पैसों से मिली ख़ुशी कुछ समय के लिए रहती है …
लेकिन अपनों से मिली ख़ुशी जीवन भर साथ रहती है …

इश्क की उम्र नहीं होती …. ना ही दौर होता है
इश्क तो इश्क है …जब होता है बेहिसाब होता है
चाहे कितनी भी दुरी हो .. वो दिल के पास होता है
मिलने की कोई उम्मीद नहीं होती है ,
फिर भी मिलने का इंतज़ार होता है …
अनामिका अकेले में कुर्सी पर बैठ , अपनी आँखे मूंदें राजीव के बारे में सोच रही थी …तभी राजीव चुप – चाप सामने आकर खड़ा हो गया और अनामिका के आँखे खुलने का इंतज़ार करने लगा |
तभी माँ ने आकर कहा …अनामिका ! तुम कुर्सी पर बैठे – बैठे क्यों सो रही हो ? अगर नींद आ रही है तो जाकर आराम से कमरे में सो जाओ |
अनामिका की तन्द्रा भंग हुई और चौक कर उसने माँ की ओर देखा और सोचने लगी…क्या यह सपना था, जो मुझे महसूस हुआ था कि राजीव मेरे पास आ कर खड़ा…
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