#खुशी

#मन की कलम से# 

आज कल भगवान मेरी कोई प्रार्थना नहीं सुनते है। इसकी कोई ठोस वजह मुझे नज़र नहीं आता है | लोग कहते है कि भगवान को  साफ़ –  सफाई बहुत पसंद है … मैं घर में और अपने आस पास खूब… Read More ›

# मेरा ही अक्स है # 

कभी – कभी ऐसा महसूस होता है कि  बाहर चारों तरफ खुशियाँ है पर मेरे अंदर नहीं | मेरा मन हमेशा किसी न किसी बात से आहत  होता रहता है | ऐसा क्यों होता है, पता नहीं | मैं तो… Read More ›

# अलमारी से झांकती किताबें # 

यूँ ना छोड़ ज़िन्दगी की किताब को खुला बेवक्त की हवा ना जाने कौन सा पन्ना पलट दे .. आज सुबह सुबह जब मैं पार्क में टहलने गया तो  कुछ दोस्त वहाँ  मिल गए , दुआ सलाम के बाद हमलोग… Read More ›

#मैं कुछ अजूबे लिखना चाहता हूँ # 

हर मनुष्य का यही लक्ष्य होता है कि वह हमेशा खुश रहे | इसके लिए तरह तरह के उपाय ढूंढता है, लेकिन आज के बाहरी माहौल कुछ इस तरह का है कि हम उससे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते… Read More ›

#मोहब्बतें बेच रहा हूँ# 

आज जब समाचार पत्र पर नजरे  जाती है तो ऐसा महसूस होता है कि आज नफ़रतों का बाज़ार गरम है | ज़्यादातर समाचार मन को दुख पहुँचने वाली ही होती है | ऐसा लगता है जैसे आपसी भाई-चारा और प्रेम… Read More ›

#किस्मत की लकीरें #– 13 

तुम्हारे प्यार की दास्तान हमने अपने दिल में लिखी है न थोड़ी न बहुत , बे-हिसाब लिखी है किया करो हमें भी अपनी दुआओं में शामिल हमने अपनी हर एक सांस तुम्हारे नाम लिखी है | वह पत्रकार अचानक कालिंदी… Read More ›

# किस्मत की लकीरें #– 12 

कौन कहता है कि इंसान किस्मत खुद लिखता है अगर यह सच है तो किस्मत में दर्द कौन लिखता है .. कालिंदी  ऑफिस में पहुँच कर बड़े साहब का अभिवादन किया | कालिंदी को देखते ही बड़े  साहब अपने कुर्सी… Read More ›