
एक कबूतर
भोर के उजास के साथ ही मेरी नींद खुली तो देखा कि हमारे खिड़की पर बहुत सारे कबूतर आकर शोर मचा रहे है, मानो कह रहे हो कि उठो सवेरा हो गया है |
दरअसल, मैं रोज सुबह उठते ही उसे अपने छज्जे पर खाना देता हूँ और हर रोज़ की तरह आज मैं सबेरे सबेरे नहीं उठ सका था क्योंकि रात में देर से सोना हुआ था |
ये कबूतर जैसे पालतू हो गए है और हमारे बीच एक अनजाना सा रिश्ता कायम हो गया है |
हमारे अपार्टमेंट में बहुत सारे कबूतर हो गए है | मैं जब भी उदास होता हूँ तो दाने लेकर बैठ जाता हूँ ….कबूतर पास आ जाते है और उसे हँसते खेलते और शोर मचाते देख कर मेरी उदासी गायब हो जाती है |
कभी सोचता हूँ .. क्या है उनके पास ? .. खाने को भोजन नहीं, रहने को आशियाना नहीं, कब कौन से जानवर का निवाला बन जाए पता नहीं … बावजूद इसके वे मस्त जीवन जी रहे है … आपस में भाईचारा है , उत्साह है और उड़ने को सारा आकाश | .., तो फिर हम इंसान को बहुत कुछ होते हुए भी क्यों उदास हो जाते है |

मैं कबूतर को दाना खिला रहा था और यह सब सोच रहा था तभी मेरी नज़र नीचे सड़क पर पड़ी. | मैंने देखा कि .एक कबूतर जख्मी होकर तड़प रहा था . शायद वह कार से टकरा गया था |
उसे इस तरह तड़पता देख कर मुझे दया आ गई और मैं जल्दी से सीढियों से उतरता हुआ उसके पास जा पहुँचा |
मैं उस जख्मी कबूतर को उठा लिया | वह मुझे देख कर पहले तो बहुत घबरा गया, लेकिन
थोडे दुलार एवं सुरक्षा के भावों की पुष्टि होते ही वह मेरे साथ सहज हो गया ।
मैंने देखा उसके पैर और पंख बुरी तरह जख्मी थे | मेरे साथ मेरी छह साल की पोती भी थी | उसे कबूतर पर बहुत दया आ रही थी … इसलिए उसने कहा … इसे अपने घर ले चलते है और हमलोगों उसे अपने घर ले आए |
मेरी पोती ज़ल्दी से उसके ज़ख्म पर लगाने के लिए दवा ले आई | हमलोग अच्छी तरह उसके ज़ख्म पर दवा लगाया और उसे पानी पिलाया | थोडा दाना भी खाने को दिया |

थोड़ी देर के बाद वह ज़मीन पर चलने की कोशिश करने लगा | लेकिन चल नहीं पा रहा था | हमलोगों दिन भर उसकी देख भाल करते रहे |
लेकिन रात में अब क्या किया जाए, वह तो उड़ने में असमर्थ था |
मेरी नन्ही पोती एक कार्टून का बक्सा लाई और हमलोग उसमे ही उसके रहने का इंतज़ाम कर दिया |
हमलोगों का ध्यान हमेशा उसी पे लगा रहता था | मेरी पोती उत्सुकता से बार- बार उसे देखने को जाती | वह मुझसे बोली कि जब यह नन्हा कबूतर ठीक हो जयेगा तो इसे पालूंगी |
सुबह होते ही सबसे पहले उसका हाल चाल लेने उसके पास गया और उसे जिंदा देख कर मन को तसल्ली हुई | आज कल स्कूल बंद होने के कारण मेरी पोती के लिए यह एक मनोरंजन का साधन हो गया |

इस तरह एक सप्ताह की देखभाल के पश्चात वह उड़ने लायक हो गया | लेकिन वह उड़ कर कही नहीं गया | वह घर में और छज्जे पर फुदकता रहता था | वह हमलोगों के बीच काफी घुल मिल गया था |
कभी मेरे हांथो पे बैठता तो कभी कंधों पर | उसके दिन भर की अठखेलियों को देखकर हंम सभी लोग आनंद का अनुभव करते |
लेकिन एक दिन की घटना ने हम सब को दुखी कर दिया | एक बिल्ली शायद उस पर नज़र रख रही थी | शायद भोर के समय था जब वह बिल्ली उसे अपना निवाला बना लिया |
सुबह उठ कर देखा तो वह उस कार्टून के बक्से में नहीं था |.. बस, कुछ टूटे पंख बिखरे थे और थी उसके साथ गुज़ारे गए खट्टी मीठी यादें |
हम सब का दिल बैठ गया | लगा जैसे अपना कोई इस दुनिया को छोड़ कर चला गया हो | बहुत दिनों तक उसकी यादें मन में टीस पैदा करती रही |
उसके साथ जो लगाव और अपनापन हो गया था उसे क्या नाम दिया जाए इसे समझने में मैं असमर्थ हूँ…
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BE HAPPY….BE ACTIVE….BE FOCUSED….BE ALIVE…
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Categories: मेरे संस्मरण
Birds have sense.They acknowledge belongings.
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very correct dear,,
They are social also..
some birds are on the verge of extinsion ..
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Well written ,great post😊
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thank you very much..
your words mean a lot..
Stay connected and stay blessed..
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Wah bahut hi accha drasya , पक्षियों की सेवा करना बहुत ही बड़ा सत्कर्म है जी ,आपको मेरा बहुत बहुत नमस्कार जी
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जी सच है ..
मुझे पक्षियों से बहुत प्रेम है , खास कर गौरैया से |
लेकिन आज कल पक्षियों की संख्या कम होती जा रही है …
यह चिंता का विषय है |
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हम लोगो की छत पर आते है ,दाना पानी हम लोग भी दे देते है उनको
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मैं तो बचपन में तोता और कबूतर पालता भी था …
अब उसे आजाद उड़ता देख कर अच्छा लगता है /
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Wo to bahut kam ho gai
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सही है ,,
लोग कहते है कि मोबाइल टावर लगने से
उनके सतीत्व को खतरा हो गया है /
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Haa ji sahi kaha
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उफ्फ कबूतर मर गया , मुझे बहुत दुख हुआ ,लेकिन आपका कुछ बाकी था
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जी मुझे बहुत अफ़सोस हो रहा था ..
हम भी मानते है कि कुछ हमारा उसका सम्बन्ध रहा होगा ../
आपको मेरा ब्लॉग पढने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..
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एक भावपूर्ण रचना!!
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जी, एक भावपूर्ण और सच्ची घटना |
अपनी भावना शेयर करने के लिए
दिल से धन्यवाद …
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Thank you for this warm-hearted post…. Reading it I was very touched inside….
Love also to the granddaughter…. 🌼
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Thank you dear,,
This is a true story and very emotional too.
thank you for your time
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Your blog reminded me of our childhood days when we used to keep small Rabbits as pets in our house and they were all killed and eaten by dogs/ cats. We became so sad that we stopped keeping any pets after this incident.
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Exactly sir ,
this story remind us of our childhood days…
I have faced the same situation .
Stay connected and stay safe..
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