# ज़िंदगी, तेरा शुक्रिया #

यह कविता जीवन के संघर्षों, अनुभवों और उनसे मिलने वाली सीख की भावपूर्ण अभिव्यक्ति है। सुख-दुःख, हार-जीत और उतार-चढ़ाव के बीच भी उम्मीद का दीप जलाए रखना ही जीवन की सच्ची कला है।
यह कविता हमें सिखाती है कि हर ठोकर से सीखें, हर परिस्थिति को स्वीकारें और हौसले के साथ आगे बढ़ते रहें। क्योंकि ज़िंदगी खूबसूरत तब बनती है, जब हम हर हाल में मुस्कुराना और उसे गले लगाना सीख लेते हैं।

ज़िंदगी, तेरा शुक्रिया

ज़िंदगी, तेरी राहों में कई मोड़ आए,
कभी धूप मिली, कभी बादल छाए।
कभी सपने टूटे, कभी अपने रूठे,
फिर भी हौसले मेरे कभी नहीं टूटे।

जो दर्द मिला, उसे हँसकर सहा,
जो दिल ने कहा, वही करता रहा।
हर ज़ख़्म से जीने का हुनर सीखा,
हर ठोकर से आगे बढ़ना सीखा।

जब रात ने अँधेरों का जाल बिछाया,
मैंने उम्मीद का दीप जलाया।
मुश्किलों में भी मुस्कुराता रहा,
गिरकर सँभलता, आगे बढ़ता रहा।

न मंज़िल की चिंता, न राहों का डर,
चलता रहा मैं, डगर-दर-डगर।
जो मिला, उसे अपना बनाता रहा,
जो बिछड़ा, उसे भूलता रहा।

जब जब तूफ़ानों ने मेरी नाव हिलाई,
तब तब मैंने हिम्मत की पतवार चलाई।
हर मुश्किल को हमसफ़र बनाया,
हर चुनौती में एक रास्ता पाया।

न जीत का गुरूर, न हार का ग़म,
हर हाल में चलते रहे मेरे क़दम।
न बीते कल का कोई अफ़सोस रहा,
न आने वाले कल का कोई ख़ौफ़ रहा।

ज़िंदगी, तुझसे अब शिकायत नहीं,
तेरे फ़ैसलों से कोई बग़ावत नहीं।
तेरे दिए हर ज़हर को अमृत समझकर,
पीता रहा मैं उसे हँसकर-सँभलकर।

अब इतना ही जीवन का सार जाना,
हर हाल में हँसना, हर दर्द भुलाना।
मंज़िल मिले या न मिले, क्या ग़म है,
चलते रहना ही जीवन का धर्म है।

जब तक साँसों में उम्मीद रहेगी,
जीने की चाह हर दिन नई रहेगी।
हर सुबह को नई शुरुआत बनाऊँगा,
ज़िंदगी, तुझे हर हाल में गले लगाऊँगा।

— विजय वर्मा
www.retiredkalam.com



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8 replies

  1. वर्मा जी, ज़िंदगी को समझना आसान है, मगर उसके हर ज़ख़्म को मुस्कान में ढाल देना ही असली फ़न है। आपकी कविता संघर्षों की दास्तान नहीं, टूटकर भी न हारने वाली रूह का ऐलान है। सलाम इस जिजीविषा को 🙏

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    • आपके इन खूबसूरत और हौसला बढ़ाने वाले शब्दों ने दिल छू लिया। 🙏❤️ सच है, ज़िंदगी की असली खूबसूरती गिरकर फिर उठने, दर्द के बीच मुस्कुराने और हर मुश्किल के बाद उम्मीद का दामन थामे रखने में है। मेरी कलम की सार्थकता भी तभी है, जब मेरे शब्द किसी के दिल को छू सकें और उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा दें। आपका स्नेह और प्रोत्साहन मेरे लिए अनमोल है। सादर आभार!

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  2. बहुत खूबसूरत कविता, वर्मा जी 🤍 ज़िंदगी के हर उतार-चढ़ाव को स्वीकार कर मुस्कुराते हुए आगे बढ़ना ही तो असली हौसला है। कुछ पंक्तियाँ दिल को छू जाती हैं और बहुत कुछ सिखा जाती हैं। 🌷🦋✨

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    • आपके स्नेह और सुंदर शब्दों के लिए हृदय से धन्यवाद! 🙏❤️ सच ही है, ज़िंदगी हमेशा हमारी इच्छाओं के अनुसार नहीं चलती, लेकिन हर परिस्थिति को स्वीकार करके मुस्कुराते हुए आगे बढ़ना ही असली हिम्मत है। मेरी कलम की सार्थकता तभी है, जब मेरी पंक्तियाँ किसी के दिल को छू सकें और जीवन में उम्मीद की एक किरण जगा सकें। आपका प्रोत्साहन मेरे लिए अनमोल है। 🌷

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  3. Verma ji, this is a beautiful and deeply inspiring poem. Your words capture the true spirit of life—its ups and downs, pain and hope—with remarkable grace. The way you express gratitude for every experience and the resolve to keep smiling and moving forward is truly uplifting. Lines about lighting the lamp of hope and “walking on is the dharma of life” stay with the reader. Thank you for sharing such a heartfelt reminder to embrace life in every situation. Truly beautiful.

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    • Thank you so much for your beautiful and heartfelt appreciation. 🙏❤️ I’m truly glad that the poem resonated with you. Life may bring challenges, sorrows, and unexpected turns, but hope, gratitude, and courage give us the strength to keep moving forward.

      As long as the lamp of hope burns within us, no darkness can completely defeat our spirit. 🌹✨ Keep smiling and keep spreading positivity!

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