#कविता

# मेरी पहचान # 

मैं अपनी पहचान ढूंढ रहा हूँ | मेरी पह्चान क्या है — जब हम माँ की कोख में थे तो पूरी दुनिया हमें हमारी माँ के मध्यम से जान पाती थी | जब हम धरती पर पहला कदम रखते है… Read More ›

#मन की कलम से# 

आज कल भगवान मेरी कोई प्रार्थना नहीं सुनते है। इसकी कोई ठोस वजह मुझे नज़र नहीं आता है | लोग कहते है कि भगवान को  साफ़ –  सफाई बहुत पसंद है … मैं घर में और अपने आस पास खूब… Read More ›

# मेरा ही अक्स है # 

कभी – कभी ऐसा महसूस होता है कि  बाहर चारों तरफ खुशियाँ है पर मेरे अंदर नहीं | मेरा मन हमेशा किसी न किसी बात से आहत  होता रहता है | ऐसा क्यों होता है, पता नहीं | मैं तो… Read More ›

#मैं कुछ अजूबे लिखना चाहता हूँ # 

हर मनुष्य का यही लक्ष्य होता है कि वह हमेशा खुश रहे | इसके लिए तरह तरह के उपाय ढूंढता है, लेकिन आज के बाहरी माहौल कुछ इस तरह का है कि हम उससे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते… Read More ›

#मोहब्बतें बेच रहा हूँ# 

आज जब समाचार पत्र पर नजरे  जाती है तो ऐसा महसूस होता है कि आज नफ़रतों का बाज़ार गरम है | ज़्यादातर समाचार मन को दुख पहुँचने वाली ही होती है | ऐसा लगता है जैसे आपसी भाई-चारा और प्रेम… Read More ›