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# एक अधूरी प्रेम कहानी #…8

   मैं तेरी दीवानी अनजान राहों में मिले थे हम, अजनबी कहानी थी, दरमियाँ अपने खामोश निगाहें थी, मंजिल अनजानी थी मैं जान लूँ कुछ तुमको .. ये तो बस  बहाना  था मैं तेरी दीवानी थी …. तू  मेरा दीवाना… Read More ›

# एक अधूरी प्रेम कहानी #…7

ज़िन्दगी की तलाश यह कैसे हो गया ?….मेरी आँखों के नीचे घाव को देख कर सुमन चिंतित हो कर पूछ बैठी | बस छोटी सी घाव है, ठीक हो जाएगा  …मैं हँसते हुए ज़बाब दिया | मैं कुछ बोलता ,उससे… Read More ›

# एक अधूरी प्रेम कहानी #..6

दर्द …जब आँखों से निकला , तो सब ने कहा…”कायर” है ये.. दर्द ….जब लब्जो से निकला, तो सब ने कहा….”शायर” है ये.. दर्द…. जब मुस्कुरा के निकला, तो सब ने कहा….”लायर” है ये … तुम मेरे हो रघु अपने… Read More ›

# एक अधूरी प्रेम कहानी #…5

होश के साहिल पे मुझको अब ना आने दीजिये, आज तो बस मस्तियों में ..डूब जाने दीजिये  | आप को भी है खबर  ये क्या नशीला दौर है, आज का ये खुशनुमा ..माहौल ही कुछ और है | एहसान आप… Read More ›

# एक अधूरी प्रेम कहानी #…4

वफ़ा की तलाश… करते रहे हम शहर दर शहर.. भटकते रहे हम नहीं मिला दिल से चाहने वाला बेवफाई में अकेले.. मरते रहे हम वफा की तलाश मैं हॉस्पिटल के बेड पर आँखे बंद किये मन ही मन  सोच रहा… Read More ›

# एक अधूरी प्रेम कहानी #…3

एक मजदूर की प्रेम कथा यह सच है कि पेट की आग के सामने दुसरे सभी आग ठंडा पड़ जाता है |  लेकिन मेरे लिए तो पेट की आग के आलावा भी दिल की आग लगी हुई थी जिसके कारण … Read More ›

# एक अधूरी प्रेम कहानी #…2

एक प्रवासी का दर्द मैं  धारावी से मुंबई स्टेशन पर पहुँचा तो गाँव के कुछ और साथी  पहले से ही  इंतज़ार कर रहे थे | हम सभी मुँह पर मास्क लगाए थे और हिदायत दी गई नियमो का पालन कर… Read More ›

# एक अधूरी प्रेम कहानी #…1

धारावी मुंबई शहर का जाना माना और एशिया का सबसे बड़ा स्लम बस्ती / जिसमे करीब १० लाख लोग चाल / खोली में रहते है / रघु बिस्तर पर लेटा  सोच रहा था कि आज की रात पता नहीं कैसे… Read More ›

एक सवाल ..

(के. के.. की कहानी … के. के. की जुबानी ) दोस्तों,..तुम्हारा दोस्त कृष्णा कुमार उर्फ़ के. के. आज तुम सबों के बीच  हाज़िर है अपने संस्मरण के साथ,   जिसका शीर्षक है  “एक सवाल” .. आजकल व्हाट्सअप पर vijay verma का… Read More ›

# इस रिश्ते को क्या नाम दूँ # …26

आज तीन दिनों की छुट्टी के बाद बैंक खुला, तो भीड़ होना स्वाभिक था | मैं कुछ परेशान सा ब्रांच को सामान्य करने की कोशिश कर रहा था | तभी मेरे चैम्बर में फ़ोन की घंटी बज उठी |  मैं… Read More ›