
यह कविता एक बुजुर्ग व्यक्ति की भावनाओं का सुंदर और गहन चित्रण करता है | वह जवानी के दिनों के उन पलों को याद करता है जो कभी साथ बिताए थे |
कविता में उदासी और उम्मीद दोनों की झलक है, जो आप के दिल को छू जाएगा और आप सोचने पर मजबूर होंगे कि क्या प्यार की कोई उम्र नहीं होती है।
यादों की परछाई
अभी भी तुम्हारी याद आती है,
वो सुहाना तुम्हारा मुखड़ा
वो प्यार भरी मुस्कान
काश वो मिल पाती
पर अब तो जिंदगी की शाम हो गई है
लगता है तुम्हारी मुस्कुराहट खो गई है |
ज़रा दिल पर हाथ रख कर सोचो
क्या प्यार की कोई उम्र होती है
वो हंसी के पल, जो साथ साथ बिताए
वो सपनों की बातें, वो ख्वाब सजाए
अब बस यादों में सिमट कर रह गए हैं
जैसे दिल के कोने में कोई गीत सुरीला |
तुम्हारे बिना ये जहां वीरान सा लगता है
हर मोड़ पर तेरा इंतजार करता है
क्या तुम भी कभी सोचते हो मुझे
क्या तुम्हें भी मेरी याद सताती है |
वो दिन, वो रातें, वो तुम्हारे साथ का सफर
जैसे किसी किताब का बंद हो गया पन्ना
पर दिल में वो कहानी अभी भी बाकी है
तुम्हारी यादों में, तुम्हारी ही गीत गाती है |
अब भी तुम्हारे लौटने का इंतजार है
शायद फिर से वो मुस्कान लौट आए |
( विजय वर्मा )

Categories: kavita
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