परेशाँ हूँ झुलसा चेहरा भुलाया भी नहीं जाता किसी से हाल-ए-दिल अपना सुनाया भी नहीं जाता वो आ जाए तो ये भी कह नहीं सकता ठहर जाओ अगर वो जा रहा हो तो बुलाया भी नहीं जाता | दोस्तों, आज… Read More ›
story
#लोकल ट्रेन में एक बार#
हेलो फ्रेंड्स, मैंने अपने बैंकिंग सफ़र में सबसे लम्बा समय कोलकाता में बिताये है | यहाँ चार शाखाओं में अलग अलग समय पर कार्य करते हुए करीब 11 साल व्यतीत किये है | यहाँ रहने के दौरान बहुत से खट्टे-… Read More ›
#Journey begins with a single step#
Friends, Let’s talk about energy. Our energy levels can have a huge impact on our ability to achieve our goals and live our lives to the fullest. If we are constantly tired and drained, it can be difficult to find… Read More ›
# डर के आगे जीत है #
बात उन दिनों की है, जब हमारी ज़िन्दगी की सबसे हसीन वो लम्हे .–.बैंक नौकरी की Joining Letter हाथ में थी | बैंक था “बैंक ऑफ़ इंडिया” और जगह थी “झुमरीतिलैया” | उन दिनों इस जगह की बड़ी चर्चा होती थी, क्योकि… Read More ›
# Three Idiots #
आज “ईस्टर” है और इस मौके पर मुझे मेरे बहुत पुराने और अज़ीज़ दोस्त सुदर्शन की याद आ गई | हालाँकि ज़िन्दगी की व्यस्तता के कारण बहुत दिनों के उससे बात नहीं हो सकी थी | उसका पुराना number पर… Read More ›
# ऐसा भी होता है #
मैं ने उत्पल दास से विनती भरे स्वर में कहा कि किसी तरह उस बुढिया के मकान में रहने की जुगाड़ कराओ , क्योकि तीन दिनों के भीतर पहले वाला मकान खाली करना है | मैं बहुत परेशान हूँ |… Read More ›
# शरीफ बदमाश #
वो खडूस बुड्ढा जब भी मुझे देखता उसके चेहरे पर तनाव के भाव उभर आते, और मुझे भी उसको देख कर गुस्सा आ जाता था, लेकिन अपनी पोजीशन का ख्याल कर उसके ऊपर नज़र पड़ते ही अपनी नज़र दुयरी ओर… Read More ›
# बुड्ढा मिल गया #
नवीन आज कल बहुत खुश था | उसका तरकीब काम कर गया, जिसके कारण हमारा बैडमिंटन ( badminton) खेलने का कार्यक्रम लगभग बंद ही हो गया था | इसके दो कारण थे …. पहला यह कि अब मुझे खाना बनाने… Read More ›
#My Journey of Life#
The journey of life is a rollercoaster ride filled with ups and downs, twists and turns, and unexpected surprises. Each of us has our own unique path that we use to traverse. My journey in life has been no different,… Read More ›
# हमारी लोक कथाएं #
हमारे बचपन के समय में न तो TV था और न इन्टरनेट का ज़माना था .. उस समय हमारे दादा – दादी हमें सुलाने के लिए लोक कथाएं सुनाया करते थे | और हमें इन कहानियों को सुनते – सुनते… Read More ›