#खुशी

#मुर्ख कौन ? 

दोस्तों, आज कल हम बिहार दिवस पखवारा मना रहे है | हमारे मन में विचार आया कि आज एक लोक कथा  की चर्चा की जाए | मुझे अपनी बचपन की याद आ रही  है जब  ऐसी लोक कथाएं  मेरी माँ… Read More ›

#पुनर्जन्म की घटना # -2 

सचमुच पांच साल की बच्ची शांति के द्वारा कही गयी पिछले जनम की बातें सुन कर सभी लोग हैरान थे , लेकिन सब कुछ सच लगते हुए भी विश्वास करना कठिन हो रहा था | रंग बहादुर की मुसीबतें बढती… Read More ›

#बुढ़ापे की सोच# 

बुढ़ापे से कोई नहीं बचा है | जो आज बूढ़े है वो कल जवान थे  और जो आज जवान है उनको  कल बूढ़ा होना है | यह सार्वजनिक सत्य है कि जवानी वो होती है जो जा कर  नहीं आती… Read More ›

#कोलकाता की यादें# 

बात उन दिनों की है जब मुझे पहली बार कोलकाता में पोस्टिंग  मिली थी | साल २००४ में मैं कोलकाता के एक शाखा में ज्वाइन किया था | मुझे मेट्रो शहर में रहने का कोई अनुभव नहीं था, इसलिए मैं घबरा रहा था | लेकिन  संयोग से… Read More ›

# और गुल्लक फूट गया # 

मिश्रा जी, वैसे तो सारी ज़िंदगी बैंक के काम करते हुये बिता चुके थे | लेकिन बचपन से ही  उनके मन में  हिन्दी साहित्य के प्रति खास आकर्षण था | अब रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपने जवानी के दिनों  में… Read More ›

# एक प्रेम ऐसा भी #

प्रेम करने वाला व्यक्ति प्रेम तो कर लेता है परंतु उसको ठीक से निभा नहीं पाता है | वास्तविक बात करें,  तो प्रेम करने से कई गुना कठिन काम है प्रेम को निभाना | प्रेम में दोनों तरफ आँखों पर… Read More ›

#मन की कलम से# 

आज कल भगवान मेरी कोई प्रार्थना नहीं सुनते है। इसकी कोई ठोस वजह मुझे नज़र नहीं आता है | लोग कहते है कि भगवान को  साफ़ –  सफाई बहुत पसंद है … मैं घर में और अपने आस पास खूब… Read More ›

# मेरा ही अक्स है # 

कभी – कभी ऐसा महसूस होता है कि  बाहर चारों तरफ खुशियाँ है पर मेरे अंदर नहीं | मेरा मन हमेशा किसी न किसी बात से आहत  होता रहता है | ऐसा क्यों होता है, पता नहीं | मैं तो… Read More ›