एक अजीब सी दौड़ है ये ज़िन्दगी ,
जीत जाओ तो कई अपने पीछे छुट जाते हैं
और हार जाओ तो अपने ही पीछे छोड़ जाते हैं …

आज सुबह जब अनामिका सो कर उठी तो उसका मन यह सोच कर खुश हो रहा था कि आज तो मामा के यहाँ पटना जाना है और वहाँ एक साल के अंतराल के बाद राजीव को देख पाऊँगी |
कोई भी दिन ऐसा नहीं जाता जब उसे मैं याद नहीं करती | पता नहीं यह क्या हो गाया है मुझे …. अनामिका नास्ता करते हुए सोच रही थी |
कहीं मैंने किताबों में पढ़ा था कि इंसान अपना पहला प्यार भुलाये नहीं भूलता | ऐसा ही कुछ मेरा भी हाल हो गया है….वह नास्ता तो कर रही थी लेकिन उसका ध्यान कही और था, जिसे माँ को भी महसूस हो रहा था और उसने टोकते हुए कहा ….तुम्हारा ध्यान कहाँ है बेटी |
तुम हमेशा खोई खोई क्यों रहती हो ?
अनामिका ने माँ के बात को टालते हुए कहा …कुछ भी नहीं माँ | मैं बिलकुल ठीक हूँ |
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