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# अच्छे कर्मो का फल #

किसी ने बड़े कमाल की बात कही है कि कैलंडर हमेशा तारीखे बदलता रहता है लेकिन एक दिन, एक तारीख ऐसी भी आती है जो हमेशा के लिए उस कैलेंडर को  ही बदल देती है | इसीलिए हमलोगों को सब्र… Read More ›

# ममता की छाँव में #….

नयना आज बहुत उदास थी, क्योकि आज उसकी माँ की  बरसी  थी | आज सुबह – सुबह  उसने  माँ के फोटो  के सामने एक कैंडल जलाया और एक बुके रख कर फुट फुट रोई | आज उसे  फिर वो सारी … Read More ›

# जोश में होश खोना नहीं #

 ऐसा नही होनी चाहिए कि आप अपनी अहमियत इसलिए कम कर दें कि आप लोगों की अपेक्षाओं में खड़े उतर सकें है | आप जैसे है वैसे ही ठीक है , दुसरे हमारे बारे में क्या सोचते है, इसकी परवाह… Read More ›

आज का समय उनके नाम

  जो कल तक हमेशा शिकायत करते थे कि हमारे पास  family के लिए समय   ही नहीं मिलता है और ना ही अपने माता पिता  की देख भाल ठीक से कर पाता हूँ | आज वही फिर रो रहे… Read More ›

# घर का सुख #

आज हमारे एक मित्र ने फ़ोन करके बताया कि कोरोना में लॉक डाउन के कारण मैं डिप्रेस्ड (Depression ) महसूस कर रहा हूँ , कोई उपाय बताओ ताकि तुम्हारी तरह मैं भी मस्त हो जाऊँ | मुझे उसकी बात सुनकर… Read More ›

# उम्मीद पर टिकी ज़िन्दगी #

उम्मीद भी बड़ी कमाल की चीज़ है…लोग कहते है ना कि उम्मीद पे ही दुनिया कायम है..वर्ना हम कोरोना काल के ” लॉक डाउन ” को सिर्फ इस उम्मीद से झेल रहे है कि आगे सब  ठीक हो जायेगा |… Read More ›

२१ दिन का २१ सच

पूरा भारत ही नहीं पूरी दुनिया ही pause mode में चला गया है, हमारे यहाँ सड़के सुनी है, आकाश वीरान नज़र आता है,  दुकाने और मॉल बंद पड़े है यहाँ तक कि रेलवे भी भारत के इतिहास में पहली बार… Read More ›

# एक पागल का सपना #

हम सब लोग सपने देखते है और सपने में अजीब अजीब चीज़ देख लेते है | इसका कारण कुछ ठीक ठीक पता नहीं चलता है | कुछ लोग कहते है  कि सपनो में हम अपूर्ण इच्छाओं को पूर्ण होते देखते… Read More ›

# किसान की पगड़ी#

    राजस्थान में “रेवदर” सिरोही जिला का एक छोटा सा क़स्बा,और हमारी बैंक की पहली पोस्टिंग थी | मैं शहरो में पला बढ़ा , पहली बार ग्रामीण ब्रांच होने के कारण गाँव में रहने का मौका मिला | मैं ड्यूटी… Read More ›

# घर में नज़रबंद #

दोस्तों, वैसे तो यह ब्लॉग तब लिखी गई थी जब कोरोना की शुरुआत हुई थी , लेकिन इस में एक घटना का जिक्र है जिसे पढ़ कर हमारे आपसी रिश्ते और सामाजिक अवधारणा के ऊपर हम सोचने को मजबूर हो… Read More ›