story

# कलयुग का दशरथ # …3 

आज दशरथ बहुत खुश था | सुबह- सुबह ही अपने वृद्धाश्रम से चल कर कौशल्या के पास आ गया था. क्योकि अपने डॉ साहब के हॉस्पिटल में न तो समय का बंधन है और ना ही खाने पीने  की तकलीफ… Read More ›

# कलयुग का दशरथ #…2 

आप अपनी पत्नी का मेडिकल रिपोर्ट लेकर आइयेगा  और उसके बाद मैं स्पेशलिस्ट डॉक्टर से इस पर विचार – विमर्श करूँगा | ज़रुरत पड़ी तो हमलोग उस हॉस्पिटल में जाकर उनकी स्थिति की जांच भी करेंगे …डॉक्टर साहब, दशरथ को… Read More ›

# कलयुग का दशरथ #…1

आज डॉ साहब के क्लिनिक पर बहुत  भीड़ थी | दशरथ जब कम्पाउण्डर के पास पहुँचा तो उसने बताया कि उसका नंबर सातवां है |  करीब आधा घंटे बाद उसका नंबर आएगा | लेकिन दशरथ ने कम्पाउण्डर  से विनती किया… Read More ›

# नमक हराम #….12

जीत और हार आप की सोच पर ही निर्भर करती है मान लो तो हार होगी और ठान लो तो जीत होगी | अंत भला तो सब भला राजेश्वर के पास ठीक बीस दिनों के बाद बड़े वकील साहब का… Read More ›

# नमक हराम #….11 

बस यही सोच कर हर मुश्किलों से लड़ता आया हूँ धुप कितनी भी तेज़ हो समंदर नहीं सुखा करते | सत्य की जीत राजेश्वर  ज्योहिं चैम्बर में घुसा, उसने बड़े वकील साहब के सामने अपने हाथ जोड़ लिए | उसके… Read More ›

# नमक हराम #….10 

दिल से बड़ी कोई कब्र नहीं होती हर रोज़ कोई न कोई एहसास दफ़न होता है | पासा पलट गया वकील साहब तैयार किया हुआ वकालतनामा राजेश्वर को देते हुए कहा… आप इस पर दस्तखत कर दें |  इसे कल… Read More ›

# नमक हराम #….9

ज़िन्दगी कैसी अजीब हो गयी है खुश दिखना ,खुश रहने से ज्यादा हो गया है हार नहीं मानूंगा राजेश्वर खेतिहर मजदूर  के रूप में राम खेलावन की खेत पर काम कर रहा है | सोच रहा है कि भगवान् ने… Read More ›

# नमक हराम #….8

इमानदारी की राह पर चलते चलते पहुँच गया हूँ बेईमान शहर में हर कदम पर ठोकर हूँ खाता गिर जाता हूँ खुद की नजर में… ज़माना बेईमान हो गया राजेश्वर जैसे ही सुना कि उसका खेत कोई दूसरा आदमी जोत… Read More ›

# नमक हराम #….8 

इमानदारी की राह पर चलते चलते पहुँच गया हूँ बेईमान शहर में हर कदम पर ठोकर हूँ खाता गिर जाता हूँ खुद की नजर में… ज़माना बेईमान हो गया राजेश्वर जैसे ही सुना कि उसका खेत कोई दूसरा आदमी जोत… Read More ›

# नमक हराम #….7 

कौन किसे दिल में ज़गह देता है पेड़ भी सूखे पत्ते गिरा देता है वाकिफ है हम दुनिया के रस्मों-रिवाजों से दिल भर जाए फिर हर कोई भुला देता है … मेरी प्रतिज्ञा है राजेश्वर थका हारा गुस्से में पंचायती… Read More ›