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#रिक्शावाला की अजीब कहानी#…12 

चिल-चिलाती धूप में सड़क पर है रिक्शा दौड़ता, किसी अपनों के सपने संजोये है रिक्शा दौड़ाता . छिपाते हुए अपने मुफलिसी के घावों को देखो, वो जा रहा अपने गाँव है रिक्शा दौड़ाता….. कल रात की घटना को याद करके… Read More ›

# रिक्शावाला की अजीब कहानी #…11 

आज सुबह सो कर उठा तो मेरा मन बहुत घबरा रहा था | काका के बिना अकेले इस घर में बिलकुल भी मन नहीं लग रहा था | रात में भी सामने चाय की दुकान के पास कुत्ता रो रहा… Read More ›

# रिक्शावाला की अजीब कहानी # ..10 

आज सुबह सुबह रघु काका ने आवाज़ लगाई….क्या राजू, अभी तक सो रहे हो | पता है, दिन चढ़ आये है | मैंने आँखे खोली और कहा … पता है काका,  लेकिन ज़ल्दी उठ कर भी क्या  करना है |… Read More ›

# रिक्शावाला की अजीब कहानी #….9 

क्या कभी लौट पाओगे तुम, हर दिन तुम्हारा इंतेज़ार करता हूँ कि  तुम    लौट    आओगे मगर   जानता   हूँ    कि लौटना आसान नहीं है तुम्हारे लिये मैं हर दिन इक कोशिश करता हूँ घडी की समय को पीछे कर जाऊँ एक… Read More ›

# रिक्शावाला की अजीब कहानी #…8 

कभी – कभी ज़िन्दगी में ऐसा मोड़ आ जाता है .. जहाँ से ना तो “ऑटो” मिलता है और ना “रिक्शा” बस, हमें पैदल ही चलना पड़ता है …..  अंजिला को उसके होटल छोड़ कर रघु  काका के झोपडी की… Read More ›

#रिक्शावाला की अजीब कहानी# …7

मैं आश्चर्य चकित हो बस अंजिला को ही देखे जा रहा था | वो किसी भी तरह से विदेशी नहीं लग रही थी | उसके हाव – भाव, सोच -विचार और एक दुसरे के साथ मिलकर रहने और आपस में… Read More ›

# रिक्शावाला की अजीब कहानी #….6 

आज अंजिला बहुत खुश थी, और खुश क्यों ना हो भला | आज उसके शोध के कुछ पेपर पब्लिश हुए थे और उसे काफी सराहना मिल रही थी | सचमुच उसने अपनी शोध पर बहुत मेहनत  की थी और उसकी… Read More ›

#रिक्शावाला की अजीब कहानी #…5

आज जब सुबह उठा तो मेरे दिल और दिमाग में एक द्वंद चल रहा था ..क्योकि रघु काका की बात याद आ रही थी … हमें अपने औकात में रहना चाहिए | जब उनसे आशीर्वाद लेने गया था तो उनका मुझसे गुस्सा… Read More ›

#रिक्शावाला की अजीब कहानी# …..4

मेरा दिल भी तुझपे क़ुर्बान है क्या तुझमें  बसती  मेरी जान है क्या आँसू से ख़ून होने तक रुलाती है दिल्लगी इतनी भी आसान है क्या.. अंजिला नयी रिक्शा पर बैठते ही पूछा … राजू, तुम “ई- रिक्शा” चला तो… Read More ›