#happiness

……..अपने भीतर के बच्चे को ज़िंदा रखिए #

चलो, आज फिर बच्चा बन जाएँ | “हर इंसान के भीतर एक बच्चा छिपा होता है, जो अवसर मिलने पर खुलकर हँसना, खेलना और जीवन को महसूस करना चाहता है।” जब हम बच्चे थे, तब हमें जल्दी थी बड़े हो… Read More ›

# मैं कौन हूँ ? शायद एक अधूरी कहानी…

मैं कौन हूँ? शायद एक अधूरी कहानी… कभी-कभी लोग पूछ लेते हैं—”विजय जी, आप आखिर हैं कौन?” यह प्रश्न सुनने में जितना सरल लगता है, उसका उत्तर उतना ही कठिन होता है। क्योंकि इंसान केवल नाम, पेशा या रिश्तों का… Read More ›

# खुशियों की तलाश #

यह कविता जीवन के सरल लेकिन गहरे सत्य को दर्शाती है कि खुशियाँ दूर नहीं होतीं। हम उन्हें दुनिया की भीड़ और सफलताओं में खोजते हैं, लेकिन वे हमारे रिश्तों, छोटी मुस्कानों और वर्तमान क्षणों में छिपी होती हैं। जैसे… Read More ›