ज़िन्दगी एक आईने की तरह है,
यह तभी मुस्कुराएगी , जब हम मुस्कुराएंगे…
Be happy….Be healthy….Be alive…

कौन किसे दिल में ज़गह देता है
पेड़ भी सूखे पत्ते गिरा देता है
वाकिफ है हम दुनिया के रस्मों-रिवाजों से
दिल भर जाए फिर हर कोई भुला देता है …
मेरी प्रतिज्ञा है
राजेश्वर थका हारा गुस्से में पंचायती से उठ कर घर आ गया और खाट पर चुपचाप लेट गया | कौशल्या को उसके असमय घर आने पर आश्चर्य हुआ और वो दौड़ कर राजेश्वर के पास पानी का गिलास लेकर आयी |
ऐसा क्या हुआ जो तुम दुखी मन से आकर खाट पर लेट गए …कौशल्या ने चिंतित मुद्रा में पूछा |
राजेश्वर के मुँह से आवाज़ ही नहीं निकल रही थी, सिर्फ आँखों से आँसू बह रहे थे, यह सोच कर कि इस छोटे भाई को भाई की तरह नहीं बल्कि अपने बेटे की तरह पाला – पोसा ,पढाया – लिखाया, बड़ा आदमी बनाया, वही आज उसके साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार कर रहा है |
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