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……..अपने भीतर के बच्चे को ज़िंदा रखिए #

चलो, आज फिर बच्चा बन जाएँ | “हर इंसान के भीतर एक बच्चा छिपा होता है, जो अवसर मिलने पर खुलकर हँसना, खेलना और जीवन को महसूस करना चाहता है।” जब हम बच्चे थे, तब हमें जल्दी थी बड़े हो… Read More ›

# शायद, यही मेरी पहचान है #

यह कविता जीवन की उन अनकही यात्राओं की कहानी है, जहाँ टूटन, बिछड़न और दर्द के बीच भी इंसान उम्मीद का दामन नहीं छोड़ता। यह आत्मस्वीकृति, धैर्य और गिरकर फिर उठ खड़े होने के साहस का गीत है। बिखर जाने… Read More ›