वास्थ और उनके  आस पास साफ़ सफाई के लिए जागरूकता पैदा करेंगे |

एक महत्वपूर्ण बात और कि अभी बच्चो के स्कूल कोरोना के कारण बंद है और कुछ प्राइवेट और समर्थ स्कूल में ऑनलाइन क्लास चल रहे है |

 लेकिन सरकारी प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में पढने वाले गरीब बच्चे और शिक्षकों के पास ऑनलाइन क्लास शुरू करने हेतु आवश्यक संसाधन जैसे मोबाइल, नेट कनेक्शन इत्यादि नहीं है |

इसके कारण ऐसे बच्चों की पढाई लिखाई पूरी तरह से बंद है |

इसके अलावा भी झुग्गी झोपडी में रहने वाले गरीब और लाचार  बच्चो के लिए गर्म कपडे कम्बल इत्यादि की व्यवस्था भी कर सकते है |

मेरी यह कोशिश रहेगी कि हमारे जैसे बहुत से रिटायर्ड लोग है वे ,सभी मिल जुल कर इस अभियान को पुरे साल जारी रखें और अपना वक़्त और अपने संसाधन के कुछ हिस्सों को इन गरीब बच्चो पर खर्च करें  |

इस तरह हम खुद को भी व्यस्त रखेंगे. और अपने को मानसिक और शारीरिक बिमारियों से सुरक्षित भी  रख सकेंगे |

दोस्तों, आपने नए साल में क्या संकप्ल किया है, मुझे भी ज़रूर बताएं…..

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