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# नमक हराम #….11 

बस यही सोच कर हर मुश्किलों से लड़ता आया हूँ धुप कितनी भी तेज़ हो समंदर नहीं सुखा करते | सत्य की जीत राजेश्वर  ज्योहिं चैम्बर में घुसा, उसने बड़े वकील साहब के सामने अपने हाथ जोड़ लिए | उसके… Read More ›

# नमक हराम #….10 

दिल से बड़ी कोई कब्र नहीं होती हर रोज़ कोई न कोई एहसास दफ़न होता है | पासा पलट गया वकील साहब तैयार किया हुआ वकालतनामा राजेश्वर को देते हुए कहा… आप इस पर दस्तखत कर दें |  इसे कल… Read More ›

# नमक हराम #….9

ज़िन्दगी कैसी अजीब हो गयी है खुश दिखना ,खुश रहने से ज्यादा हो गया है हार नहीं मानूंगा राजेश्वर खेतिहर मजदूर  के रूप में राम खेलावन की खेत पर काम कर रहा है | सोच रहा है कि भगवान् ने… Read More ›

# नमक हराम #….8

इमानदारी की राह पर चलते चलते पहुँच गया हूँ बेईमान शहर में हर कदम पर ठोकर हूँ खाता गिर जाता हूँ खुद की नजर में… ज़माना बेईमान हो गया राजेश्वर जैसे ही सुना कि उसका खेत कोई दूसरा आदमी जोत… Read More ›

# नमक हराम #….8 

इमानदारी की राह पर चलते चलते पहुँच गया हूँ बेईमान शहर में हर कदम पर ठोकर हूँ खाता गिर जाता हूँ खुद की नजर में… ज़माना बेईमान हो गया राजेश्वर जैसे ही सुना कि उसका खेत कोई दूसरा आदमी जोत… Read More ›

# नमक हराम #….7 

कौन किसे दिल में ज़गह देता है पेड़ भी सूखे पत्ते गिरा देता है वाकिफ है हम दुनिया के रस्मों-रिवाजों से दिल भर जाए फिर हर कोई भुला देता है … मेरी प्रतिज्ञा है राजेश्वर थका हारा गुस्से में पंचायती… Read More ›

# नमक हराम #….6 

आँसुओं से लिख रहे है बेबसी की दास्तां लग रहा है दर्द की तस्वीर बन जायेंगे हम… बेबसी की दास्तान आज सुबह – सुबह राजेश्वर दुकान पर गया और कालू को सब काम समझा कर वो सीधे वकील साहब के… Read More ›

# नमक हराम #…5 

रिश्ते कभी ज़िन्दगी के साथ नहीं चलते रिश्ते तो एक बार बनते है , फिर ज़िन्दगी रिश्तों के साथ चलती है | कुछ तो लोग कहेंगे दस बजे का समय था और दुकान में काफी भीड़ थी | राजेश्वर और… Read More ›

# नमक हराम #…4 

हल्की सी आहट भी होती है तो जाग जाता हूँ मैं शायद अभी भी कायम है दिल में उम्मीद तेरे लौट आने की पत्थरों का शहर उस चाय वाले को समझते देर नहीं लगी कि भाइयों में झगडा हुआ है… Read More ›