बचपन के दिन किसी भी व्यक्ति के जीवन के बड़े महत्वपूर्ण दिन होते हैं । हम सभी अपने बचपन में चिंतामुक्त जीवन जीते थे । खेलने उछलने-कूदने, खाने-पीने में बड़ा आनंद आता था । माता-पिता, दादा-दादी तथा अन्य बड़े लोगों… Read More ›
#भावना
# मेरी कुछ यादें #
माना मैं तुम्हारे नए शहर की पुरानी इमारत ही सही, लोग आज भी मुझमे अपना बीता हुआ कल ढूंढते है | रांची को हमने खूब जिया है | तब हम खगौल (पटना) से नए नए रांची आये थे | स्कूल की… Read More ›
# बेरुखी का दर्द #
यह कविता एक व्यक्ति के दर्द को दर्शाती है, जो अपने परिवार की बेरुखी से आहत है। वह अपनों से दूर होता जा रहा है, और उसे लगता है कि उसने अपना सब कुछ खो दिया है। कविता में दादाजी… Read More ›
# मेरे आशावादी एहसास #
हर इंसान के अन्दर दो तरह के विचार पलते रहते है | .. जब सकारात्मकता हावी हो जाता है तो वह आशावादी हो जाता है और जब कभी नकारात्मकता हावी हो जाता है और वह इंसान निराशावादी बन जाता है… Read More ›
# रोटी की कहानी #
चार दोस्त रोज सुबह-शाम एक साथ पार्क में घूमते और गपशप करते | कभी – कभी वे सब पास के मंदिर में जाते और भगवान को शुक्रिया अदा करते कि उनकी बुढ़ापे की ज़िंदगी ठीक से कट रही है |… Read More ›
# Threads of My Superstition#
A Tale from Two Decades Ago This story unfolds two decades back when the winds of computerization were sweeping through our bank/ branch. During that technological transformation, I found myself caught in a web of superstitions that added a unique… Read More ›
# ज़िंदगी की परिभाषा #
एक प्रेरणादायक कविता , जो जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती है। यह कविता जीवन में आशा और निराशा, खुशी और गम, प्यार और दर्द, सपनों और यादों के मिश्रण को दर्शाती है। यह कविता हमें जीवन के प्रति एक… Read More ›
# हम भी गुलाम है #
गुलाम हुआ है इंसान कुछ इस कदर मोबाइल का रिश्ते मिलने को तरसते है, चाय के टेबल पर यह सच है दोस्तों कि आज कल एक छोटी सी निर्जीव वस्तु ने हम सब को अपना गुलाम बना रखा है |… Read More ›
बुरा न मानो होली है
दोस्तों , आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं … एक बार फिर आज हमलोग होली मनाने जा रहे है | आज होलिका दहन है ,लेकिन बारिश होने की वजह से कुछ खास मज़ा नहीं आ रहा है | हालाँकि… Read More ›
# मुर्ख कौन ?
दोस्तों, आज कल हम बिहार दिवस पखवारा मना रहे है | हमारे मन में विचार आया कि आज एक लोक कथा की चर्चा की जाए | मुझे अपनी बचपन की याद आ रही है जब ऐसी लोक कथाएं मेरी माँ… Read More ›