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# साथी हाथ बढ़ाना # 

रमेश अपने पेंशन का पैसा बैंक से निकाल कर घर की तरफ चल पड़ा | गर्मी बहुत थी सो वह रास्ते के किनारे पेड़ की छाँव में एक चबूतरे पर बैठ गया | अचानक उसकी नज़र उस पेड़ से लटक रही… Read More ›

# एक प्रेम ऐसा भी # 

प्रेम करने वाला व्यक्ति प्रेम तो कर लेता है परंतु उसको ठीक से निभा नहीं पाता है | वास्तविक बात करें,  तो प्रेम करने से कई गुना कठिन काम है प्रेम को निभाना | प्रेम में दोनों तरफ आँखों पर… Read More ›

# इस रिश्ते को क्या नाम दूँ #…26

आज तीन दिनों की छुट्टी के बाद बैंक खुला, तो भीड़ होना स्वाभिक था | मैं कुछ परेशान सा ब्रांच को सामान्य करने की कोशिश कर रहा था | तभी मेरे चैम्बर में फ़ोन की घंटी बज उठी |  मैं… Read More ›

# संघर्ष ही ज़िन्दगी है #..25 

आज शिवगंज शाखा में मेरा पहला दिन | मैं अपनी सीट पर बैठने वाला था कि चपरासी “कालू राम” दौड़ता हुआ मेरे पास आया और बोला आप इस सीट पर बैठने के पहले हमलोगों का मुँह मीठा तो करा दीजिये… Read More ›

# दिल की बातें # …24

हमलोग  “महावीर टाकीज़” से मूवी देख कर निकलते हुए काफी खुश थे | ना जाने कितने दिनों बाद आज मूवी देखने का मौका मिला था, वो भी दोस्तों के साथ | शिवगंज में रहने से एक फायदा यह भी है… Read More ›

# हँसते ज़ख्म #…23 

चुप चुप सी मोहब्बत में नकाब हजारों हैं …. बात नहीं होती तो क्या हुआ , खामोशियों में ज़बाब हजारों हैं दुनिया की नज़र में अजनबी हो तुम , मगर दरमियाँ अपने हिसाब हजारों है | मेरी जीप गाँव के… Read More ›

# मेरे अधूरे सवाल # ..22 

एक अधुरा सवाल है उनसे जो परेशान करता है एक चेहरा है उनका जो सोने नहीं देता कभी कभी ज़िन्दगी भी ऐसे ही चलती है… इस बैंक की नौकरी  का पहला ट्रान्सफर था .. या कह सकते है …..ज़बरन स्थानांतरण… Read More ›

# एक सजा और सही #…21 

इलायची की महक ओढ़े अदरक का श्रृंगार करके सजी थी, केतली की दहलीज़ से निकल कर प्याली की डोली में वो बैठी थी इस भागते हुए वक़्त पर…. कैसे लगाम लगाया जाए ऐ वक़्त …तू  बैठ इधर , तुझे एक… Read More ›