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#रिक्शावाला की अजीब कहानी #….3

हूँ गरीब,  गरीबी से, अब  तक लड़ता आया हूँ। कुदरत के हर मार को, अब तक सहता आया हूँ।। जो भी बन सका मुझसे, सवाभिमानि बन सब किया, ईमानदारी और मेहनत से, पेट  पालता आया हूँ।। जो किस्मत करता है,… Read More ›

# रिक्शावाला की अजब कहानी # ….2

अंजिला ने पता नहीं क्या जादू कर रखा था कि हमेशा मैं सिर्फ उसके बारे में ही सोचता रहता था | वह मुझे राजेंदर नहीं बल्कि “राजू”  कह कर बुलाती थी, जिसे सुनकर मुझे अपनापन का एहसास होता था |… Read More ›

# रिक्शावाला की अजब कहानी #-1

दोपहर का समय था और मैं ( राजेंदर) खाना खा कर अपने रिक्शा पर बैठा आराम कर रहा था | थोड़ी  ही देर में ही मुझे गुज़रे समय की बातें याद आ रही थी | मैं अपने अतीत में खो… Read More ›

# किस्मत की लकीरें #–9

मुझे इतनी फुर्सत कहाँ कि अपनी तकदीर का लिखा देख सकूँ.. बस माँ की मुस्कराहट देख कर समझ जाता हूँ कि मेरी तकदीर बुलंद है … आज सुबह कालिंदी देर तक सो रही थी, क्यों कि कल की भागा दौड़ी में… Read More ›

#किस्मत की लकीरें #– 13

तुम्हारे प्यार की दास्तान हमने अपने दिल में लिखी है न थोड़ी न बहुत , बे-हिसाब लिखी है किया करो हमें भी अपनी दुआओं में शामिल हमने अपनी हर एक सांस तुम्हारे नाम लिखी है | .. वह पत्रकार अचानक… Read More ›

# किस्मत की लकीरें #– 12

कौन कहता है कि इंसान किस्मत खुद लिखता है अगर यह सच है तो किस्मत में दर्द कौन लिखता है .. कालिंदी  ऑफिस में पहुँच कर बड़े साहब का अभिवादन किया | कालिंदी को देखते ही बड़े  साहब अपने कुर्सी… Read More ›

# किस्मत की लकीरें # – 11

अपने हौसले को यह मत बताओ कि तुम्हारी परेशानी कितनी बड़ी है, अपनी परेशानी को यह बताओ कि तुम्हारा हौसला कितना बड़ा है .. उन पाँच खतरनाक अपराधियों के मारे जाने की खबर चारो  तरह आग की तरह फ़ैल गयी… Read More ›

# किस्मत की लकीरें #– 10

मंगलू के इतिहास और काले कारनामो की  लिस्ट लम्बी थी | कालिंदी बड़े ध्यान से उसके फाइल का अध्ययन कर रही थी तभी उस के  मोबाइल की घंटी बजी | कालिंदी ने जैसे ही फ़ोन उठाया तो उधर से आवाज़ … Read More ›

# किस्मत की लकीरें # – 8 

एक अलग ही पहचान बनाने की आदत है मेरी तकलीफों में भी मुस्कराने की आदत है मेरी कालिंदी अपने बड़े साहब से शाबाशी पाकर बहुत खुश थी | लेकिन यह भी सच है कि रात दिन काफी प्रयास करने के… Read More ›

#किस्मत की लकीरें# …7

कितना भी पकड़ लो, ….फिसलता ज़रूर है ये वक़्त है साहब ……बदलता ज़रूर है … काफी लोगों की भीड़ वहाँ इकट्ठी हो चुकी थी. | सभी लोगों को ऐसा लग रहा था कि खदान में ज़ल्द ही पानी भर जायेगा… Read More ›