
मैं अपनी पहचान ढूंढ रहा हूँ | मेरी पह्चान क्या है — जब हम माँ की कोख में थे तो पूरी दुनिया हमें हमारी माँ के मध्यम से जान पाती थी |
जब हम धरती पर पहला कदम रखते है तो उस क्षण हमें एक नाम दिया गया , जिसके बाद पिता का नाम जुड़ जाता है |
हालाँकि बचपन से ही मेरा एक सपना था , अपनी एक अलग पह्चान बनाने की | अपने को समृद्ध एवं प्रसिद्धि प्राप्त करते हुए देखना चाहता था |
मेरी कोशिश कि हर कोई हमारे माँ-बाप के नाम से नहीं बल्कि माँ –बाप को लोग हमारे नाम से जाने |
इसी भावनाओ को समेटे मैं कुछ लिखने का प्रयास किया है…आप जरूर पढ़े और अपने विचारों से अवगत कराएँ …

मेरी पहचान
विशाल आकाश का सूरज नहीं तो क्या
जलता दीपक बन , अपना घर रोशन तो किया
किसी सागर सा विशाल अस्तित्व नहीं तो क्या
कुआँ हूँ ,मीठा जल बन अपनों के प्यास तो बुझाया
किसी पर्वत सा ऊँचा मेरा कद नहीं तो क्या
जमीन से जुड़ा इंसान बन लोगों के काम तो आया
अम्बर को छूने की मेरी ताकत नहीं तो क्या
साधारण व्यक्तित्व मेरा, लोगों के दिलों को तो भाया
बाज सा ऊँचे नभ में उड़ने की हिम्मत नहीं तो क्या
गोरैया सा हौसला रख लोगों के दिलों में तो समाया
मुझे दुनिया में कोई पहचान नहीं तो क्या
साधारण इंसान बन अपने परिवार के काम तो आया..
( विजय वर्मा )
मेरी एक कविता संग्रह:
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Categories: kavita
Good Morning. Vare Nice…….Have a. Nice. Day
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thank you dear
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मेरी कोशिश कि हर कोई हमारे माँ-बाप से नहीं बल्कि माँ –बाप को हमारे नाम से जाने /..
अच्छा लगा Uncle…👌👌👌🙏💚
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धन्यवाद डिअर / मेरी कविता वाली बुक जो link में है ..वो भी पढना , हमें ख़ुशी होगी /
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Kiya bat h sir ji
Gd even sir ji
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मेरी कविता के बारे में कुछ भी नहीं लिखा …राधे राधे /
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I am not “ samzdaar” of poetic beauty but got the message it carries. Given to the introductions, it’s simple to understand.So I observe the great thoughts you have and the outlook towards life, it’s great.
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hahahaha.,,.sir, your words are enough for me …thank you , and Good night..
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Muchas gracias. ?Como puedo iniciar sesion?
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Reblogged this on Retiredकलम and commented:
ज़िन्दगी में एक दुसरे के जैसा होना ज़रूरी नहीं होता.
एक दुसरे के लिए होना ज़रूरी होता है …
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