Originally posted on Retiredकलम:
साधारणतया यह देखा गया है कि रिटायरमेंट के बाद की ज़िन्दगी में बोरियत महसूस होने लगती है, क्योंकि अचानक हम Busy life से Empty life में आ जाते है | मुझे भी कुछ दिनों तक ऐसा…
Uncategorized
हर ब्लॉग कुछ कहता है …1
Originally posted on Retiredकलम:
जीवन का मूलमंत्र मैं अभी अभी मोर्निंग- वाक से आया हूँ | सुबह के आठ बज रहे है और चाय का कप मेरे सामने है | ????चाय की चुस्की लेते हुए मैं कुछ लिखने का प्रयास…
# मंदिर के भगवान #
Originally posted on Retiredकलम:
आज अचानक मेरे मोबाइल की घंटी बजी | मुझे फ़ोन करने वाले की आवाज अजनबी लगी और number भी अनजाना / मैंने तुरंत ही कहा — रौंग नम्बर और फ़ोन काट दिया | थोड़ी देर के…
# समय की कीमत #
Originally posted on Retiredकलम:
लोग कहते है ..time is money, so Don’t waste your time, value it ..पैसे की बर्बादी और समय की बर्बादी में एक ही अंतर है .| .खोए धन को वापस अर्जित कर सकते है पर बिता…
# हँसना क्यों ज़रूरी है #? ?
Originally posted on Retiredकलम:
कुछ दिनों पूर्व मुझे दिल्ली जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ | वैसे भी pandemic के कारण? काफी दिनों से डर डर? कर जी रहे थे | अब जब वैक्सीन मार्किट में आ गया है तो मुझे…
किस्मत की लकीरें – 13
Originally posted on Retiredकलम:
तुम्हारे प्यार की दास्तान हमने अपने दिल में लिखी है न थोड़ी न बहुत , बे-हिसाब लिखी है किया करो हमें भी अपनी दुआओं में शामिल हमने अपनी हर एक सांस तुम्हारे नाम लिखी है |…
धुंध की दीवार – 5
Originally posted on Retiredकलम:
OLYMPUS DIGITAL CAMERA मंजिल उन्ही को ?मिलती है …जिनके सपनों में जान होती है पंखो से कुछ नहीं होता…. हौसलों से उड़ान होती है आनंद में अचानक आये इस बदलाव से निशा को थोडा आश्चर्य…
# किस्मत की लकीरें #– 12
Originally posted on Retiredकलम:
कौन कहता है कि इंसान किस्मत खुद लिखता है अगर यह सच है तो किस्मत में दर्द कौन लिखता है .. कालिंदी ?ऑफिस में पहुँच कर बड़े साहब का अभिवादन किया | कालिंदी को देखते ही…
# किस्मत की लकीरें # – 11
Originally posted on Retiredकलम:
अपने हौसले को यह मत बताओ कि तुम्हारी परेशानी कितनी बड़ी है, अपनी परेशानी को यह बताओ कि तुम्हारा हौसला कितना बड़ा है .. उन पाँच खतरनाक अपराधियों के मारे जाने की खबर चारो? तरह आग…
# धुंध की दीवार # – 4
Originally posted on Retiredकलम:
चट्टान_सी सुदृढ दिखती हूँ.. हमेशा- मुस्कुराहट रहती है_ चेहरे पर… पर_ मैं_भी टूटती हूँ.. बिखरती हूँ., मोम की तरह_ पिघल भी जाती हूँ.. काश! इस बात को_ तुम समझते ..! इस ख़्याल से नम हुए पलकों…