#creativity

# What the Mirror Teaches Me #

When I was a little boy, the mirror wasn’t just glass—it was magic. मैं शीशे में खुद को अलग-अलग angles से निहारता था।कभी अपने बाल संवारता, कभी शक्लें बनाता,कभी रसोई में पड़े थाली की चमक मेंअपना चेहरा देखकर हँस देता।… Read More ›

# एक किताब की तरह हूँ मैं #

यह कविता जीवन की गहराइयों, रिश्तों की पेचिदगियों और आत्मा की निश्छल सच्चाई को दर्शाती है। हर इंसान की ज़िंदगी एक किताब की तरह होती है — कुछ पन्ने उजले, कुछ धुँधले; कुछ लोग बस ऊपर-ऊपर देखते हैं, जबकि कुछ… Read More ›