#जीवन

# तन्हाई के बादल #

यह ग़ज़ल एक संवेदनशील आत्मा की कहानी कहती है, जो जीवन की भीड़-भाड़ और जगमगाहट के बीच अपनी पहचान तलाशता है। सपनों के अधूरेपन, तन्हाई और भीतर की बेचैनी के बावजूद, वह अपने ज़ख़्मों को शब्दों में ढालकर मुस्कुराना सीखता… Read More ›

“यादों के ज़ख़्म”

यह कविता टूटे रिश्तों और खोए सुकून की तड़प को बयां करती है। कभी दिल के करीब रहने वाले, अब अजनबी हो गए हैं। उनकी यादें मरहम की जगह ज़ख़्म बनकर उभरती हैं और ज़िंदगी ग़म का बोझ ढोती नज़र… Read More ›

# समय का आईना #

यह कविता समय के साथ हमारे रिश्ते का आईना है। हम अक्सर उसकी कमी की शिकायत करते हैं, पर सच्चाई यह है कि समय सबको बराबर मिलता है—धूप की तरह, जो हर आँगन में एक-सी उतरती है। फर्क बस इतना… Read More ›

# आईना हूँ मैं #

आईना हूँ मैं” एक आत्मदर्शी कविता है, जो हमें आम ज़िंदगी की भीतरी परतों की ओर ले जाती है। यह केवल चेहरे को नहीं, बल्कि आत्मा की उस छवि को भी देखती है जिसे हम अक्सर नजरअंदाज़ कर देते हैं।… Read More ›

# तेरे मेरे इश्क़ का…एक ग़ज़ल

प्रेम एक ऐसा अहसास है, जो समय के साथ भले ही बदल जाए, पर उसकी यादें मन में हमेशा ताज़ा रहती हैं। प्रस्तुत ग़ज़ल “तेरे मेरे इश्क़ का…” एक मधुर स्मृति है उन पलों की, जब दो दिल बेपनाह मोहब्बत… Read More ›