#भावना

# मैं और मेरा वजूद #

\ यह कविता व्यक्ति के अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प का गान है। उन लोगों के लिए प्रेरणादायक है जो जीवन में चुनौतियों का सामना करते हैं। आइये, इस कविता के भावनाओं के साथ विचरण करें | मैं और मेरा… Read More ›

#खोया हुआ प्यार #

यह कविता खोए हुए प्यार और क्षमा की भावनाओं को व्यक्त करती है। रचनाकार जो अपने प्रियजन के उदास चेहरे को देखकर भावुक हो जाता है, और गलतियों के लिए माफी मांगता है, हालांकि वह जानता है कि शब्द घावों… Read More ›

# मैं मजबूर हूँ # 

मैं पटना के अशोक राजपथ ब्रांच में अभी अभी कार्यभार  संभाला था और बैंक डिपाजिट का टारगेट पूरा करने के लिए काफी दबाब था | तब मेरे एक स्टाफ ने सुझाया कि बिजली विभाग में काफी फण्ड रहता है और… Read More ›

# बुड्ढा मिल गया # 

नवीन  आज कल बहुत खुश था | उसका तरकीब काम कर गया, जिसके कारण हमारा बैडमिंटन ( badminton) खेलने का कार्यक्रम लगभग बंद ही  हो गया था |  इसके दो कारण थे …. पहला यह कि अब मुझे खाना बनाने… Read More ›

मंडन मिश्र…मिथिला के महान विद्वान् # 

दोस्तों दोस्तों, हर साल 22 मार्च को बिहार दिवस मनाया जाता है | बिहार दिवस के उपलक्ष्य में हमने तय किया है कि बिहार से जुड़े कुछ महान विभूतियों के बारे में चर्चा करेंगे जिनको याद करके हम बिहारवासी आज… Read More ›

# हम धमाल  करते थे #  

बचपन  के दिनों को आज भी जब याद करते हैं तो उस मासूम से प्रेम का एहसास होता है जो उस समय हम दोस्तों के बीच हुआ करता था । उन दिनों की याद आज भी मन को उल्लासित करती… Read More ›

# खोया हुआ सुख #

यह कविता एक परिवार की कहानी है, जो कभी खुशियों से भरा हुआ था, लेकिन अब सन्नाटे में डूबा हुआ है। बच्चों की किलकारी और बुजुर्गों की बातें गायब हो गई हैं| सब मोबाइल की दुनिया में खो गए हैं।… Read More ›

# गुज़रा हुआ ज़माना # 

बचपन के दिन किसी भी व्यक्ति के जीवन के बड़े महत्वपूर्ण दिन होते हैं । हम सभी अपने बचपन में चिंतामुक्त जीवन जीते थे  । खेलने उछलने-कूदने, खाने-पीने में बड़ा आनंद आता था । माता-पिता, दादा-दादी तथा अन्य बड़े लोगों… Read More ›

# मेरी कुछ यादें # 

माना मैं तुम्हारे नए शहर की पुरानी इमारत ही सही, लोग आज भी मुझमे अपना बीता हुआ कल ढूंढते है | रांची को हमने खूब जिया है |  तब हम खगौल (पटना) से नए नए रांची आये थे | स्कूल की… Read More ›

# बेरुखी का दर्द #

यह कविता एक व्यक्ति के दर्द को दर्शाती है, जो अपने परिवार की बेरुखी से आहत है। वह अपनों से दूर होता जा रहा है, और उसे लगता है कि उसने अपना सब कुछ खो दिया है। कविता में दादाजी… Read More ›