#भावना

# ए मेरे शहर…

यह कविता एक ऐसे शहर को संबोधित है जो सिर्फ़ ईंट-पत्थर का नहीं, बल्कि यादों, रिश्तों और बीते हुए समय का घर है। यह बचपन की मासूमियत, दोस्ती की गर्माहट और उम्र के साथ आए सन्नाटे के बीच का एक… Read More ›

# हाँ, मैं सड़क हूँ #

हाँ, मैं सड़क हूँ, हाँ, मैं सड़क हूँ,अनगिनत मौसमों की गवाह।धूप की तपिश सहती,बारिश की ठंडक ओढ़े,मैं यहीं की यहीं पड़ी हूँ..स्थिर, मगर सब कुछ देखती हुई। रोज़ नए मुसाफ़िर मुझ पर से गुज़रते हैं,कुछ अपने से, कुछ बिल्कुल अजनबी।सब… Read More ›

“अधूरे लम्हों की गर्माहट ”

यह कविता खोए हुए स्पर्श, अधूरे लम्हों और आजीवन चलने वाली मोहब्बत की वह खामोश तड़प बयां करती है, जो दिल को तोड़ती भी है और भरती भी है। # अधूरे लम्हों की गर्माहट # हवाओं में खोए हुए वो… Read More ›

# रूह का सफ़र #

रूह का सफ़र”—यह केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि एक ऐसा आंतरिक अनुभव है जहाँ मन अपनी गहराइयों में उतरकर खुद से मिलता है। इस सफ़र में दुनिया की चमक-दमक, नाम-दौलत, रिश्तों की भाग-दौड़ सब पीछे छूट जाते हैं, और… Read More ›

# वक़्त का पैग़ाम #

यह कविता “वक्त” की अनमोलता और उसकी विविधताओं पर केंद्रित है। यह बताती है कि जीवन में सुख-दुःख, संघर्ष और सफलता का अनुभव समय के साथ आता है। जो व्यक्ति समय की चाल को समझकर उसके अनुसार चलता है, वही… Read More ›

# ख्वाबों के पंख#

यह कविता उन ख्वाबों और इच्छाओं के बारे में है जिन्हें हम अपने भीतर संजोते हैं। डर और असफलताओं के बावजूद, असली खतरा तब होता है जब हम अपने ख्वाबों को मरने देते हैं और जिंदा रहकर भी अपने अंदर… Read More ›