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रिक्शावाला की अजीब कहानी …..4

मेरा दिल भी तुझपे क़ुर्बान है क्या तुझमें  बसती  मेरी जान है क्या आँसू से ख़ून होने तक रुलाती है दिल्लगी इतनी भी आसान है क्या.. अंजिला नयी रिक्शा पर बैठते ही पूछा … राजू, तुम “ई- रिक्शा” चला तो… Read More ›

रिक्शावाला की अजीब कहानी ….3

हूँ गरीब,  गरीबी से, अब  तक लड़ता आया हूँ। कुदरत के हर मार को, अब तक सहता आया हूँ।। जो भी बन सका मुझसे, सवाभिमानि बन सब किया, ईमानदारी और मेहनत से, पेट  पालता आया हूँ।। जो किस्मत करता है,… Read More ›

# रिक्शावाला की अजब कहानी # ….2

अंजिला ने पता नहीं क्या जादू कर रखा था कि हमेशा मैं सिर्फ उसके बारे में ही सोचता रहता था | वह मुझे राजेंदर नहीं बल्कि “राजू”  कह कर बुलाती थी, जिसे सुनकर मुझे अपनापन का एहसास होता था |… Read More ›

# रिक्शावाला की अजब कहानी #…1

दोपहर का समय था और मैं ( राजेंदर) खाना खा कर अपने रिक्शा पर बैठा आराम कर रहा था | थोड़ी  ही देर में ही मुझे गुज़रे समय की बातें याद आ रही थी | मैं अपने अतीत में खो… Read More ›

# सफलता का रहस्य #

और वह समय भी आ गया जब तालियों की गड़गड़ाहट के बीच मेरा नाम पुकारा गया…स्टेज पर आकर पुरस्कार स्वरूप ट्राफी ग्रहण करने के लिए | अवसार था, दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में आयोजित बैंक के पुरस्कार वितरण… Read More ›

# मैं तेरी राधा #

मुझे लग रहा था कि वो पिंकी ही है | उसका चेहरा, उसकी आँखे, बात करने की अदा, उसी तरह बोलना, कुछ भी तो नहीं बदला है | हाँ एक चीज मैंने नोटिस किया कि उसके चेहरे पर पहले जैसी… Read More ›

# कलयुग का दशरथ #….6

जो माँ -बाप बच्चों को दुनिया में लाते है , जो ऊँगली पकड़ उन्हें चलना सिखाते है , वही माँ बाप बुढ़ापे में बच्चों को लगते है बोझ, वे बड़ी वेशर्मी से उन्हें वृद्धाश्रम में छोड़ आते है … कौशल्या… Read More ›

# कलयुग का दशरथ #…5

तुझे इस दुनियां में लाई है माँ, …तू रोया तो दूध पिलाई है माँ.. ममता का आँचल ओढ़ाई है माँ, …उँगली पकड़ कर चलाई है माँ बचपन के दिन वो अपने भूल ना जाना, कभी अपनी माँ का दिल ना… Read More ›

# कलयुग का दशरथ #…4

जी चाहता है चुरा लू, दुःख सभी की जिंदगी से, –की देख ना पाऊं दुःख, इक पल भी किसी के चेहरे पे,चाहत है हो दुनिया ऐसी, जहाँ दिखे हर एक की आँखों में ख़ुशी,रोये तो रोये गम रोये, क्यों रोये… Read More ›

# कलयुग का दशरथ # …3

आज दशरथ बहुत खुश था | सुबह- सुबह ही अपने वृद्धाश्रम से चल कर कौशल्या के पास आ गया था. क्योकि अपने डॉ साहब के हॉस्पिटल में न तो समय का बंधन है और ना ही खाने पीने  की तकलीफ… Read More ›